क्या सिर्फ प्राणायाम को करने से साक्षात ईश्वर का दर्शन भी प्राप्त किया जा सकता है ?

“स्वयं बनें गोपाल समूह से अपनी समस्याओं, तकलीफों, उलझनों के उचित समाधान के लिए प्रतिदिन कई आदरणीय पाठकगण संपर्क करते रहतें हैं और उनके प्रश्न भी भांति भांति (अर्थात कई प्रकार) के होतें हैं !

ज्यादातर ऐसे निराश लोग हमसे सम्पर्क करतें है जिनकी बीमारियाँ लम्बे एलोपैथिक ट्रीटमेंट (जिसे अब आम जनता शैतानी पैथी भी कहने लगी है) के दुष्प्रभाव की वजह से दुखदायी कंडीशन में पहुँच चुकी होती है !

पर कुछ ऐसे योगी मानसिकता के लोग भी हमसे सम्पर्क करतें हैं (जिसमें कुछ गृहस्थ भी होतें हैं) जिनके अंदर मानव शरीर मिलने के असली उद्देश्य अर्थात सबके कारण, सबसे रहस्यमय, सबसे बड़े आनन्द के स्रोत, अनंत ब्रह्मांडों के निर्माता ईश्वर की खोज करने की तीव्र उत्कंठा होती है !

चूंकि इस विषय में भी हमसे यदा कदा पूछा जाता है इसलिए हमने यह तय किया की इस विषय में भी हमें कई लेख वेबसाइट पर प्रस्तुत करना चाहिए !

तत्काल में हमसे यही प्रश्न श्री सागर मिश्र जी ने किया है जो उड़ीसा (विकासनगर, पोस्ट अंगरगडिया, बालेश्वर जिले) के रहने वाले हैं !

श्री सागर मिश्र जी ने हमसे तीव्र लालसा व्यक्त करते हुए कहा है कि मैं वो हर प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए अति उत्सुक हूँ जिससे मैं अपने इष्ट का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकूं !

श्री सागर मिश्र जी जैसे योगी जब हमसे प्रश्न पूछतें हैं तब हमें ऐसे दूरदर्शी लोगों को प्रत्युत्तर देने में काफी प्रसन्नता महसूस होती है और चूंकि श्री सागर मिश्र का प्रश्न हमें एक अच्छा उदाहरण लगा, उन अन्य गृहस्थ लोगों के लिए भी जो यह सोचकर निराश होतें हैं कि संसार के घर गृहस्थी के झंझट में फसें रहने पर साक्षात् ईश्वर के दर्शन का प्रयास नहीं किया जा सकता है !

इसलिए हम श्री सागर मिश्र जी से लिखित अनुमति लेकर उनका उदाहरण अपने इस लेख में दे रहें हैं !

श्री सागर जी को जो उत्तर हमने दिया, यह उत्तर उन्ही के जैसे अन्य सभी जिज्ञासुओं के भी काम आये तो “स्वयं बनें गोपाल” समूह अपने अभियान को सार्थक मानेगा !

यहाँ ध्यान से समझने वाली बात है कि यह उत्तर स्वयं एक ईश्वर दर्शन प्राप्त दिव्य ऋषि सत्ता की हमारे “स्वयं बनें गोपाल” समूह के प्रति अगाध ममतामयी कृपा द्वारा हमें प्राप्त हुआ था इसलिए यह एक शाश्वत सत्य है !

उत्तर इस प्रकार है –

प्रिय सागर जी,

बहुत अच्छा लगा आप जैसे बुद्धिमान व्यक्ति की जिज्ञासा सुनकर जो योग प्राणायाम को मात्र बीमारियों को दूर करने का जरिया नहीं, बल्कि ईश्वर के दर्शन प्राप्ति का अहम साधन भी मानते हैं !

हम आपको बताना चाहेंगे कि सिर्फ प्राणायाम के अभ्यास से निश्चित ही ईश्वर का दर्शन प्राप्त किया जा सकता है ! आईये जानतें हैं कैसे –

कोई भी योग हो, चाहे वो हठ योग, राज योग, कर्म योग हो या भक्ति योग हो, (hatha yoga, raj yoga, karma yoga, bhakti yoga) सभी का एकमात्र उद्देश्य यही होता है कि मानव कैसे अपने अंदर व्याप्त मलिनता, बुराइयों, अपवित्रता, गन्दी भावनाओं का नाश कर सके !

