लाइलाज बीमारियाँ पैदा कर देगा ये मांस, मछली, अंडा

chicken-306110_640दुनिया का कौन सा ऐसा विटामिन, प्रोटीन, न्यूट्रीशन या पोषक तत्व है जो शाकाहार से नहीं मिल सकता !! मतलब शरीर को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए जितने भी तरह के पोषक तत्व की जरुरत होती है उन सभी पोषक तत्वों की पूर्ति निश्चित ही शाकाहार से हो जाती है । कई देशी – विदेशी, बड़े – बड़े कसाई खाने जो अरबों – खरबों रूपए प्रॉफिट कमाते है वे अपने धंधो को बंद होने से बचाने के लिए या अपनी बिक्री को घटने से बचाने के लिए समय – समय पर ये अफवाह फैलाते है की कई विटामिन – प्रोटीन सिर्फ मांस – मछली या अन्डे से ही मिल सकते है, जो की कोरी बकवास है ।

यह भी कई बार देखा गया है कि कुछ लोग, मांस मछली अन्डे खाने को सही साबित करने के लिए हमारे सनातन हिन्दू धर्म के ग्रंथो, पुराणों, वेदों की किताबों में, सोची समझी साजिश के तहत गलत बात लिखवाकर कहते है की हमारी धार्मिक किताबों में भी तो मांस – मछली खाने को सही ठहराया है ! इस तरह साजिश करके गलत जानकारी देना और गुमराह करना बहुत ही घृणित अपराध है और ऐसी साजिशों के प्रति हमेशा सावधान रहना चाहिए क्योकी अनगिनत सालों पुराना हमारा सनातन हिन्दू धर्म टिका ही है दया, करुणा, प्रेम और परोपकार पर जिसको प्रदर्शित करती है हमारे धर्म के कुछ अति प्रसिद्ध वाक्य जैसे “अहिंसा परमो धर्म:” (मतलब – अहिंसा यानी दया करना परम धर्म है), “वसुधैव कुटुम्बकम” (मतलब – पूरी पृथ्वी ही एक परिवार है और इस पूरे पृथ्वी के सारे जीव – जन्तु इसी परिवार के आदरणीय सदस्य है) ।

जैसे जहरीला भोजन हमारे शरीर में भयंकर समस्या उत्पन्न करता है वैसे ही मांस, मछली, अंडा भी हमारे शरीर में प्रविष्ट होकर भयंकर तनाव, दुःख, अशान्ति व असाध्य रोग उत्पन्न करते हैं। आदमी अपने शरीर के प्रति जितनी बेरहमी और लापरवाही बर्तता है शायद ही उतनी बेरहमी वह किसी और के साथ करता हो।

आज विश्व में हर जगह से वैज्ञानिक व डाक्टर यह चेतावनी दे रहे हैं कि माँसाहार, कैंसर आदि असाध्य रोगों को जन्म दे रहा है और शाकाहार अधिक पौष्टिकता व रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है, फिर भी मानव यदि अंधी नकल या आधुनिकता की होड़ में माँसाहार कर के अपना सर्वनाश करे तो ये उसका दुर्भाग्य ही कहा जायेगा।

सर्वाधिक परिश्रमी व अधिक सहनशीलता वाले पशु जो लगातार कई दिन तक काम कर सकते हैं, जैसे हाथी, घोडा, बैल, ऊँट आदि सब शाकाहारी होते हैं। इग्लेंड में परीक्षण करके देखा गया है कि स्वाभाविक माँसाहारी शिकारी कुत्तों को भी जब शाकाहार पर रखा गया तो उनकी बर्दाश्त करने की क्षमता में वृद्धि हुई।

एक बहुत पुरानी कहावत है “जैसा खाये अन्न, वैसा होय मन” अर्थात् हम जो कुछ भी खाते हैं उसका हमारी मानसिक स्थिति पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। वैज्ञानिकों ने प्रयोगों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है कि शाकाहारी व्यक्ति दयालु, संवेदनशील, कोमल मन वाले तथा सात्विक प्रवृत्ति वाले होते हैं वहीं उसके विपरीत मांसाहारी व्यक्ति क्रूर, हिंसक, कठोर हृदय वाले तथा तामसिक प्रवृत्तियों वाले होते हैं।

