सभी बीमारियो को दूर करने का बहुत लाभप्रद तरीका

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यह जानकारी है ऐसे तरीको के बारे में जो बीमारी चाहे कुछ भी हो आराम पहुचाते ही है।

मतलब बीमारी चाहे कैंसर हो या जुकाम, चाहे एड्स हो या सिर दर्द, अंधापन हो या पेट दर्द, पीलिया हो या नपुंसकता, ह्रदय रोग हो या डायबिटीज, टी बी हो या पथरी, बवासीर हो या गंजापन, गिल्टी हो या कमरदर्द, किडनी की खराबी हो या ब्लड प्रेशर , स्याटिका हो या गठिया, फाइलेरिया हो या मलेरिया, विकलांगता हो या लकवा, कोमा हो या खुजली, सफ़ेद दाग हो या हड्डी की कमजोरी,  मतलब हर बीमारी में यह लाभ पहुँचाता ही पहुँचाता है अगर नीचे दिए गए तरीको को सावधानी से और लम्बे समय तक नियम से किया जाय तो।

और हाँ अगर आप पहले से स्वस्थ है तो इन प्रयोगो को करने से आप हमेशा अपने आप को युवा और स्वस्थ महसूस करेंगे। बीमार लोगो को यह प्रक्रिया खोयी हुई युवा अवस्था, शारीरिक ताकत को पुनः प्राप्त करवा कर उनके शरीर को फौलाद की तरह मजबूत बनाने में निश्चित ही बहुत सहयोग देगी ।

इस तरीके या इस इलाज़ में दो काम करने पड़ते है –

पहले काम में कुछ आयुर्वेदिक दवाये खानी पड़ती है और ये आयुर्वेदिक दवाये ऐसी है जिन्हे आयुर्वेद में रसायन कहते है। आयुर्वेद में रसायन उन जड़ीबूटियों को कहते है जिनसे रोग और मृत्यु दूर भागते है। ये आयुर्वेदिक दवाये बहुत आसानी से हर जगह मिल जाती है इसलिए कई मूर्ख लोग इनके प्रचंड फायदे को नहीं समझते। पर अगर इन जड़ीबूटियों को नियम से लंबे समय तक खाया जाय तो शर्तिया चमत्कारी फायदा होता है।

अगर आप महानगरो में रहते है और आपको ये दवाये रोज – रोज,  ताजी अवस्था में न मिल सके तो निराश होने की जरुरत नहीं है क्योकि आपको ये दवाये श्री बाबा रामदेव के पतंजलि स्टोर से सूखी अवस्था में (टेबलेट या पाउडर रूप में) भी मिल सकती है। यहाँ पर ध्यान देने वाली बात ये है की पौधों को सूखा कर बनायीं गयी दवाये भी लगभग उतना ही फायदा करती है जितना ताजे हरे पौधों से तुरंत तैयार की गयी दवा पर किसी बीमारी में आराम पहुचाने में सूखी दवा, ताजी दवा से कुछ ज्यादा समय लेती है लेकिन आराम पहुचाती जरूर है।  श्री बाबा रामदेव की दवाये 100 % शुद्ध और असली होती है इसलिए ताजी हरी जड़ीबूटियां रोज -रोज ना मिल पाने की स्थिति में श्री बाबा रामदेव की दवा बेहिचक इस्तेमाल की जा सकती है।

ये आयुर्वेदिक जड़ीबूटियां है, – (1) तुलसी पत्ती,  (2) गोमूत्र,   (3) त्रिफला चूर्ण

अब इन दवाओ को कब, कैसे और कितना खाना है ये जानना जरूरी है।

असल में इस चीज को आपको ही तय करना है। मतलब इन सारी दवाओ को सुबह – सुबह बासी मुह खाने से सबसे ज्यादा फायदा होता है। पर आप अपनी सुविधा के हिसाब से इन दवाओ को कभी भी खा सकते है पर ध्यान दे की तुलसी जी की पत्तियों को सूर्यास्त के बाद नहीं लेते और इन सारी दवाओ के खाने के आधा घंटा पहले और आधा घंटा बाद कुछ भी (खासकर दूध से बने सामान) ना खाए ना पिए। वैसे तो इन दवाओ के खाने की जो सामान्य मात्रा है, वह है, 5 से 8 पत्ता तुलसी जी की, 1 छोटा चम्मच त्रिफला चूर्ण, 1 चम्मच गोमूत्र ।