जैसे जैसे मानव अपने अंदर की बुरी भावनाओं जैसे – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर आदि (kam krodh lobh moh mad matsar) को अपने योगाभ्यास (yoga pranayama practice) से जलाता जाता है वैसे वैसे वो अधिक से अधिक ईश्वरीय कृपा को धारण कर पाने में सक्षम हो पाता है !

वास्तव में यह शाश्वत सत्य है कि ईश्वरीय कृपा हर समय हर जीव पर बराबर मात्रा में बरस रही होती है और इस ईश्वरीय कृपा (God bless) का कोई भी व्यक्ति सिर्फ उतना ही ज्यादा फायदा उठा पाता है जितनी ज्यादा उसकी भावनाएं पवित्र होती हैं …………… यह ठीक उसी तरह है जैसे जो कपड़ा जितना ज्यादा साफ़ होता है उस पर रंग उतना ही अच्छा चढ़ता है !

इसलिए हर योग (yogasana, yoga asanas, pranayama) को नियम से करने पर सबसे पहला फायदा यही मिलता है कि साधक की भावनाएं पवित्र होने लगती हैं !

जहाँ तक हठ योग के अंतर्गत प्राणायाम (pranayam) अभ्यास की बात है तो एक गृहस्थ आदमी (जिसे रोज अपनी नौकरी या व्यापार के लिए भी समय निकालना पड़ता है) के लिए प्रतिदिन 1 घंटा प्राणायाम करना पर्याप्त होता है !

प्राणायाम का 10 – 15 मिनट अभ्यास करने वाले तो बहुत मिल जायेंगे लेकिन एकदम नियम से बिना कोई भी नागा किये हुए, कई वर्षों तक रोज 1 घंटा प्राणायाम करने वाले बहुत ही कम मिलेंगे ! जैसे रोज सिर्फ 10 मिनट पढाई करके आई. ए. एस. जैसे कठिन एग्जाम क्वालीफाई नहीं किये जा सकते हैं वैसे ही प्राणायाम का एक घंटे से कम नियमित अभ्यास करने पर किसी हठ योगी को साक्षात् ईश्वरत्व की अनुभूति करने में बहुत देर लग सकती है !

इस 1 घंटे प्राणायाम में सबसे पहले 10 मिनट भस्त्रिका प्राणायाम (bhastrika pranayama) करना चाहिए, उसके बाद 25 मिनट कपालभाति प्राणायाम (kapalbhati pranayama) करना चाहिए, फिर 25 मिनट अनुलोम विलोम प्राणायाम (anulom vilom pranayama) करना चाहिए ! सबसे अंत में महाबंध (maha bandha mudra) का 5 बार अभ्यास करना चाहिए ! महाबन्ध वही प्रक्रिया होती है जिसमें मूल बंध (moola bandha or mula bandha), उड्डियन बंध (uddiyana bandha asana kriya) और जालन्धर बंध (jalandhara bandha) को एक साथ लगाते हैं (इन सारे प्राणायाम व बंध की विस्तृत प्रक्रिया व सावधानियां जानने के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें) !

इस तरह रोज 1 घंटा अभ्यास करने वालों के शरीर में कुछ ही महीनों में गजब परिवर्तन आने लगता है, सबसे पहले उनकी सभी शारीरिक बिमारियों का नाश होने लगता है, उनका शरीर पहले से कई गुना ज्यादा तेजस्वी, ओजस्वी, फुर्तीला और मजबूत होने लगता है !

इन शारीरिक लाभ के साथ कई अध्यात्मिक लाभ भी मिलते हैं क्योंकि प्राणायाम से पापों का नाश भी बहुत तेजी से होता है !

प्राणायाम के इस तरह नियमित अभ्यास से यह तय है कि देर सवेर शरीर के अंदर स्थित सभी सातों दिव्य चक्र जरूर जागतें हैं और यहाँ तक की व्यक्ति अपने इष्ट भगवान् का दर्शन भी एक ना एक दिन अवश्य प्राप्त करके ही रहता है क्योंकि प्राणायाम के नियमित अभ्यास से कुण्डलिनी महा शक्ति (kundalini shakti jagaran process benefits) भी देर सवेर जरूर जाग उठती है !

ईश्वर का दर्शन नितांत गुप्त पहलू होता है इसलिए साधारण संसारी आदमी कभी भी किसी महान योगी (yogi of divine yoga) के सिर्फ चेहरे को देखकर या उनकी बातचीत को सुनकर, यह बिल्कुल नहीं पहचान सकते कि वह योगी ईश्वर दर्शन प्राप्त कर चुकें है या नहीं !

