कौन कहता है ब्लड प्रेशर आयुर्वेद से कण्ट्रोल नहीं हो सकता

Family doctorबड़ा दुःख होता है जब पढ़े लिखे लोग मूर्खता वाले तरीके से आयुर्वेद (Ayurveda) का मजाक उड़ाते हुए कहते हैं कि, अरे इन आयुर्वेदिक चटनी चूरन (Ayurvedic Medicines) से कभी ब्लड प्रेशर ठीक होगा !

ऐसे ज्यादा समझदार लोगों को ना तो एलोपैथिक दवाओं (allopathic medicine) की पूरी सच्चाई पता होती है ना ही आयुर्वेद की !

एलोपैथिक दवाओं में एक भी ऐसी दवा नहीं है जिसका साइड इफ़ेक्ट (allopathy side effects) ना हो और ये कई बार देखा गया है कि इन दवाओं को ज्यादा मात्रा में और लम्बे समय तक खाने से लोग आई सी यू में पहुँच गए हैं या श्मशान में !

वहीँ कई लोग आयुर्वेद से इसलिए चिढ़ते हैं क्योंकि उनका पाला कभी किसी नीम हकिम से पड़ गया था जिससे उनको फायदा के बजाय नुकसान हो गया ! इसलिए ऐसे लोग हर समय आयुर्वेद को कोसते फिरते हैं !

भाई सीधी सी बात है कि कोई आदमी किसी भी चीज को गलत तरीके से करेगा तो उसको गलत रिजल्ट मिलेगा ही …………… मसलन उदाहरण के तौर पर शुद्ध हींग, गैस की सभी बिमारियों में बहुत ही फायदा है पर इसे सही मात्रा में लिया जाय तो ………………… और हींग की सही मात्रा है क्या ? ……………………. हींग को रोज खाने के सही मात्रा है 1 आदमी के लिए 1 सरसों के दाने के बराबर ! हींग की मात्रा इससे ज्यादा हुई तो इतनी ज्यादा गैस बनेगी की आदमी परेशान हो जाएगा !

दुनिया की कोई बीमारी ऐसी नहीं है जिसका आयुर्वेद में इलाज ना हो, बस जरूरत है सही जानकारी होने की !

असल में हमारे भारत देश के अति आदरणीय हिन्दू धर्म (Hindu Religion) के बहुत उपयोगी आयुर्वेदिक ज्ञान (herbal medicine knowledge) का बहुत ह्रास और नाश हुआ अंग्रेजों और मुगलों (british or english rule and mughal rule in india) के आक्रमण और शासन काल में …………………. जिसकी वजह से आयुर्वेद के सही जानकार लोग कम ही मिलते हैं, नहीं तो एक ज़माना था की हर गाँव में कम से कम एक विद्वान वैद्य (herbalist) हुआ करते थे जो सिर्फ नब्ज देखकर (नाड़ी शास्त्र, Naadi Shastra, Nadi Astrology) शरीर की सारी बिमारिओं के बारे (diagnosis of all diseases) में तुरन्त बता देते थे ……………… जबकि आजकल के बड़े से बड़े हॉस्पिटल में काम करने वाले डॉक्टर्स को किसी बीमारी को डायग्नोज़ करने के लिए दुनिया भर के महंगे टेस्ट (body tests) करवाने पड़ते हैं !

भारत में आयुर्वेद के खोये हुए महान ज्ञान के पुनरुत्थान (awakening of obsolete indian ayurveda knowledge) के लिए पहले की सरकारों ने तो कुछ भी ध्यान नहीं दिया पर आदरणीय मोदी जी (narendra modi) इसे बहुत गम्भीरता से ले रहे हैं और हर भरसक प्रयास कर रहे हैं इसे सफल बनाने के लिए ……………… भले ही मोदी जी के उन प्रयासों को बिकाऊ और देशद्रोही न्यूज़ चैनल्स और अख़बार (paid media) जान बूझकर ना दिखाता हो !

