झगड़ालू, बदतमीज स्वभाव बदलने और नशे की लत छुड़ाने का सबसे आसान तरीका

· September 22, 2016

876248679_0e1537b9aa_oकिसी एक आदमी के गंदे स्वभाव की वजह से या पूरे परिवार के सभी लोगों के झगड़ालू स्वभाव की वजह से घर तबाही के कागार पर पहुच रहा हो तो ऐसे में इस तरीके को आजमाने से बहुत सुखद परिणाम मिलता है !


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पति रोज शराब पीकर घर में गाली गलौच मार पीट करता हो या पत्नी बहुत झगडालू स्वभाव की हो, लड़का आवारा हो और बुरे दोस्तों के साथ मिलकर दुनिया भर के गलत काम करता हो या लड़की परिवार की इज्जत ताक पर रखकर स्वेच्छा चारिणी हो गयी हो, मतलब किसी भी आदमी के बुरे स्वभाव से सम्बंधित समस्या हो, तो परम आदरणीय श्री हनुमान जी के इस मन्त्र के जप करने से निश्चित ही फायदा मिलता है !

हर तरह का नशा (चाहे सिगरेट, बीड़ी, शराब, तम्बाखू का हो या चरस, अफीम, हेरोइन का) छोड़ने vv6307374507_d946b4e9df_bमें उम्मीद से बढ़कर फायदे मंद है !

इतना ही नहीं कोई गहरी निराशा या दुःख हो तो वो भी दूर होता है क्योंकि श्री हनुमान जी उसका कारण भी दूर करते हैं ! बच्चों का पढने में, नौकरी या व्यापार में मन ना लग रहा हो, या पति का नाजायज गैर औरत से सम्बन्ध हो तो, वो भी समस्या जरूर दूर होती है !

इस मन्त्र की सबसे बड़ी खास बात है की इस मन्त्र को जो जप करता है या जिसके सुधार के लिए जप किया जाता है, वो आदमी धीरे धीरे निश्चित ही एक अच्छा, नेक, बहुत मेहनती और सज्जन इन्सान बनने लगता है ! कुछ मूर्ख लोगों को यह भी भ्रम होता है की कोई आदमी अगर सज्जन होगा तो वो निश्चित गरीब होगा क्योंकि ज्यादा पैसा कमाने के लिए चालाकी और झूठ का सहारा जरूरी है ! ऐसे लोगों का भ्रम भी दूर हो जाता है anger-18615_960_720इस मन्त्र के जप से क्योंकि जब परम सत्ता वाकई जुड़ जाती है किसी आदमी के साथ तो वो ईमानदारी से अथाह दौलत कमाता भी है और बांटता भी है !

बुरा आदमी अगर अपने स्वभाव की बुराई को दूर करने के लिए खुद जप करे तो सबसे तेज फायदा मिलता है, पर बुरे स्वभाव वाले को बुरा इसलिए तो कहते हैं क्योंकि वो कोई अच्छा काम करना ही नहीं चाहता है !

तो ऐसे बुरे स्वभाव वाले आदमी का, भला चाहने वाला कोई भी परिचित हितैषी आदमी जो उसका स्वभाव सुधारना चाहता हो, वो उसके लिए जप कर सकता है ! और यह एक बहुत पुण्य का भी काम है क्योंकि किसी के मेहनत से किसी आदमी की गन्दी बुरी जिंदगी, धीरे धीरे बदल कर साफ़ सुथरी होने लगे तो ईश्वर प्रसन्न होते है !

जप करना बहुत ही आसान है ! इसमें बस शुरू में श्री हनुमान जी से प्रार्थना करनी है की भगवान् मै उस आदमी (जिसका स्वभाव ठीक करना हो) के स्वभाव से बहुत परेशान हूँ इसलिए कृपया उस आदमी के स्वभाव की सारी बुराइयों को दूर कर उसे एक अच्छा इन्सान बनाइये !

और अगर कोई आदमी पूरे परिवार के स्वभाव से परेशान हो तो, प्रार्थना में आदमी के नाम की जगह, श्री हनुमान जी से कहे की पूरे परिवार के स्वभाव की बुराइयों को दूर करें और पूरे परिवार में खूब प्रेम भाई चारा पैदा करें !

प्रार्थना के बाद श्री हनुमान जी के हनुमान चालीसा के नीचे दिये गये मन्त्र का जितना आराम से हो सके उतना vzlord_hanumanजप करे ! कोशिश करें की जप की संख्या रोज बराबर रहें, किसी दिन कम या ज्यादा ना रहें !

