खून के आंसू रुलाने वाली गरीबी को भस्म करने के प्रचण्ड उपाय

downloadबहुत से लोग ये भूल जाते हैं की माता लक्ष्मी का एक नाम चंचला भी है जिसका मतलब ये होता है कि माता लक्ष्मी आपके किसी काम से खुश होकर आपके पास आ तो सकती हैं पर हमेशा आपके साथ आपके घर में रहे ये तब तक संभव नहीं है जब तक कि आप अपने घर में माता के सुख पूर्वक रहने लायक माहौल बनाये नहीं रखेंगे !

माता को खुश करने और उनके सुख पूर्वक रहने के माहौल के जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि माता लक्ष्मी और धन (पैसा) दोनों में अन्तर होता है ! ये सुनकर बहुत से लोगों को आश्चर्य होगा क्योंकि उन्होंने अपने पूरे जीवन भर यही जाना है कि पैसे को ही लक्ष्मी कहते हैं !

अन्तर ये है कि माता लक्ष्मी शक्ति हैं और धन उर्जा है ! आजकल के बड़े से बड़े वैज्ञानिक भी यही गलती करते है की उर्जा (जैसे न्यूक्लियर पावर, सोलर पावर आदि) को ही शक्ति समझते हैं ! पर आज से अनन्त वर्ष पहले ही इस बात का बहुत ही समझदारी से वर्णन किया है दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक, हमारे ऋषि मुनियों ने हमारे परम आदरणीय हिन्दू धर्म के वेद और पुराणों में !

हमारे आदरणीय ऋषियों का कहना है की शक्ति और उर्जा में अन्तर ये होता है कि शक्ति के पास अपना खुद का दिमाग, समझ और बुद्धि होती है जबकि उर्जा के पास कोई दिमाग नहीं होता है ! इसलिए शक्ति को साधा जाता है साधना के माध्यम से जबकि उर्जा का सिर्फ उपयोग किया जाता है !

इसलिए उर्जा का प्रयोग कोई भी बच्चा, नौसिखिया या अनाड़ी भी कर सकता पर शक्ति का नहीं !

अतः धन तो कोई भी कमा लेता है पर उस धन के पास में होने के बावजूद, वो सुखी है कि नहीं सिर्फ वही जानता है !

पाप से कमाए हुए पैसे वाले, भले ही आलिशान घरों में रहे, सब ऐशो आराम से घिरे हों, अपने ह्रदय रोग या डायबिटिज की मजबूरी में बार बार नकली हंसी हँसते हों और दुनिया के नजर में बहुत सुखी हों, पर अन्दर से कितना सुखी होते हैं इसकी सच्चाई बस वही जानते हैं !

कलियुग में महानता के गुण (जैसे- क्षमा, दया, सहायता, हमेशा सच बोलना, शाकाहार आदि) लोगों में कम देखने को मिलतें है इसलिए शक्ति का फायदा बहुत कम लोग ही उठा पाते हैं !

इन शक्तियों में भाग्य बदलने की क्षमता इतनी ज्यादा है की सामान्य आदमी कल्पना भी नहीं कर सकता ! माता सरस्वती, माता लक्ष्मी और माता काली ही इस संसार को पैदा करने वाली, पालने वाली और प्रलय कर नष्ट करने वाली हैं !

इनमे किसी एक भी शक्ति को अगर भक्त हर अच्छे प्रयास करके खुश कर दे तो वो खुद कल्पना नहीं कर सकता की ये शक्तियां उसे कितना कुछ और कितने जल्दी प्रदान कर सकती हैं !

तो माँ लक्ष्मी जो सिर्फ शक्ति ही नहीं, बल्कि महा शक्ति है और जिनके आदि अन्त का रहस्य अनन्त है, ऐसी माँ लक्ष्मी की कृपा का बहुत ही मामूली अंश है धन, रुपया, पैसा, दौलत कमाना !

क्योंकि माँ लक्ष्मी जब कृपा करती हैं तब अथाह धन के साथ साथ मिलती है विश्व व्यापी प्रसिद्धि, सारे रोगों का नाश, बिना मतलब परेशान करने वाले सारे दुष्ट पापियों के अत्याचार से मुक्ति, झूठे मुकदमे से मुक्ति, पारवारिक झगड़ों से मुक्ति, पूरे परिवार की रक्षा और हर समय दिल में महसूस होने वाली एक अनजानी ख़ुशी और उत्साह !