गोमूत्र के साथ ध्यान देने वाली बात ये है कि जिन गाय माता की मूत्र हो वो बीमार ना हो और गर्भवती भी ना हो. और सिर्फ देशी गाय माता का ही मूत्र, दूध और गोबर फायदेमंद है जबकि जर्सी गाय के दूध पीने से कैंसर होता है। वैज्ञानिको के द्वारा, देशी गाय को अधिक दूध पैदा करने के लिए देशी गाय के जींस में परिवर्तन करके जर्सी गाय को विकसित किया गया है। जर्सी गाय दूध तो अधिक देती है पर उसके दूध पीने से शरीर में कई किस्म की बीमारिया पैदा होती है।

इसी तरह वैज्ञानिको ने खेती की पैदावार बढ़ाने के लिए लगभग हर सब्जी, हर अनाज (गेहू-चावल-दाल आदि ) में सैकड़ो बार प्रयोग करके अनेक नयी नयी किस्मे पैदा कर दी है और ये सभी किस्मे न जाने मानव शरीर पर क्या – क्या बुरे प्रभाव डाल रही है। इंसान द्वारा प्रकृति के नियमो से छेड़छाड़ गलत है और इसके परिणाम हमेशा से घातक रहे है। भगवान ने जो ओरिजिनल सब्जियों और अनाजों की प्रजातिया डेवेलप की थी वही फायदेमंद है, बाकि इंसानो के द्वारा जेनिटकली मॉडिफाइड अनाज मात्रा में तो ज्यादा पैदा होते है पर उनके गुणों का ह्रास हो जाता है।

अगर आपको  दवाओ को रोज रोज शुद्ध रूप से इकट्ठा करने में दिक्कत हो रही है तो आप श्री बाबा रामदेव की निम्नलिखित दवाओ को खरीद सकते है जिनसे ऊपर लिखे लाभ मिल जायेंगे। तुलसी जी की पत्तिया ना मिले तो तुलसी घन वटी खरीद ले, गोमूत्र ना मिले तो गोधन अर्क ख़रीदे और घर पर त्रिफला चूर्ण न बना सके तो पतंजली स्टोर से त्रिफला चूर्ण (पाउडर) ख़रीदे।

इन दवाओ को खाने का सबसे आसान तरीका है की सुबह – सुबह खाली पेट इन दवाओ को खाकर दो गिलास पानी पी लिया जाय और फिर आधा घंटा तक कुछ भी  खाया पिया ना जाय। और अगर आपको गोमूत्र पीने के बाद मुह में बदबू महसूस हो तो आप इलायची खा सकते है। लेकिन सिर्फ बदबू और स्वाद की वजह से गोमूत्र जैसी जबरदस्त फायदेमंद चीज को ना लिया जाय तो मूर्खता ही है।

आप अपनी बीमारी की गम्भीरता के हिसाब से, ऊपर लिखी हुई दवाओ की मात्रा घटा बढ़ा सकते है। मतलब आपको तकलीफ ज्यादा हो तो आप दवाओ की मात्रा भी किसी जानकार वैद्य की सलाह से बढ़ा सकते है। यहाँ पर लिखी हर एक दवा अपने आप में अकेले ही सारी बिमारिओ का धीरे – धीरे नाश करने की ताकत रखती है।

और हाँ अगर आपका पहले से कोई भी होम्योपैथिक, ऐलोपैथिक, आयुर्वेदिक या अन्य कोई भी पैथी का इलाज़ चल रहा हो तो आप उसके साथ इन ऊपर लिखी हुई दवाओ को ले सकते है।

तो ये रहा पहला काम, की ऊपर लिखी हुई तीनो दवाओ को रोज खाना।

तो  दूसरा काम क्या है !!

दूसरा काम करने से पहले ये समझने की जरूरत है कि दूसरे काम करने की जरूरत क्या है ?