अमेरिकन डाएटिक एसोसिएशन और कनाडा के आहारविदों का कहना है कि जीवन के सभी चरणों में अच्छी तरह से योजनाबद्ध शाकाहारी आहार, स्वास्थ्यप्रद और पर्याप्त पोषक है और बीमारियों की रोकथाम और इलाज के लिए स्वास्थ्य के फायदे प्रदान करता हैं। मांसाहारियों की तुलना में इस्कीमिक (अरक्तता संबंधी) ह्रदय रोग शाकाहारी पुरुषों में 30% कम और शाकाहारी महिलाओं में 20% कम हुआ करते हैं। सब्जियों, अनाज, बादाम आदि में शरीर के भरण-पोषण के लिए आवश्यक पोषक तत्व, प्रोटीन और अमीनो एसिड हुआ करते हैं। शाकाहारी आहार में संतृप्त वसा, कोलेस्ट्रॉल और प्राणी प्रोटीन का स्तर कम होता है और कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, मैग्नीशियम, पोटेशियम, फोलेट और विटामिन सी व ई जैसे एंटीऑक्सीडेंट तथा फाइटोकेमिकल्स का स्तर उच्चतर होता है।

शाकाहारी निम्न शारीरिक मास इंडेक्स, कोलेस्ट्रॉल का निम्न स्तर, निम्न रक्तचाप प्रवृत्त होते हैं और इनमें ह्रदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह टाइप 2, गुर्दे की बीमारी, अस्थि-सुषिरता (ऑस्टियोपोरोसिस), अल्जाइमर जैसे मनोभ्रंश और अन्य बीमारियां कम हुआ करती हैं। खासकर चर्बीदार भारी मांस (Non-lean red meat) को भोजन-नलिका, जिगर, मलाशय और फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते खतरे के साथ सीधे तौर पर जुड़ा पाया गया है। 2010 के एक अध्ययन में सेवेंथ दे एडवेंटिस्ट्स के शाकाहारियों और मांसाहारियों के एक ग्रुप के बीच तुलना करने पर शाकाहारियों में मानसिक अवसाद – चिंता कम पायी गयी और उन्हें बेहतर मूड का पाया गया।

जानवरों की हत्या करते समय उन्हें जो कष्ट होता है, उसके कारण मांस में मृत्योपरांत तमाधिक्य हो जाता है क्योकी प्राणी में क्रोध एवं बदले की भावना पैदा होती है जो मांस में तामसिक गुण को कई गुना बढ़ा देते है ।

आदमी के मुंह के अन्दर भेदक दांत (canine teeth) का कार्य भोजन को फाडकर खाने में होता है । मांसाहार भोजन के समर्थक जोर देकर कहते हैं कि ईश्वर ने भेदक दांत मांसाहार भोजन के लिए दिए हैं । यह योग्य तर्क नहीं है । यह ऐसा ही है कि, जैसे हम इंसानों के पास भी नाखून हैं, तो हम इन्सान भी अन्य हिंसक जानवरों की तरह दूसरे इंसानों को नाखूनों से नोचे – खरोंचें । मनुष्य के पास भेदक दांत हैं मात्र इसीलिए वह मांसाहार भोजन करे, ऐसा बिल्कुल नहीं है।

मांसाहारी भोजन में तमतत्त्व की अधिकता होने के कारण मानव मन में अनेक गलत अभिलाषाऐं एवं अन्य तामसिक विचार जैसे व्यभिचार, लोभ, क्रोध आदि उत्पन्न होते हैं।

जो व्यक्ति तमप्रधान मांसाहारी भोजन करता है या मांस मछली अन्डे या इनसे बनने वाली चीजों का व्यापार करता है, उस पर भूतों (राक्षस, शैतान, ऋणात्मक शक्तियां आदि) से बाधित होने की संभावना अधिक होती है । इसका कारण यह है कि मांस का भोजन आसुरी शक्तियों को प्रिय होता है ।

क्या मासांहारी भोजन करने से हमें पाप लगता है ? इसका उत्तर है हां, जब हम किसी प्राणी को मार डालते हैं, तो हमें भयंकर पाप लगता है और साथ ही किसी कत्लखाने से मिलने वाले मांस मछली अन्डे खाने पर भी हमें उतना ही पाप लगता है ।

सभी पशुओं में गाय माता सबसे अधिक सात्त्विक होती है एवं किसी प्राणी की हत्या से संचित पाप की अपेक्षा गोहत्या का पाप सबसे अधिक होता है ।

शाकाहारी पदार्थों में जहां दालें प्रोटीन की खान हैं तो फल व हरी सब्जियां विटामिन्स का भंडार हैं। रेशेदार फल पाचन में सहायक है तो गेहूं व चावल कार्बोहाइड्रेट का खजाना है। आलू तथा अरबी स्टार्च से युक्त है तो दूध कैल्शियम से भरपूर है, जो दांतों व हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। शाकाहारी पदार्थ फल, सब्जियां सिर्फ शरीर को पोषण ही प्रदान नहीं करते बल्कि कई पदार्थ तो बहुत सी बीमारियों के उपचार में भी सहायक होते हैं।