और ना ही जब तक ईश्वरीय आदेश मिलता है तब तक कोई ईश्वर दर्शन प्राप्त योगी अपने से सबसे बताने जाते हैं कि, हाँ मैं साक्षात् ईश्वर का दर्शन प्राप्त कर चुका हूँ !

हर युग हर काल और हर स्थान पर ऐसे दिव्य योगी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जरूर रहतें है जिन्हें ईश्वर के दर्शन का महा सौभाग्य प्राप्त होता है लेकिन ये जरूरी नहीं है की भोग वासना में ही उलझे रहने वाले साधारण संसारी आदमी भी उन्हें देखकर पहचान सकें कि वे ईश्वर दर्शन प्राप्त महान योगी हैं !

प्राणायाम इतनी ज्यादा शक्तिशाली प्रक्रिया है कि जब इससे कुण्डलिनी जागरण जैसी सर्वोच्च उपलब्धि प्राप्त की जा सकती है तब उससे छोटी मोटी उपलब्धी जैसे तेज दिमाग, तेज आँख, तेज पाचन शक्ति, तेज चाल जैसी अनगिनत शक्तियां बिल्कुल प्राप्त की जा सकती है !

जैसे जब किसी बेहद पिछड़े व गरीब गाँव में उस प्रदेश के दबंग मुख्यमंत्री का आगमन होने वाला होता है तो मुख्यमंत्री के आने के काफी पहले से ही वहां का लोकल प्रशासन उस गाँव के हालत तेजी से सुधारने लगता है मतलब वहां रातो रात सड़के बनने लगती हैं, 24 घंटे बिजली की व्यवस्था हो जाती है, स्कूलों में टीचर, अस्पतालों में डॉक्टर नियम से आने लगतें हैं, राशन की दूकान पर पर्याप्त राशन भरा हुआ मिलता है, खाद पानी की कमी दूर हो जाती है, अपराधियों की धर पकड़ हो जाती है, हर अधिकारी व प्रधान गाँव के निवासियों से खूब प्रेम से व्यवहार करने लगतें हैं आदि आदि ….. अर्थात सारांश रूप में उस पिछड़े गाँव में दबंग मुख्यमंत्री के खौफ से, मुख्यमंत्री के आगमन के काफी पहले से ही राम राज्य की स्थापना होने लगती है ठीक उसी तरह मानव शरीर में कुंडलिनी महा शक्ति जो आदि शक्ति दुर्गा का ही साक्षात् रूप हैं, उनके जागने के कई साल पहले से ही शरीर के सभी अंगों की बीमारियों का जड़ से नाश होने लगता है !

यहाँ फिर से इस बात को दोहराया जा रहा है कि साधारण सी दिखने वाली प्रक्रिया, प्राणायाम वास्तव में इतनी प्रचंड शक्ति शाली प्रक्रिया होती है कि इसे प्रतिदिन अगर ऊपर दी हुई विधि से किया जाए तो यह अति निश्चित है कि साधक की कुंडलिनी महा शक्ति देर सवेर जरूर जागेगी !

अगर किसी प्राणायाम के अभ्यासी के शरीर के सारे रोग समाप्त हो चुकें हैं और उसके शरीर पर एक अनोखी आभा और चमक भी दिखाई देती है तो यह समझ लेना चाहिए कि उस साधक की कुंडलिनी जागरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जो कि अगले कुछ या कई सालो में (ईश्वर के द्वारा निर्धारित उचित समय आने पर) पूर्ण भी हो जायेगी !

कुंडलिनी साधना इतनी गुप्त साधना होती है कि कभी भी इसका साधक अपने से सबको नहीं बताने जाता है (जब तक इसकी विशेष जरूरत ना पड़े), कि हां मेरी कुंडलिनी जाग रही है !

हालाँकि कुंडलिनी जागरण के लक्षण कमोवेश अलग अलग प्रकार के योग अभ्यासियों पर थोड़ा बहुत अलग अलग तरीके से परिलक्षित होतें हैं जैसे जिन योगियों ने प्राणायाम (हठ योग) का सहारा लिया है उनका तो पक्का है कि कुंडलिनी जागने के कई साल पहले ही उनके सभी शारीरिक रोगों का नाश हो जाएगा पर जिन अभ्यासियों ने कर्म योग (या सेवा योग) का सहारा लिया है, उन्हें दूसरे सांसारिक फायदे (जैसे – सबका प्रेम, सहयोग, सम्मान आदि) तो जल्दी मिल जातें हैं लेकिन उनके शरीर के सभी रोगों का नाश हो सकता है कि हठ योगियों (अर्थात प्राणायाम अभ्यासियों) की तुलना में थोड़ी देरी से हो, लेकिन होगा जरूर, क्योंकि ऐसा हो ही नहीं सकता की कुंडलिनी महा शक्ति के जागरण से पहले शरीर के सभी शारीरिक रोगों का नाश ना हो !