ये तो है की जप जितना ज्यादा होगा उतना जल्दी फायदा मिलेगा पर ज्यादा करने के चक्कर में गलत जप नहीं करना चाहिए ! जप के समय रीढ़ की हड्डी सीधे रहे तो बेहतर है, इसलिए या तो सीधे बैठ कर या सीधे लेटकर जप किया जा सकता हैं ! पूजा के अन्त में भगवान् हनुमान जी से माफ़ी मांगना चाहिए की मुझसे जानबूझकर और अनजाने में जो कुछ भी गलतियाँ हो गयी हैं कृपया उन सब के लिए मुझे माफ़ करिए !

अगर कोई बहुत बीमार, बूढ़ा या घायल हो तो उसके ऊपर कोई नियम – परहेज आदि लागू नहीं होता और वो कभी भी जप कर सकता है ! लेकिन कोई अपेक्षाकृत ठीक शारीरिक अवस्था में हो तो उसके द्वारा इस मन्त्र को जपते समय उसके शरीर पर चमड़े का कोई सामान (जैसे – बेल्ट आदि) नहीं होना चाहिए और लैट्रिन, पेशाब व खाना खाते समय भी नहीं जपना चाहिए, बाकि हर समय जप सकते हैं !

भगवान के नाम और भगवान के मन्त्र, दोनों के जप में अन्तर होता है ! भगवान के नाम का जप कहीं भी, बिना शुद्ध अशुद्ध अवस्था का परहेज किये जा सकता है जबकि भगवान के मन्त्र का जप अशुद्ध जगह (जैसे – लैट्रिन, पेशाब, झूठे मुंह, चमड़े का स्पर्श, पत्नी या पति के साथ रति क्रिया आदि) पर नहीं करना चाहिए ! लेकिन बहुत बीमार, बूढ़े या घायल होने पर कोई नियम – परहेज आदि लागू नहीं होता ! पर एक बात का परहेज सभी पर लागू होता है, और वो है कि भगवान के किसी भी नाम या मन्त्र का गलत उच्चारण नहीं करना चाहिए नहीं तो फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है !

ध्यान रहे की श्री हनुमान जी परम सत्व गुण के देवता हैं इसलिए जप करने वाले को खुद, तामसिक भोजन मतलब मांस, मछली, अंडा, शराब, बियर आदि का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए और ना ही ऐसे मार्केट में मिलने वाले सामान जिसमें ये सब मिले होने की सम्भावना हो (जैसे – पिज्जा, बर्गर, चाकलेट, नूडल्स, कॉस्मेटिक, लिपस्टिक, डीयो आदि) का सेवन या इस्तेमाल करना चाहिए !

ये मन्त्र बहुत ही आसान है जो की हनुमान चालीसा में देखने को मिलता है ! बहुत से लोगों को ये पता ही नहीं होता है की इस मन्त्र से स्वभाव की बुराइयाँ बहुत तेजी से दूर होती हैं ! पर कोई भी परेशान आदमी इसका जप करके खुद ही आजमा सकता है तथा दूसरे परेशान लोगों को बताकर उनकी मदद का पुण्य भी कमा सकता है ! ये मन्त्र है –

“ जय जय जय हनुमान् गोसाई, कृपा करहुँ गुरु देव की नाई “

जप शुरू करने से पहले और अन्त में एक बार श्री राम सीता जी को नमस्कार करना नही भूलना चाहिए !

कुछ लोगों को संदेह होता है की स्त्रियाँ, हनुमान जी का मन्त्र जप सकती हैं की नहीं ? तो इसका उत्तर है की स्त्रियाँ बिल्कुल, बेधड़क हनुमान जी का मन्त्र तथा चालीसा आदि का जप कर सकती हैं ! हनुमान जी शिव जी के ही अवतार है और भगवान् के लिए स्त्री और पुरुष समान रूप से स्वीकार्य हैं ! शरीर की हर प्रक्रिया भगवान् के द्वारा ही बनायीं गयी है इसलिए केवल शरीर की सरंचना के आधार पर कोई योग्य और अयोग्य नहीं हो सकता है ! हनुमान जी की आराधना में केवल एक मात्र परहेज है तामसिक भोजन को खाना, बाकि स्त्री हो या बालक, हनुमान जी की हर पूजा को बेहिचक कर सकता है !

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