उदाहरण के तौर पर लहसुन कोलेस्ट्राल कम करता है। अतः हृदयरोगियों को प्रतिदिन 2-3 कली लहसुन खाने की सलाह दी जाती है। चुकन्दर व अनार आयरन से भरपूर होता है अतः एनीमिया के रोगियों के लिये उनका सेवन किसी दवा से कम नहीं। डायबिटीज के रोगियों के लिये करेले के रस का सेवन रामबाण औषधि है तो जामुन की गुठली का चूर्ण भी डायबिटीज में बहुत फायदा है। केला दस्त में राहत पहुंचाता है। देशी गाजर के सेवन से नेत्र ज्योति बढ़ती है। आंवला विटामिन सी का भंडार है जो अन्य कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखता है। विशेष बात यह है कि गर्म करने पर भी आंवले का विटामिन सी नष्ट नहीं होता। अतः जिस भी रूप में चाहे उसका सेवन कर सकते हैं।

उसके विपरीत मांसाहारी पदार्थ अनेक बीमारियों के जनक होते हैं। आजकल लगभग हर वो जानवर जिसको मांस के लिए काटा जाता है उसे ओक्सिटोसिन का इंजेक्शन देकर जल्दी जल्दी बड़ा और मोटा किया जाता है और इस ओक्सिटोसिन के इंजेक्शन से बड़े हुए जानवरों के मांस खाने से शरीर में दुनिया भर की कैंसर जैसी असंख्य बीमारियाँ पैदा होती है।

इसके अलावा मुर्गियों को जिन दड़बों में रखा जाता है, वहां एक ही पिंजरे में इतनी मुर्गियां रख दी जाती है कि वे चलना-फिरना तो दूर ठीक ढंग से सांस भी नहीं ले पाती। फलस्वरूप वे अनेक प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाती हैं। रोगग्रस्त मुर्गी के अंडे तथा मांस के सेवन से उसमें उपस्थित हानिकारक बेक्टीरिया तथा वायरस मनुष्य के शरीर में पहुंच जाते हैं तथा उनसे भी कई प्रकार की बीमारियां उत्पन्न कर देते । बीमार जानवर का मांस खाने से उसकी सभी बीमारियां मनुष्यों में आ जाती हैं तथा व्यक्ति को रोगग्रस्त होते देर नहीं लगती।

यह भी सिध्द हो चुका है कि मांसाहारी पदार्थों में कोलस्ट्रॉल बहुत अधिक होता है। जिससे हृदयरोग, किडनी व लीवर की बीमारियां होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है। यही कारण है कि शाकाहारी व्यक्ति मांसाहारी व्यक्तियों की अपेक्षा हृदय रोग एवं अन्य बीमारियों से अपेक्षाकृत कम पीड़ित होते हैं। वैज्ञानिक तो यह भी दावा करते हैं कि मांसाहार लगभग 160 बीमारियों का जनक होता है।

आजकल कई महिलाओं के अन्दर बाँझपन की समस्या आ रही है मतलब वो महिलाये कभी भी माँ बन ही नहीं सकती, उनकी इस समस्या का एक बड़ा कारण है मांस खाना, क्योकी ज्यादातर मांस, मुर्गे या बकरे का होता है जो की नर जानवर होते है और नर हारमोंस वाला मांस कोई मादा यानी औरत रोज रोज खाएगी तो धीरे – धीरे उसके अन्दर के सारे हारमोंस का बैलेंस बिगड़ने लग सकता है और यहाँ तक की उस औरत के मादापन यानी औरत के स्वाभाविक गुण भी ख़तरे में पड़ सकते है (उसकी कई शारीरिक क्रियाये ही उटपटांग होने लग सकती है) |

वैसे तो ओक्सिटोसिन इंजेक्शन वाला मांस खाकर पुरुषों में भी नपुंसकता बीमारी बहुत तेजी से बढ़ रही है |

महिलाओ या पुरुषों की कैसे भी बाझपन या नपुंसकता की समस्या हो विधिवत कपाल भाति प्राणायाम करने से निश्चित ही ख़त्म हो जाती है |