माता लक्ष्मी का प्रसन्न होना और और उनका आपके साथ हमेशा रहना, आसान काम नहीं है खासकर उन लोगों के लिए जिनकी आदतें बिगड़ चुकी है !

नीचे तीन काम लिखे हुए हैं जो हमारे सारे धार्मिक ग्रंथो के सार स्वरुप हैं और जिनसे माता निश्चित ही प्रसन्न हो कर कितनी ही बड़ी गरीबी हो उसे नष्ट करके अथाह सुख सम्पत्ति प्रदान करती है और सदैव साथ निवास भी करती है –

(1) – माता लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए पूरे घर को साफ़ सुथरा करके, माता लक्ष्मी का कोई आसान मन्त्र जिसे आप पूरी शुद्धता और विधि के साथ जप सकें, जपना चाहिए और अगर आप ऐसा कोई मन्त्र नहीं जानते हों तो सबसे अच्छा है कि आप श्री लक्ष्मी चालीसा का 9 बार पाठ करें, बिना गलती और बिना जल्दबाजी किये ! हर मन्त्र की शक्ति बराबर होती है, कोई मन्त्र बड़ा या छोटा नहीं होता है इसलिए हमेशा पूजा पाठ में वही मन्त्र जपना चाहिए जिसमे गलती होने की सम्भावना बिल्कुल भी ना हों, इस लिहाज से श्री लक्ष्मी चालीसा श्रेष्ठ है ! फिर पूजा के अन्त में माता से प्रार्थना करना चाहिए की माता अब तक जो कुछ भी मुझसे जानबूझकर या अनजाने में गलतियाँ हुई हैं, उन सब के लिए मुझे माफ़ करते हुए मेरा हमेशा गलत सही का मार्ग दर्शन करते रहिएगा ! माता के सामने अपनी सारी मनोरथ या इच्छाओं का पिटारा नहीं खोल देना चाहिए क्योंकि दुनिया की कोई भी बात उनसे अनजानी नहीं है ! फिर प्रतिदिन इसी तरह पूजा में 9 बार श्री लक्ष्मी चालीसा का प्रेम से पाठ करना चाहिए !

(2) – माता लक्ष्मी सत्व गुण की देवी हैं इसलिए उन्हें तामसिक (राक्षसी) आचरण बिल्कुल भी पसन्द नहीं हैं ! जहाँ भी तामसिक आचरण होगा वहां वो रह ही नहीं सकती ! तामसिक आचरण दो प्रकार के होते है, पहला प्रकार है, तामसिक चीजों को खाना जैसे – मांस, मदिरा, नशा आदि और दूसरा प्रकार है तामसिक व्यवहार करना जैसे – झूठ बोलना, धोखा देना, अपने पर भरोसा करने वालों को ठगना, अपने से बड़ों का अपमान करना, हर समय दूसरों की चुगली करना, हर समय दूसरों का बुरा होने और करने के बारे में सोचना, दूसरों की तरक्की से जलना ईष्या करना, गन्दगी से रहना और गन्दे कपड़े पहनना, हर समय दूसरों से कड़वा बोलना आदि ! कुछ मूर्ख लोग अंडा को शाकाहारी कहते हैं जो की नितान्त गलत है ! साथ ही बाजार में मिलने वाले ऐसे सामान जिसमे जानवरों से बने सामान मिले होने की आशंका हो (जैसे- टॉफी, चाकलेट्स, नुडल्स, बर्गर, लिपस्टिक, क्रीम, डियो, परफ्यूम आदि में) बिल्कुल प्रयोग नही करना चाहिए !

(3) – ये संकल्प लेना चाहिए की मेरे जैसे साधारण व्यक्ति के साधारण प्रयास से माँ भगवती लक्ष्मी मुझ पर प्रसन्न होकर मेरी समृद्धि में वृद्धि करती हैं तो मै अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गरीबों और दुखियारों की सेवा में जरूर खर्च करूंगा ! हमारे शास्त्रों में कहा गया है की दान करने से धन निश्चित ही बढ़ता है ! अतः हर आदमी को दान जरूर करना चाहिए !

तो ये ऊपर लिखे तीन काम इतने अचूक और अमृत स्वरूप हैं जिससे कई पीढ़ियों से भयानक गरीबी की मार झेल रहे दुखियारे आदमी के घर भी माता महा लक्ष्मी संसार के सारे सुख लेकर निश्चित ही पधारती हैं !

तो बोलिए ममता की सागर महा माता लक्ष्मी की………जय ! !

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