देखिये हमारे हिन्दू धर्म के सारे शास्त्र, पुराण, ग्रन्थ एक ही बात बार – बार कहते है कि दुनिया का कोई भी आदमी जो कुछ भी दुःख, तकलीफ, समस्या (चाहे वह कोई भी बीमारी, एक्सीडेंट, गरीबी, मुकदमेबाजी, अपमान, मारपीट, विकलांगता, बुरी आदत हो या किसी भी किस्म की लाचारी) झेलता है, वो सारी तकलीफे- दर्द  उस आदमी के इस जन्म या अनगिनत पिछले जन्मो के बुरे कर्मो का हिसाब – किताब ही है।

बहुत ही सीधा सा और सभी जीवित लोगो पर लागू होने वाला भगवान का बनाया हुआ कठोर नियम है कि अच्छे काम करने से सुख मिलता है और बुरे काम करने से दुःख मिलता है और ये सुख – दुःख हमें आज मिलेगा या कुछ समय बाद मिलेगा या अगले जन्म में मिलेगा इसका निर्णय सिर्फ भगवान ही करते है लेकिन एक बात 100 %  तय है कि हमारे द्वारा किये गए कामो का फल हमें मिलेगा जरूर।

इस कलियुग में बुरे काम करने वाले लोग ज्यादा है और कई बार बुरे काम करने वाले लोग धन – दौलत, पावर के क्षेत्र में बहुत सुखी भी देखे जाते है पर इसका मतलब ये नहीं की इन्हे इनके बुरे कामो का फल मिलेगा ही नहीं !!

बुरे काम करने वाले पहले तो गलत तरीको से खूब पैसा जमा करते है फिर जब उनके पाप से जमा किया हुआ पैसा उनके लिए कई तरह की समस्या, झंझट या बीमारिया पैदा करने लगता है तो वो उसके इलाज़ के लिए अमेरिका, लंदन, मुंबई, दिल्ली भागते है। और वहा जाने पर पता चलता है की आजकल का जो so called Allopathic मेडिकल साइंस है उसमे जुकाम तक का ठीक से इलाज़ नहीं है तो उनकी बड़ी – बड़ी बीमारिया कैसे ठीक हो और ऊपर से दुनिया भर के खतरनाक भयंकर साइड इफेक्ट्स अलग से।

तो अंत में अपनी बीमारी- तकलीफ से परेशान होकर ऐसी काली कमाई करने वाले हर मंदिर – फ़क़ीर के पास दौड़ते है और करोड़ो अरबो रूपए चंदा देते है कि थोड़ा सा उन्हें आराम मिल जाय ।

बुरे कर्म ही दुर्भाग्य बनाते है, जिसकी वजह से  खूब धन – दौलत होने के बावजूद आदमी एक – एक रोटी खाने को तरसता है। हम सब लोगो ने इस जन्म में और पिछले कई जन्मो में जाने अनजाने कई बड़े छोटे गलत काम किये होते है और ये हमें पता नहीं होता की उसका हमने अब तक प्रयाश्चित किया है की नहीं। बार बार जन्म लेना और मरने के खेल का अंत ही मोक्ष होता है। मोक्ष का मतलब होता है भगवान (यानी परम सुख) में ही समा जाना सदा सदा के लिए।

अब इसमें देखने वाली बात ये है कि कोई आदमी जिसने खूब गरीबो का पैसा अपनी जेब में डाला हो या कई लोगो से मारपीट झगड़ा किया हो या निर्दोषो को सताया हो तो अगर ऐसे पापी दुष्ट आदमी को कोई बीमारी हो जाय, तो वो आदमी कैसे केवल दवा की गोली खाने से ठीक हो जायेगा   !!!!    

उसको उसके बुरे कर्मो की सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी और ऐसे में वह कोई भी दवा खाए उसे इतनी आसानी से परमानेंट आराम मिलेगा ही नहीं।

बहुत ध्यान से समझने वाली बात है कि अपने ही बुरे कर्मो का भोग जो हमें सजा के तौर पर बीमारी या अन्य कोई सामाजिक दिक्कत के रूप में मिली हो उसे आखिर हम कैसे ख़त्म कर सकते है ??

ख़त्म कर सकते है भी, की नहीं ??