आजकल 25 साल की उम्र से लेकर 40 साल की उम्र के बीच के भी अधिकांश लोगो को ब्लड प्रेशर (high blood pressure and low blood pressure problems) से सम्बंधित समस्या तेजी से होती जा रही है !

यहाँ पर ऐसी दवाएं बताई जा रही है जिनका उपयोग कई ब्लड प्रेशर के मरीज सफलता पूर्वक बार बार कर चुके हैं और चूंकि ये दवाएं आयुर्वेदिक हैं इसलिए सही मात्रा में लेने पर इनका कोई साइड इफ़ेक्ट (no side effects of herbal treatments) भी नहीं हैं !

तो अगर ब्लड प्रेशर लो है तो इसका रामबाण इलाज है लहसुन को नमक के साथ खाना (ayurvedic panacea garlic with salt) …………………… इसे खाने से 10 से 15 मिनट में ही ब्लड प्रेशर नार्मल होने लगता है (become normal blood pressure) ………………… ब्लड प्रेशर ज्यादा लो हो तो 4 लहसुन की कलियाँ 1 चुटकी नमक (सामान्य सफ़ेद नमक) में मिला कर पानी के साथ के साथ लेना चाहिए और अगर ब्लड प्रेशर ज्यादा लो ना होकर सामान्य लो हो तो लहसुन की सिर्फ 2 कलियों को नमक के साथ लेने से ही आराम मिलने लगेगा ……………………….. लहसुन जितना बारीक कटा हुआ या पिसा हुआ होगा उतना जल्दी पेट में पच कर ब्लड प्रेशर ठीक करना शुरू कर देगा …………………….. लहसुन को दांतों से कूच कर खाने में दिक्कत हो तो पानी से निगल लें, तब भी फायदा उतना ही होगा !

अगर आप का ब्लड प्रेशर अक्सर लो (low blood pressure) होता हो तो आप रोज सुबह बासी मुंह लहसुन की 2 कलियों को नमक के साथ निगल लिया करें ………………………. तो आपका ब्लड प्रेशर जल्दी कभी लो होने की नौबत आयेगी ही नहीं जब तक की आप कोई बड़े तनाव, दुःख, निराशा या क्रोध की भावना से ग्रसित ना हो !

लो बी पी (low B. P.) के मरीजों को सावधानी के तौर पर कुछ लहसुन और नमक हमेशा अपने साथ रखना चाहिए ……………….. जब भी बी पी लो महसूस हो इसे खा लेना चाहिए ……………………….. लेकिन 24 घंटे में दो बार से ज्यादा लहसुन की खुराक नहीं खाना चाहिए क्योंकि लहसुन बहुत गर्म होता है और ज्यादा लेने पर बी पी हाई (high B. P.) हो सकता है !

हाई ब्लड प्रेशर को भी कण्ट्रोल करने के लिए प्रकृति में कई जबरदस्त फायदे मंद जड़ी बूटियाँ हैं (ayurvedik jadibuti for high blood pressure control) और उन्ही जड़ी बूटियों से निर्माण करके परम आदरणीय श्री बाबा रामदेव जी ने बहुत ही फायदेमंद दवा बनाई है जिसका नाम है “मुक्ता वटी” (baba ramdev patanjali products divya mukta vati) !

इस दवा में जो मुख्य बात ध्यान देने वाली है वो यह है कि आपको ये तय करना है की आपको आपकी बीमारी की गम्भीरता के हिसाब से प्रतिदिन इस दवा की कितनी गोलियां खानी हैं ………………………….. मतलब कुछ मरीज जिनका ब्लड प्रेशर बहुत हाई रहता था उन्हें 4 – 4 गोलियां मुक्ता वटी की सुबह-शाम खाकर आराम मिलते देखा गया और मरीज जिनका ब्लड प्रेशर बहुत हाई नहीं बल्कि सामान्य हाई रहता था उन्हें सिर्फ 2- 2 गोली सुबह शाम खाकर आराम मिलते देखा गया है !