कुंडलिनी जागरण का अभ्यास जब उच्च अवस्था में पहुचने लगता है तो ईश्वरीय कृपा से आगे का मार्गदर्शन करने के लिए किसी ना किसी माध्यम से योग्य गुरु का सानिध्य भी जरूर प्राप्त हो जाता है !

हालाँकि आजकल भारत से लेकर विदेशों तक में कुंडलिनी जगाने वाले कई फर्जी योग गुरु/प्रशिक्षक भी पैदा हो गएँ जो पैसा लेकर लोगों की कुंडलिनी जगातें हैं या चक्रों में ऊर्जा भरने का प्रपंच रचते हैं ! ये हमेशा याद रखने की जरूरत है की यह दिव्य प्रक्रिया किसी को लाखों करोड़ रूपए देकर भी शुरू नहीं की जा सकती है, क्योंकि इसे शुरू करने का एकमात्र जरिया होता है,-

“सत्य की राह पर रहते हुए अधिक से अधिक मेहनत करना, चाहे वह मेहनत कोई भी मानव अपनी रूची अनुसार कर्मयोग में करे या राजयोग में करे या हठयोग में या भक्तियोग में करे” !

ये हमेशा याद रखने की जरूरत है कि सभी योग बराबर रूप से फायदेमंद हैं मतलब कोई भी योग बड़ा या छोटा नहीं होता है पर देश, काल, परिस्थिति के हिसाब से अलग अलग लोगों के लिए इनकी वरीयता में परिवर्तन आता रहता है (जैसे देश पर हमला हुआ हो और कोई सैनिक बैठ कर प्राणायाम करें तो यह ठीक नहीं है ………….. पर देश पर कोई हमला नहीं हुआ हो व देश सुचारू रूप से तरक्की के मार्ग पर आगे बढ़ रहा हो और ऐसे में कोई बालक यह जिद्द करे कि मुझे स्कूल नहीं जाना है बल्कि हाथ में बन्दूक लेकर सीमा पर देश की रक्षा करने जाना है, तो यह भी उचित नहीं है)

इसलिए सबसे बेहतर है कि जल्दी सफलता पाने के लिए कोई भी व्यक्ति इन सभी योगों के कॉम्बिनेशन (समुच्चय) को एक साथ करे …………….. अर्थात सुबह सुबह हठ योग व भक्ति योग करे (मतलब एक घंटा प्राणायाम करे और अपनी रुचि अनुसार भगवान् की पूजा पाठ भजन कीर्तन आदि भी नियम से करे) फिर दिन भर कर्म योग करे (अर्थात अपनी नौकरी या व्यापार को बेहद ईमानदारी और मेहनत से निभाए तथा कमाए हुए पैसे में से कुछ पैसे नियम से गरीब लाचारों पर भी खर्च करे) फिर रात को सोते समय राज योग करे (अर्थात रात को सोते समय यह सोचते सोचते सो जाए कि उसके ह्रदय में उसके मनपसन्द भगवान् साक्षात् विराज रहें हैं और उन भगवान के शरीर से निकलने वाली दिव्य किरणें उस मानव के पूरे शरीर को भगवान् के ही समान परम दिव्य, तेजस्वी, निरोगी, ताकतवर, सुन्दर और निष्पाप बना रहीं हैं) !

इस तरह सभी योगों का अभ्यास एक साथ करने पर सफलता बहुत ही तेजी से मिलने लगती है अर्थात महीनों की सफलता, दिनों में मिलने लगती है !

अगर आप अपने अभ्यास को और तेज करना चाहतें हो तो रात के भोजन के आधे घंटे पहले भी, 1 घंटा प्राणायाम (pranayama practice) कर सकतें हैं !

(नोट – मांस खाने वाले और दूसरों का हिस्सा हड़पने वालों को प्राणायाम का कभी भी उचित लाभ नहीं मिलता है ! सम्बंधित अन्य लेखों को पढ़ने के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें)-

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