तो चिन्ता करने की जरुरत नहीं है क्योकि निश्चित तौर पर अपने द्वारा किये गए पापो को खत्म किया जा सकता है जिसके दो सर्वप्रचलित तरीके है।

पहला तरीका है की हमें अपने ही द्वारा किये गलत कामो की जो भी सजा भगवान के द्वारा बीमारी या अन्य किसी तकलीफ के तौर पर मिली है उसे हम अपना दुर्भाग्य समझ कर झेल ले या दूसरा तरीका है कि हम अपने द्वारा किये हुए पापों को ही जला दे !!!

अब पाप कैसे जलते है, इसके भी दो आसान तरीके है, पहला है नर सेवा, दूसरा नारायण सेवा (वास्तव में नर सेवा और नारायण सेवा कोई अलग अलग चीज नहीं है, एक ही है, पर यहाँ समझने की आसानी के कारण अलग अलग बताया जा रहा है) ।

मतलब नर सेवा में आप अपनी ईमानदारी की कमाई से तन, मन, धन से गरीबो, जरुरतमंदो, असहायों, अनाथ बच्चो, वृद्ध महिला पुरुषो, रोगियों, माता – पिता, गुरु जानो, निर्दोष जीव जन्तुओ ( मुर्गा, बकरा, भैसा, अंडा, गाय माता) आदि लोगो की जितनी ज्यादा से ज्यादा सेवा, सहायता, मदद कर सके उतना ही अच्छा है आपके खुद के फायदे के लिए या यूँ कहे आपकी खुद की बीमारियो के नाश के लिए।

इन सभी लोगो की सेवा और सहायता करने से आप के पाप बहुत तेजी से खत्म होते है और आपको बिना किसी दवा या जड़ी बूटी के भी कुछ ही दिनों में आराम निश्चित ही मिलने लगेगा।

और दूसरे तरीका यानी नारायण सेवा के यों तो बहुत से तरीके धर्म ग्रंथो में दिए गए है पर सबसे आसान है की भगवान के किसी भी नाम का रोज अधिक से अधिक बार, मुह से या मन में जप करना या बोलना।

इस तरह भगवान के अति पवित्र नाम को लगातार याद करने से पाप बहुत तेजी से जलते है क्योकि पुराणो में कहा गया है कि भगवान के हर नाम में इतने पाप नष्ट करने की शक्ति है जितने पाप कोई आदमी अनन्त जन्मो में भी नहीं कर सकता।

इसलिए कोई भी भगवान का नाम (चाहे राम कहे या शिव, चाहे गोपाल कहे या माधव) अपनी रूची के अनुसार चुने और खूब जपे।

भगवान के हर अलग – अलग अवतार के नाम भले ही अलग अलग हो पर हर नाम की शक्ति बराबर है। किसी भी नाम में शक्ति कम या अधिक नहीं है।

भगवान के सभी नामो की शक्ति बहुत ही प्रचण्ड होती है जो की लगातार जपने से धीरे – धीरे खुद ही समझ में आने लगती है।

ये नाम जप किसी भी समय और किसी भी जगह (चाहे घर हो या ऑफिस, टॉयलेट हो या बेड रूम, नंगे पाँव हो या जूता पहने हुए) किया जा सकता है।

और अगर पेशेंट की हालत इस कंडीशन में ना हो कि वो खुद भगवान के नाम का स्मरण कर सके तो पेशेंट के घर परिवार का कोई भी आदमी पेशेंट के स्वास्थ लाभ के लिए जप कर सकता है लेकिन जो भी करे भगवान के नाम का जप जल्दी – जल्दी करने में गलत उच्चारण ना करे। और जैसे ही पेशेंट ठीक होने लगे उसे अपने स्वास्थ लाभ के लिए खुद ही जप शुरू कर देना चाहिए क्योकि खुद की समस्या के लिए खुद ही जप करने से ज्यादा फायदा होता है।