सबसे बेहतर है की किसी अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर (ayurvedic doctor, herbal physician) की सलाह से अपनी मुक्ता वटी (divya mukta vati) की मात्रा तय कर लेना चाहिए |

हाई बी पी के क्रिटिकल केसेस (High blood pressure or hypertension Complications; Hypertensive Crisis) में मुक्ता वटी के साथ हृदयामृत वटी भी लेने से विशेष फायदा होता है (baba ramdev patanjali products divya hridyamrit vati) !

पर एक बात तय है की ब्लड प्रेशर हाई चाहे जिस भी कारण से हो, मुक्ता वटी की सही मात्रा खाने से आराम मिलता जरूर है !

हाई बी पी की एलोपैथिक दवा जिंदगी भर खानी होती हैं क्योंकि इससे हाई बी पी सिर्फ कुछ घंटे के लिए कण्ट्रोल होता है और इससे हाई बी पी की बीमारी हमेशा के लिए ठीक नहीं होती है ………………………… जबकि मुक्ता वटी को लम्बे समय तक खाने से हाई बी पी को परमानेंट ठीक (permanent cure high blood pressure) भी होते देखा गया है …………………………. एलोपैथिक दवाओं के जहाँ ढेर सारे साइड इफेक्ट्स होते हैं वही मुक्ता वटी का कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं बल्कि शरीर की अन्य बिमारियों को ठीक करने वाले ढेर सारे फायदे जरूर हैं (benefits of ayurveda treatment) !

तो ऐसे में अपनी ब्लड प्रेशर की समस्या को ठीक करने के लिए केवल एलोपैथिक दवा के भरोसे बैठना सिर्फ और सिर्फ अपने से ही अपने शरीर का सत्या नाश करना है !

