वीर्य स्तम्भन शक्ति (शीघ्र पतन) में बेहद आश्चर्यजनक लाभ पहुचाने वाला योगासन

· February 25, 2017

लगभग सभी यौन रोगियों की एक ही आत्मकथा होती है कि युवावस्था की शरुआत होने से पहले ही गलत संगत (आजकल गलत संगत के भी कई रूप हो गएँ हैं जैसे – अश्लील बातें करने वाले यार दोस्त, अश्लील टी वी शोज़, मूविज, वेबसाइटस, अखबार, मैग्जीन्स आदि) की वजह से उन्हें पहले हस्त मैथुन (hastmaithun, masturbation) रोज करने की गंदी आदत पड़ गयी, फिर किसी तरह हस्त मैथुन की आदत छूटी तो स्वप्न दोष बिमारी हाथ धोकर पीछे पड़ गयी, जिसका नतीजा यह हुआ कि शादी होने से पहले ही कई यौन रोगों (जैसे – लिंग में पर्याप्त कड़ापन नहीं रह गया, यहाँ तक की लिंग में उत्थान होना ही बंद होने लगा, तथा वीर्य की मात्रा और वीर्य का गाढ़ापन काफी कम हो गया आदि) ने ग्रसित कर लिया |


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जब स्वप्न दोष से किसी भी हाल में छुटकारा नहीं मिल रहा था तो किसी ने नीम हकीम सलाह दी, कि छोड़ो यार जाने दो, शादी के बाद तो अधिकाँश यौन समस्याएं अपने आप ही ठीक हो जातीं हैं पर शादी होने से पहले तक इन समस्याओं ने इतना ज्यादा नाश कर दिया कि एक गंभीर यौन रोगी बनाकर रख दिया, जिससे पूरा दाम्पत्य जीवन ही दुखमय हो गया !

हम यहाँ बात कर रहें हैं वीर्य स्तम्भन शक्ति बढ़ाने की जिससे पति पत्नी की रति क्रिया अधिक देर तक चल सके, शीघ्र पतन की बीमारी से ग्रसित किसी पुरुष की शादी जब किसी स्वस्थ महिला से हो जाती है तो रति क्रिया में पुरुष का वीर्यपात, उसकी पत्नी की तुलना में बहुत जल्द ही हो जाता है !

पुरुष के वीर्य की स्तम्भन शक्ति बढ़ाने के सबसे पहले कुछ दिनों तक नीचे दिए योगासन का अभ्यास करके प्रजनन तंत्र को मजबूत बनाना चाहिए, फिर उसके बाद किसी आयुर्वेदिक दवा का सेवन करना चाहिए क्योंकि जैसे कमजोर तोप से शक्तिशाली गोले को फायर नहीं किया जा सकता है ठीक उसी तरह पहले योगासन का नियमित अभ्यास करके पूरे प्रजनन तन्त्र का नवीनीकरण करना चाहिए फिर यौन शक्ति वर्धक आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करना चाहिए !

हालांकि बिना किसी भी आयुर्वेदिक दवा का सेवन किये हुए, सिर्फ 1 ग्लास शुद्ध दूध का नियमित सेवन और इन निम्लिखित योगासन (Yogasana, Yoga, Yog) के कुछ दिनों से लेकर कुछ महीनों तक के अभ्यास करने से निश्चित रूप से शीघ्र पतन और लिंग की शिथिलता से पूर्ण रूप से मुक्ति पायी जा सकती है !

और वो आसन है,- पश्चिमोत्तानासन जो वीर्य स्तम्भन शक्ति को बढ़ाने के लिए बेजोड़ है | इस आसन को कम से कम 15 मिनट से लेकर अधिकतम 3 घंटा 36 मिनट तक रोज करने से वीर्य स्तम्भन शक्ति में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती है जिसे कोई भी व्यक्ति कुछ ही दिन करके निश्चित महसूस कर सकता है !

इस आसन को करने से ना केवल वीर्य के गिरने का समय बढ़ता है बल्कि यह वीर्य को गाढ़ा कर उसमें शुक्राणुओं की जबरदस्त वृद्धि भी करता है तथा शिथिल हो चुके लिंग में फिर से कड़ापन, उत्तेजना (अर्थात लिंग में फिर से पर्याप्त तनाव और उत्थान) भी पैदा करने लगता है !

पश्चिमोत्तानासन (Pashchimottanasan) अकेले पूरे शरीर का नवीनीकरण करने में सक्षम है क्योंकि इसका कुछ वर्षों तक नियमित अभ्यास करने से यह नाभि स्थित मणिपूरक चक्र (जिसमें अमृत का वास होता है) को भी धीरे धीरे जागृत करने लगता है !

बेहद साधारण सा दिखने वाला यह आसन इतना प्रचंड शक्तिशाली है कि यह ना केवल नाभि चक्र को ही जगाता है बल्कि कई वर्षों के सतत अभ्यास से मूलाधार चक्र स्थित कुण्डलिनी महा शक्ति पर प्रहार कर उसे भी जागने पर मजबूर करने लगता है !

जल्द फायदा प्राप्त करने के लिए इस आसन को रोज सुबह खाली पेट कम से कम आधा घंटा करें तो कुछ ही दिनों में निश्चित चमत्कारी लाभ मिलने लगता हैं !

पश्चिमोत्तानासन करने के बाद कम से कम 2 से 5 मिनट के लिए सर्पासन (जिसे भुजंगासन भी कहतें हैं, yoga bhujangasana) अवश्य करें !

इलाज के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य से रहें और दिमाग में भी गंदे विचार कम से कम आने दें !

उपर्युक्त आसन के अलावा निम्नलिखित कार्य भी करें तो फायदा और तेज मिलता है–

– लंच और डिनर दोनों खाने के बाद 15 मिनट से लेकर आधे घंटे तक वज्रासन करें जिससे खाया पिया सब अच्छे से पच जाए ! यौन रोगों के पीछे अक्सर कही ना कही कमजोर पाचन शक्ति का भी हाथ रहता है जो कि वज्रासन (vajrasana in hindi) के नियमित अभ्यास से दूर हो जाती है ! वज्रासन से पेट की अग्नि बहुत प्रबल हो जाती है जिससे सब खाया पिया अच्छे से पच कर देह को लगता है ! अगर कब्ज हो तो कब्ज दूर करने के लिए नीचे दिए गए आर्टिकल के उपायों को अपनाएँ, ताकि जितना जल्द हो सके कब्ज से मुक्ति मिल सके ! अक्सर कब्ज की गर्मी से भी स्वप्न दोष होते देखा गया है !

– रोज कम से कम 15 मिनट निम्न लिखित मन्त्र का जप करें (इस मन्त्र के परम आश्चर्यजनक चमत्कारी लाभ जानने के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें) –

“ जय अंजनी कुमार बलवन्ता, शंकर सुवन वीर हनुमन्ता ”

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