गॉल ब्लैडर की पथरी के भयंकर दर्द से मुक्ति आयुर्वेद से

xxBlausen_0701_PancreaticTissueअगर आप के गॉल ब्लैडर की पथरी का दर्द ज्यादा सीरियस ना हो तो आप ऑपरेशन कराने से पहले, चिकित्सक की राय से इन आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट्स को भी आजमां सकते हैं !

गॉल ब्लैडर में पथरी बनना एक अति पीड़ादायक रोग है। इसे पित्त पथरी कहते हैं। पित्ताशय में दो तरह की पथरी बनती है। पहली कोलेस्ट्रोल निर्मित पथरी और दूसरी पिग्मेन्ट से बनने वाली पथरी। जिसमें से लगभग अस्सी प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रोल तत्व से ही बनती है। यह रोग किसी को भी और किसी भी आयु में हो सकता है लेकिन महिलाओं में इस रोग के होने की सम्भावना पुरुषों की तुलना में कम होती है। पित्त की पथरी को घरेलू उपचार के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।

पित्त लिवर में बनता है और इसका भंडारण गॉल ब्लैडर में होता है। यह पित्त वसायुक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। जब इस पित्त में कोलेस्ट्रोल और बिलरुबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो पथरी निर्माण के लिये आदर्श स्थिति बन जाती है। यह बीमारी आमतौर पर तीस से साठ वर्ष के उम्र के लोगों में पाई जाती है और स्त्रियों की अपेक्षा पुरूषों में चार गुना अधिक पाई जाती है।

बच्चों और वृद्धों में मूत्राशय की पथरी ज्यादा बनती है, जबकि वयस्को में अधिकतर गुर्दो और मूत्रवाहक नली में पथरी बनती है। पथरी के जिन मरीजों को डायबिटीज की बीमारी होती उनको गुर्दे की बीमारी होने की काफी संभावनाएं रहती हैं। अगर किसी मरीज को रक्तचाप की बीमारी है तो उसे नियमित दवा से रक्त चाप को नियंत्रण करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि अगर रक्तचाप बढ़ता है, तो इस बिमारी से भी गुर्दे खराब हो सकते हैं।

प्रेग्नेन्सी, मोटापा, मधुमेह, अधिक बैठे रहने वाले लोगों, तेल घी अधिकता वाले भोजन और शरीर में खून की कमी से पित्त पथरी रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इस समस्या को कुछ घरेलू उपचारों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रस्तुत है पित्त की पथरी के कुछ प्रभावी घरेलू उपाय –

– गाजर और ककड़ी के रस को सौ मिलिलिटर की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीने से पित्त की पथरी में लाभ होता है।

– सुबह खाली पेट 1 नींबू का रस पानी में मिलाकर पीने से एक सप्ताह में लाभ होता है।

– शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी तथा चीनी युक्त पेय हानिकारक हैं। इनसे जितना हो सके बचने की कोशिश करें।

– नाशपाती पित्त की पथरी में फायदेमंद होती है, इसे खूब खायें। इसमें पाये जाने वाले रसायनिक तत्वों से पित्ताशय के रोग दूर होते हैं।

– खट्टे फलों का सेवन करें। इनमें मौजूद विटामिन सी गॉल ब्लैडर की पथरी दूर करने के लिए काफी मददगार साबित होती है। विटामिन सी अर्थात एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर का प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। यह कोलेस्ट्रोल को पित्त में बदल देता है। इसलिए विटामिन सी युक्त फल जैसे आंवला, नीम्बू, संतरा तथा देशी गाय माता का दूध आदि का नियमित सेवन करें |

– पित्त पथरी के रोगी भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में हरी सब्जियां और फल लें। इनमें कोलेस्ट्रोल कम मात्रा में होता है और यह प्रोटीन की जरूरत भी पूरी करते हैं।

– तली और मसालेदार चीजों से दूर रहें और संतुलित भोजन ही करें।

– रोजाना एक चम्मच हल्दी का सेवन करने से पथरी दूर होती है।

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