नार्मल आदमी की तरह रोज अन्न खाने वाले ब्लडप्रेशर मरीजों को सिर्फ किसी दवा के बल पर लम्बे समय तक ब्लडप्रेशर कण्ट्रोल करना मुश्किल होता है …………………………….. इसलिए उन्हें प्रतिदिन हार्ड फिजिकल एक्सरसाइज (जैसे 2 – 4 किलोमीटर मॉर्निंग वाक, जॉगिंग, पी टी, जिम कसरत आदि) करना नितांत जरूरी है ……………………………….. एक्सरसाइज ना सिर्फ एक्स्ट्रा कैलोरी को खर्च करती है बल्कि स्ट्रेस को भी खर्च करती है मतलब नियमित एक्सरसाइज तनाव से मुक्ति भी दिलाती है जिससे ब्लडप्रेशर, शूगर लेवल आदि बढ़ने नहीं पातें है ……………………………………………. अगर कोई गृहस्थ व्यक्ति, सच्चे योगी (Indian Yogi, Sadhu, Sant, sanyasi) की तरह सिर्फ फलाहार करने की बजाय, अन्न भी रोज खाता है व कोई विशेष शारीरिक मेहनत भी नहीं करता है और साथ ही साथ प्राकृतिक वातावरण से अधिकांश समय दूर रहकर एक कृत्रिम माहौल (जैसे एयर कंडीशन घर) में रहकर रोज बहुत तनाव (negative thoughts like stress, depression etc) भी झेलता है ……………………………………………….. तो बहुत संभव है कि वो सिर्फ ना तो किडनी, लीवर, हार्ट सम्बंधित अंगों का शीघ्र मरीज हो जाए बल्कि असमय आंशिक या पूर्ण रूप से नपुंसक (Impotent or eunuch) भी हो जाए ………………………………………………….. क्योंकि बिना विशेष शारीरिक मेहनत के गरिष्ठ भोजन का नियमित सेवन वो भी पञ्च तत्वों से युक्त प्राकतिक वातावरण (शुद्ध पृथ्वी, जल, आकाश, वायु, अग्नि) से दूर रहकर करने पर, मानव शरीर के शुक्राणुओं की गतिशीलता धीरे धीरे समाप्त होती जाती है …………………….. जिससे संतान पैदा होने में बाधा उत्पन्न होती है (शारीरिक मेहनत की कमी से उत्पन्न इस तरह की आंशिक नपुंसकता को, वापस शारीरिक मेहनत बढ़ाकर व कुछ योगासनों व आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक दवाओं (herbal medicines or homeopathic medicines) के कुछ महीने से लेकर कुछ साल तक सेवन कर निश्चित दूर किया जा सकता है) ………………………………………………. अन्न के बारे में आयुर्वेद महाग्रन्थ में एक संस्कृत श्लोक (in sanskrit documents) दिया गया है जिसका हिंदी में अर्थ होता है कि अगर “अन्न” को सही दिनचर्या के तहत खाया जाए तो वह आदमी के द्वारा खाया जाता है, लेकिन अगर दिनचर्या गलत हो तो “अन्न” खुद मानव को ही खाने लगता है अर्थात शरीर में कई तरह के रोग उत्पन्न करने लगता है ……………………………………………… अन्न निश्चित रूप से कंद, मूल, फलों की तुलना में ज्यादा शारीरिक ताकत (physical strength) प्रदान करता है लेकिन उस ज्यादा ताकत को लेने के बावजूद, 24 घंटा सिर्फ कुर्सी पर बैठकर या बिस्तर पर लेटकर ही नहीं बिता देना चाहिए, बल्कि उस ताकत को किसी भी तरह की शारीरिक मेहनत में खर्च भी करना चाहिए …………………………………………………… इसलिए अन्न खाने वालों सभी मानवों को रोज कम से कम आधा घंटा ऐसी कोई भी हार्ड एक्सरसाइज (hard gym exercise) अनिवार्य रूप से करनी चाहिए जिससे उनका पूरा शरीर पसीने से नहा जाए (लेकिन शरीर बीमार या कमजोर हो तो बिना चिकित्सक की सलाह के हार्ड एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए) …………………………………. यहाँ पर एक बात फिर से ध्यान से समझने वाली है कि अगर कोई व्यक्ति रोज गरिष्ठ अन्न खाता है तो उसके लिए सिर्फ योग प्राणायाम ध्यान (yoga pranayama meditation) करना ही पर्याप्त नहीं होता है ……………………………… क्योंकि सिर्फ योग प्राणायाम ध्यान (yog pranayam meditation) के दम पर सिर्फ वही सच्चे योगी (Indian Yogi, Sadhu, Sant, sanyasi) अपने शरीर को स्वस्थ (healthy) रख सकतें है जो अन्न बिल्कुल नहीं खाते हैं और सिर्फ कन्द, मूल, फल (condyle, roots, fruits) आदि खाकर गुफाओं में तपस्या करतें हैं ………………………………………….. इसलिए जो गृहस्थ अन्न खातें उनके लिए यह अनिवार्य है कि वो 24 घंटे में कम से कम एक बार ऐसी कड़ी मेहनत करें कि उनका शरीर पसीने से नहा जाए ………………………………… और इस अनिवार्य हार्ड एक्सरसाइज को करने के बाद, अगर उनकी इच्छा दिव्य मानसिक शांति व आध्यात्मिक उन्नति (अर्थात ईश्वरत्व) की प्राप्ति से अपने पूर्ण कायाकल्प की हो तो उन्हें कम से कम रोज आधा घंटा योग प्राणायाम ध्यान (yoga pranayama meditation) भी जरूर करना चाहिए ……………………………….. पर हार्ड फिजिकल एक्सरसाइज व योग प्राणायाम ध्यान (yog pranayam meditation) के बीच में कम से कम 7 मिनट का गैप होना चाहिए ! आप चाहें तो इस गैप का सदुपयोग ध्यान करने में कर सकतें हैं (सभी योग प्राणायाम ध्यान की क्रिया विधि व सावधानियां आप इस लेख के नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक कर जान सकतें हैं) !