और हाँ एक बात याद रखे कि जब धीरे – धीरे आपके सारे पापो का नाश होने लगेगा तो आपकी जिंदगी से धीरे – धीरे दुःख नाम की चीज़ खत्म होने लगेगी और साथ ही साथ आपकी सारी मनोकामनाए भी अपने आप धीरे – धीरे पूरी होने लगती है और जिंदगी में हर पल, हर जगह सिर्फ खुशिया ही खुशिया दिखने लगती है। कई अनुभवी संतो का कहना है की भगवान के नाम का लगातार बिना हिम्मत हारे, धैर्य पूर्वक जप करते रहने से एक न एक दिन भगवान का दर्शन भी निश्चित होता है।

तो ऐसे में सबसे अच्छा यही है की जल्दी से किसी भी बीमारी से मुक्ति पाने के लिए ऊपर लिखे सारे काम आदमी एक साथ करे मतलब ऊपर लिखी तीनो आयुर्वेदिक दवाओ को नियम से खाए, और बिना कोई घमंड किये सभी लोगो की अधिक से अधिक सहायता करे और भगवान के नाम को भी लगातार याद करता रहे तो क्यों नहीं और कैसे नहीं, किसी आदमी (चाहे वो कितना भी परेशान हो) को उसकी बीमारी और अन्य सारी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा !!!

इन सब बातो के लिए भी रहे सावधान –

(1) –    मांस, मछली, अंडे खाने वालो की कोई भी प्रार्थना भगवान नहीं सुनते और ऐसे लोगो को शाकाहारी लोगो की तुलना में ज्यादा कठिन बीमारिया और तकलीफ होती है। इसलिए अगर ठीक होना चाहे तो मांसाहारी खाना तुरंत छोड़ देना चाहिए और घर परिवार, रिश्तेदारी, दोस्तों और परचितो से भी मांसाहार को छुड़ाना चाहिए क्योकि आपके प्रयास से अगर किसी निर्दोष जानवर की जान बच जाती है तो उस जीव का बहुत सा आशीर्वाद आपको लगेगा जो की आप के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा और हाँ ध्यान देने वाली बात है यह भी है की आजकल ये हर जगह सुनने में आ रहा है की बहुत सी विदेशी कम्पनीयो के डिब्बा बंद खाने – पीने के सामानो और कॉस्मेटिक्स (जैसे – चॉक्लेट, टॉफ़ी, नूडल्स, ब्रेड, चाय की पत्ती, टूथ पेस्ट और टूथ पाउडर, साबुन (सोप) और हैंड वाश, केक, लिपस्टिक, फेस क्रीम और पाउडर, परफ्यूम, डिओड्रेंट आदि ) में धड़ल्ले से जानवरो से बनायीं हुई चीजे मिलायी जाती है और ऊपर से धोखा देने के लिए शाकाहारी का ग्रीन मार्क भी लगा दिया जाता है। विदेशी कंपनीया ऐसा इसलिए करती है क्योकि उनके लिए मांस मछली कोई बुरी चीज नहीं है और बिना अण्डा या मीट पाउडर या मीट एसेन्स  मिलाये उनकी कंपनी के बनाये हुए सामानो में वो फ्लेवर नहीं आता जो वो चाहती है। तो ऐसे में इन धोखेबाज़ बड़ी बड़ी विदेशी कम्पनीयो से भी बचना बहुत जरुरी है। इसलिए किन बाजार के खाने पीने के सामानो में अण्डे या मांस की मिलावट हुई है इसकी कन्फर्म जानकारी इंटरनेट से या अन्य किसी तरीके से जरूर लेकर ही खाना चाहिए और अगर जानकारी न मिले तो खाना ही नहीं चाहिए।

(2) –    दोपहर और रात के खाने के आधे घंटा पहले से लेकर 1 घंटा बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए, नहीं तो गैस बनेगी और खाना भी धीरे – धीरे पचेगा। खाना खाने के बीच में आधा ग्लास पानी पी सकते है। और सुबह बासी मुह छोड़कर कभी भी एक साथ एक ग्लास से ज्यादा पानी नहीं पीना चाहिए पर दिन भर में 3 से 4 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए। फ्रीज़ का ठंडा पानी नुकसान करता है और इसे पीने से शरीर में गिल्टिया निकल आती है इसलिए फ्रीज़ के पानी की जगह मिटटी के घड़े (सुराही) का पानी पीना चाहिए और कोशिश करिये हमेशा ताजा बना हुआ कम तेल मसाले का बना हुआ खाना खाए। एक बहुत ध्यान देने वाली बात यह है की जिस घर में रोज  बार – बार खाने पीने का सामान, खाने के बजाय कूड़े में फेका जाता है ये 100 % निश्चित है की उस घर के लोग कभी भी सुखी नहीं रह सकते क्योकि अन्न का अपमान साक्षात ईश्वर का अपमान है।