[ नोट – अगर आपके ब्लड प्रेशर की कोई ऐलोपैथिक दवा (allopathy) पहले से चल रही हो तो आप एकदम से उस दवा को ना छोड़े, बल्कि इन आयुर्वेदिक दवाओं को उस ऐलोपैथिक दवा (allopathic medicines) के साथ चिकित्सक के परामर्श के अनुसार शुरू करें और जैसे जैसे फायदा मिलता जाय वैसे वैसे उस ऐलोपैथिक दवा की मात्रा और पॉवर चिकित्सक के परामर्श अनुसार कम करते जाय………………..और ब्लड प्रेशर की समयाओं से बचने के लिए अपनी भावनाओं पर नियंत्रण बहुत जरूरी है ………………… जहाँ हँसना दवा की तरह तुरन्त और बहुत फायदा है (laughter is the best remedy) वहीँ नकारात्मक सोच जैसे गुस्सा, दुःख, निराशा, हीन भावना, ब्लड प्रेशर पर बुरा असर डालते हैं (stress is the cause of all disease) ……………………. हाई बी पी के मरीजों का नमक और तेल घी का सेवन कम करना चाहिए (fat free diet to reduce cholesterol)]

[ Detail descriptions of different types of cancers in English Language- Acute Lymphoblastic Leukemia (ALL), Acute Myeloid Leukemia (AML), Adolescents, Cancer in Adrenocortical Carcinoma, AdultvChildhood Adrenocortical Carcinoma (Unusual Cancers of Childhood), AIDS-Related Cancers, Kaposi Sarcoma (Soft Tissue Sarcoma), AIDS-Related Lymphoma (Lymphoma), Primary CNS Lymphoma (Lymphoma), Anal Cancer, Appendix Cancer (Gastrointestinal Carcinoid Tumors), Astrocytomas, Childhood (Brain Cancer), Atypical Teratoid/Rhabdoid Tumor, Childhood, Central Nervous System (Brain Cancer), Basal Cell Carcinoma of the Skin (Skin Cancer), Bile Duct Cancer, Bladder Cancer, Childhood Bladder Cancer (Unusual Cancers of Childhood), Bone Cancer (includes Ewing Sarcoma and Osteosarcoma and Malignant Fibrous Histiocytoma), Brain Tumors, Breast Cancer, Childhood Breast Cancer (Unusual Cancers of Childhood), Bronchial Tumors, Childhood (Unusual Cancers of Childhood), Burkitt Lymphoma (Non-Hodgkin Lymphoma), Carcinoid Tumor (Gastrointestinal), Childhood Carcinoid Tumors (Unusual Cancers of Childhood), Carcinoma of Unknown Primary, Childhood Carcinoma of Unknown Primary (Unusual Cancers of Childhood), Cardiac (Heart) Tumors, Childhood (Unusual Cancers of Childhood), Central Nervous System, Atypical Teratoid/Rhabdoid Tumor, Childhood (Brain Cancer), Embryonal Tumors, Childhood (Brain Cancer), Germ Cell Tumor, Childhood (Brain Cancer), Primary CNS Lymphoma, Cervical Cancer, Childhood Cervical Cancer (Unusual Cancers of Childhood), Childhood Cancers, Cancers of Childhood, Unusual Cholangiocarcinoma (Bile Duct Cancer Chordoma) Chronic Lymphocytic Leukemia (CLL), Chronic Myelogenous Leukemia (CML), Chronic Myeloproliferative Neoplasms, Colorectal Cancer, Childhood Colorectal Cancer (Unusual Cancers of Childhood), Craniopharyngioma, Childhood (Brain Cancer), Cutaneous T-Cell Lymphoma Lymphoma (Mycosis Fungoides and Sézary Syndrome), Ductal Carcinoma In Situ (DCIS), Breast Cancer, Embryonal Tumors, Central Nervous System, Childhood (Brain Cancer), Endometrial Cancer (Uterine Cancer), Ependymoma, Childhood (Brain Cancer), Esophageal Cancer, Childhood Esophageal Cancer, Esthesioneuroblastoma, Ewing Sarcoma (Bone Cancer), Extracranial Germ Cell Tumor, Childhood, Extragonadal Germ Cell Tumor, Eye Cancer, Childhood Intraocular Melanoma, Intraocular Melanoma, Retinoblastoma, Fallopian Tube Cancer, Fibrous Histiocytoma of Bone, Malignant, and Osteosarcoma, Gallbladder Cancer, Gastric (Stomach) Cancer, Childhood Gastric (Stomach) Cancer, Gastrointestinal Carcinoid Tumor, Gastrointestinal Stromal Tumors (GIST) (Soft Tissue Sarcoma), Childhood Gastrointestinal Stromal Tumors, Germ Cell Tumors, Childhood Central Nervous System Germ Cell Tumors (Brain Cancer), Childhood Extracranial Germ Cell Tumors, Extragonadal Germ Cell Tumors, Ovarian Germ Cell Tumors, Testicular Cancer, Gestational Trophoblastic Disease, Hairy Cell Leukemia, Head and Neck Cancer, Childhood Head and Neck Cancers Heart Tumors, Hepatocellular (Liver) Cancer, Histiocytosis, Langerhans Cell, Hodgkin Lymphoma, Hypopharyngeal Cancer (Head and Neck Cancer), Intraocular Melanoma, Childhood Intraocular Melanoma, Islet Cell Tumors, Pancreatic Neuroendocrine Tumors, Kaposi Sarcoma (Soft Tissue Sarcoma), Kidney (Renal Cell) Cancer, Langerhans Cell Histiocytosis, Laryngeal Cancer (Head and Neck Cancer), Childhood Laryngeal Cancer and Papillomatosis, Leukemia, Lip and Oral Cavity Cancer (Head and Neck Cancer), Liver Cancer, Lung Cancer (Non-Small Cell and Small Cell), Childhood Lung Cancer, Lymphoma, Male Breast Cancer, Malignant Fibrous Histiocytoma of Bone and Osteosarcoma Melanoma, Childhood Melanoma, Melanoma, Intraocular (Eye), Childhood Intraocular Melanoma, Merkel Cell Carcinoma (Skin Cancer), Mesothelioma, Malignant, Childhood Mesothelioma, Metastatic Cancer, Metastatic Squamous Neck Cancer with Occult Primary (Head and Neck Cancer), Midline Tract Carcinoma Involving NUT Gene, Mouth Cancer (Head and Neck Cancer), Multiple Endocrine Neoplasia Syndromes, Multiple Myeloma/Plasma Cell Neoplasms, Mycosis Fungoides (Lymphoma), Young Adults Cancer in, Myelodysplastic Syndromes, Myelodysplastic/Myeloproliferative Neoplasms, Myelogenous Leukemia, Chronic (CML), Myeloid Leukemia, Acute (AML), Myeloproliferative Neoplasms, Chronic, Nasal Cavity and Paranasal Sinus Cancer (Head and Neck Cancer), Nasopharyngeal Cancer (Head and Neck Cancer), Childhood Nasopharyngeal Cancer, Neuroblastoma, Non-Hodgkin Lymphoma, Non-Small Cell Lung Cancer, Oral Cancer, Lip and Oral Cavity Cancer and Oropharyngeal Cancer (Head and Neck Cancer), Childhood Oral Cavity Cancer, Osteosarcoma and Malignant Fibrous Histiocytoma of Bone, Ovarian Cancer, Childhood Ovarian Cancer, Pancreatic Cancer, Childhood Pancreatic Cancer, Pancreatic Neuroendocrine Tumors (Islet Cell Tumors), Papillomatosis, Paraganglioma, Childhood Paraganglioma, Paranasal Sinus and Nasal Cavity Cancer (Head and Neck Cancer), Parathyroid Cancer, Penile Cancer, Pharyngeal Cancer (Head and Neck Cancer), Pheochromocytoma, Childhood