आप अपने घर में उतने ही सामान (जैसे फर्नीचर, कपड़े, गाड़िया, गहने आदि ) रखिये जितने की वाकई में आपको जरुरत है क्योकि जरुरत से ज्यादा सामान खरीदते जाने से मन में निश्चित ही बेचैनी, उलझन बढ़ने लगती है।

(3) –   किसी भी तरह का नशा चाहे सिगरेट, गुटखा या शराब का हो शरीर को खोखला कर देता है। जल्दी उम्र में बुढ़ापा, नपुंसकता, कैंसर जैसे जान लेवा बीमारी पैदा करता है इसलिए अगर आप ऐसा करते है तो तुरन्त छोड़ दे और ऐसे नशेड़ी दोस्तों से भी एकदम दूरी बना ले ।

(4)-    किसी भी तरह का बुरा बिज़नेस या नौकरी नहीं करना चाहिए जैसे – नशे का, मांस – मछली अण्डे का, क्योकि नशे के कारोबारियों को,  नशे से बर्बाद हुए लोगो की बद्दुआए लगती है और वो खुद ही कुछ दिनो बाद अनगिनत समस्याओं से घिर जाते है।

(5) –   कई व्यापारी सामानो में मिलावट करने और कई कर्मचारी रिश्वत लेने के इतने आदती हो चुके है कि उनको इसमे कोई बुराई नहीं लगती। ऐसे लोगो की आँखे तभी खुलती है जब वे खुद कई समस्याओ और तकलीफो से घिर जाते है। ऐसे में जब आँख खुले तभी सवेरा …… तभी से सुधार लाना चाहिए।

(6) –   खाने पीने के हर सामान को जरुरत से ज्यादा मतलब औकात से ज्यादा खाना, या,  बार – बार भूख मारना मतलब भूख लगने पर भी ना खाना बहुत गलत है। बार- बार पेशाब या लैट्रिन के प्रेशर को रोकना भी बहुत ही नुकसान करता है। बाजार के सामान जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, पिज़्ज़ा, बर्गर, चाट, पकौड़ी, डिब्बाबंद प्रिज़र्वेटीव डाले हुए खाने के सामान, आचार, मिठाईआ, चाय – कॉफी, आइसक्रीम, नूडल्स आदि ऐसे चीजे है जिनको कोई भी ये नहीं कह सकता की इनको खाने से सेहत बनती है !! जितना कम से कम इस्तेमाल करे उतना बेहतर।

(7) – हर मामूली से मामूली और बड़ी से बड़ी एलोपैथिक दवा का कुछ न कुछ साइड इफेक्ट्स होता है और एलोपैथिक दवा से कोई रोग परमानेंट ठीक भी नहीं होता है बल्कि हर कुछ दिन बाद एलोपैथिक दवा का पावर भी बढ़ाना पड़ सकता है, नहीं तो फायदा कम महसूस होता है। इसलिए कोशिश करिये कि किसी योग्य चिकित्सक की सलाह से एलोपैथिक दवा धीरे – धीरे कम करते हुए आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवा शुरू हो ।

(8) –   अगर आप कोई प्राणायाम या एक्सरसाइज करते है तो नीचे लिखे कुछ बातो का जरूर ध्यान दे नहीं तो फायदे के बजाय भयंकर नुकसान हो जायेगा —

– अगर आपने कोई लिक्विड पिया है चाहे वह एक कप चाय ही क्यों ना हो तो कम से कम डेढ़ से दो घंटे बाद प्राणायाम करे और अगर आपने कोई सॉलिड (ठोस) सामान खाया हो तो कम से कम 5 घंटे बाद प्राणायाम करे।