Pheochromocytoma, Pituitary Tumor, Plasma Cell Neoplasm/Multiple Myeloma, Pleuropulmonary Blastoma, Pregnancy and Breast Cancer, Primary Central Nervous System (CNS) Lymphoma, Primary Peritoneal Cancer, Prostate Cancer, Rectal Cancer, Recurrent Cancer, Renal Cell (Kidney) Cancer, Retinoblastoma, Rhabdomyosarcoma, Childhood (Soft Tissue Sarcoma), Salivary Gland Cancer (Head and Neck Cancer), Childhood Salivary Gland Tumors, Sarcoma, Childhood Rhabdomyosarcoma (Soft Tissue Sarcoma), Childhood Vascular Tumors (Soft Tissue Sarcoma), Ewing Sarcoma (Bone Cancer), Kaposi Sarcoma (Soft Tissue Sarcoma), Osteosarcoma (Bone Cancer), Uterine Sarcoma, Sézary Syndrome (Lymphoma), Skin Cancer, Childhood Skin Cancer, Small Cell Lung Cancer, Small Intestine Cancer, Soft Tissue Sarcoma, Squamous Cell Carcinoma of the Skin – see Skin Cancer, Squamous Neck Cancer with Occult Primary, Metastatic (Head and Neck Cancer), Stomach (Gastric) Cancer, Childhood Stomach (Gastric) Cancer, T-Cell Lymphoma, Cutaneous – see Lymphoma (Mycosis Fungoides and Sèzary Syndrome), Testicular Cancer, Childhood Testicular Cancer, Throat Cancer (Head and Neck Cancer), Nasopharyngeal Cancer, Oropharyngeal Cancer, Hypopharyngeal Cancer, Thymoma and Thymic Carcinoma, Thyroid Cancer, Childhood Thyroid Tumors, Transitional Cell Cancer of the Renal Pelvis and Ureter (Kidney (Renal Cell) Cancer), Unknown Primary, Carcinoma of Childhood Cancer of Unknown Primary, Unusual Cancers of Childhood, Ureter and Renal Pelvis, Transitional Cell Cancer (Kidney (Renal Cell) Cancer, Urethral Cancer, Uterine Cancer, Endometrial, Uterine Sarcoma, Vaginal Cancer, Childhood Vaginal Cancer, Vascular Tumors (Soft Tissue Sarcoma), Vulvar Cancer, Wilms Tumor and Other Childhood Kidney Tumors, ]
[ Above mentioned treatments are beneficial in cancer herbal treatment which is usually searched by different people with different titles like – Cancer Symptoms And Treatment – Search & Find Quick Results, Cancer – Signs and symptoms, 10 Early Symptoms of Cancer in Men, Learn About 18 Common Cancer Symptoms and Signs, 15 Cancer Symptoms Men Shouldn’t Ignore, Key signs and symptoms of cancer, Throat Cancer Symptoms & Signs, Cervical Cancer Symptoms & Signs, Bone Cancer – Symptoms and Signs, Cancer symptoms Understanding Cancer Support, cancer symptoms in hindi, बेसल सेल कैंसर के लक्षण, Treatment for Cancer, National Cancer Institute, Types of Cancer Treatment, Types of Cancer Treatment American Cancer Society, What are the different types of cancer treatment?, How Cancer is Treated, Making Decisions About Cancer Treatment, Cancer treatments Cancer Research UK, Treatment of cancer Wikipedia, WHO Treatment of cancer, cancer symptoms से संबंधित खोज, cancer symptoms in hindi, रक्त का कैंसर 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एण्ड नेक कैंसर, स्किन कैंसर, थायराईड कैंसर आदि ]

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