– अगर पेट में बहुत गैस हो या हर्निया या अपेण्डिस्क का दर्द हो या आपने 6 महीने के अंदर पेट या हार्ट का ऑपरेशन करवाया हो तो प्राणायाम न करे।

– प्राणायाम करते समय रीढ़ की हड्डी एकदम सीधी रखे और चेहरे को ठीक सामने रखे (अक्सर लोग चेहरे को सामने करने के चक्कर में या तो चेहरे को ऊपर उठा देते है या जमींन की तरफ झुका देते है जो की गलत है )

– कोई ऊनी कम्बल या सूती चादर बिछाकर ही प्राणायाम करे (नंगी जमींन पर बैठ कर प्राणायाम ना करे। और प्राणायाम के 5 मिनट बाद ही जमींन पर पैर रखे। ये बार – बार देखा गया है कि हजारो लोग ऊपर दी गयी मामूली सावधानियों का पालन नहीं करते और प्राणायाम से उनको फायदे के जगह नुकसान पहुचता है और अन्त में वे प्राणायाम को कोसते फिरते है कि उनको प्राणायाम से फायदा नहीं बल्कि नुकसान हुआ। जबकि प्राणायाम एक बहुत दिव्य क्रिया है और हठ योग के अनुसार प्राणायाम करने से भी पाप जलते है जैसे की भगवान का नाम जपने से इसलिए अगर आप बहुत कमजोर नहीं है तो आप प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट कपाल भाति और 10 मिनट अनुलोम विलोम प्राणायाम जरूर करे। प्राणायाम का समय धीरे – धीरे बढ़ाना चाहिए ना कि पहले ही दिन से 15 मिनट प्राणायाम शुरू कर देना चाहिए अन्यथा गर्दन की नली में खिचाव या कोई अन्य समस्या पैदा होने का डर रहता है।

(9) –        जितना हो सके अपने और अपने परिवार को कीटनाशक (पेस्टिसाइड) वाली सब्जिया, फल और अनाज कम से कम खिलाये। आज कल 100 % सब्जियों में भयंकर कीटनाशक, 100 % फलों पर (खासकर महंगे फलो जैसे सेब, अनार आदि) और 100 % अनाजों पर (दाल, चावल, गेहू) भयंकर कीटनाशक खूब धड़ल्ले से रोज डाला जा रहा है। और साथ ही सैकड़ो किस्म की खतरनाक रासायनिक खाद भी डाली जा रही है जिससे आदमी की नस्ल, पशु पक्षियों की नस्ल और धरती माँ की उपजाऊ क्षमता सब खतरे में पड़ गयी है। इन भयंकर कीट नाशको की वजह से हर साल हज़ारो किसान जो इनका खेतो में छिड़काव करते है खुद ही मर जाते है। और इन कीटनाशको के साथ पैदा हुई सब्जिया अलग – अलग किस्म का कैंसर पैदा कर रही है। ऐसे में ये जरुरी है कि आप जब बाजार सब्जी खरीदने जाय तो सब्जी के दुकानदारो पर रोज दबाव बनाये की वह सिर्फ गोबर खाद से पैदा हुई सब्जियों को ही आपको दे।

(10) –      सबसे आखिरी में एक और मुख्य बात यह है कि, आपकी किन लोगो और किन चीज़ो से संगती है यही आपकी जीवन की राह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संगती जैसी बातो को मामूली बाते कहकर बहुत से लोग टाल जाते है पर इसका बहुत गहरा असर पड़ता है हमारी आदतो, स्वभाव और सोचने के तरीको पर। इसलिए जितना हो सके उतना दुष्ट, भ्रष्टाचारी, पापी लोगो से दूरी बना कर रखे और अगर ऐसा ना हो सके तो अधिक से अधिक भगवान की संगती करे मतलब अधिक से अधिक भगवान का नाम जप करे जिसके की असंख्य फायदे है।

तो इन बातो को ध्यान में रखने से और अपने जीवन में उतारने से निश्चित ही बड़ी सी बड़ी बीमारी हो या सामाजिक संकट, में बहुत लाभ पहुँचता है। और धीरे – धीरे हर समय अपने अंदर एक सुन्दर सी ख़ुशी महसूस होती है जो की प्रतिदिन बढ़ती ही जाती है।

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