कई ऐसी बाँझ महिलाये जिन्हें अमेरिका – लन्दन के बड़े – बड़े डाक्टरों ने कह दिया की ये कभी माँ नहीं बन सकती, वे महिलाये भी कपाल भाति प्राणायाम का विधिवत अभ्यास करके 1 से 2 साल में, माँ बनते हुए देखी गयी है | हमारे ग्रंथो में कपाल भाति प्राणायाम को इतना ताकतवर बताया गया है की इसका विधिवत अभ्यास करने पर दुनिया की बड़ी से बड़ी बीमारी का नाश 1 से 2 साल में हो जाता है पर ये एक बात बहुत ध्यान से समझने वाली है की कपाल भाति समेत और भी जितने ताकतवर प्राणायाम, योग या दवाएं है, सब के सब बहुत कमजोर साबित होते है, उस दर्द भरे भयंकर श्राप के सामने जो किसी जानवर की हत्या करते समय उसके दिल से निकलता है |

इसलिए मांस खाने वाला आदमी लाख प्राणायाम कर ले या खूब महंगी – महंगी दवाएं खा ले या खूब मन्दिर फ़क़ीर तीरथ कर ले, वो फेफड़े, हार्ट, लीवर, किडनी आदि की भयंकर तकलीफ दायक बीमारियों को झेलने से बच नहीं सकता है | अगर व्यक्ति अपना भला चाहता है तो उसे तुरन्त मांस मछली अंडा और इनसे बनने वाले सारे सामान (जैसे – चाकलेट, केक, नुडल्स, लिपस्टिक आदि) को खाना छोड़े और भगवान से बार – बार माफ़ी मांगकर साफ सुथरे पवित्र मन से कपालभाती प्राणायाम का अभ्यास शुरू करे तो निश्चित ही उसकी सारी बीमारियों का नाश होगा |

कहने का तात्पर्य यही है कि हमारे शरीर का की कोई भी ऐसी आवश्यकता नहीं है जो शाकाहार के द्वारा पूरी न हो सके या कहें कि जिन्हें पूरी करने के लिये मांसाहार की आवश्यकता पड़े।

इसलिए सिर्फ और सिर्फ शाकाहार ही उत्तम आहार है।

कई बार लोंग ऐसी मूर्खता वाली बाते करते है की अंडा शाकाहारी होता है या अब नया अंडा विकसित करके मार्केट में आया है जो पूरी तरह से शाकाहारी है !! इसमें सोचने वाली बात यह है की अंडा आखिरकार निकलता है मुर्गी से ही न ! यह किसी बैगन के पौधे या फिर आम के पेड़ से तो नहीं निकलता। यह पशु के यौन अंगों से निकलता है। इसलिए अंडा शाकाहार हो ही नहीं सकता। मुर्गियाँ अंडे क्यों देती है ? प्रजनन करने के लिए। सच्चाई यही है कि अंडा मुरगियों के मासिक धर्म का रक्त होता है। यदि उन्हें सेया जाए, तो उनसे मुर्गा – मुर्गी की उत्पत्ति होती है। यदि ऐसा नहीं होता, तो अंडे वाला मासिक धर्म का रक्त मुरगी के शरीर द्वारा उसी प्रकार निकालकर फेक दिया जाता, जिस प्रकार महिलाएँ अपने प्रजनन न हो सकने वाले रक्त को प्रत्येक माह निकालकर फेक देती हैं। इसलिए इन दलीलों के आधार पर अंडे शाकाहार नहीं हो सकते।

मेडिकल साईंस व बडे-बडे डॉक्टर एवं आहार विज्ञानी आज यह मानते हैं कि शाकाहार में निम्न पौष्टिक तत्त्व पाये जाते हैं –

प्रोटीन – यह शारीरिक विकास्, फुर्तीलापन, उत्साह और शक्ति उत्पन्न करता है। यह दालों, अनाज, चना, मटर, मूँगफली, काजू, बादाम, हरी सब्जियों, दूध, दही, पनीर, सेव, फल, मेवे आदि में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।

चिकनाई – यह बलवर्धक होता है तथा दूध, घी, मक्खन, मलाई, सरसों, नारियल तथा तिल के तेल एवं बादाम, अखरोट तथा अन्य सूखे मेवे में मिलता है। इसे पचाने के लिये अधिक परिश्रम की आवश्यकता होती है।

कार्बोहाइड्रेट्स – यह शरीर में शक्ति और गर्मी पैदा करता है। यह गेहूँ, चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना, खजूर, दूध, मेवा, मीठे फल, गुड, शक्कर, बादाम, दाल, ताजी सब्जियों आदि में पाया जाता है। भोजन में कार्बोहाइड्रेटस का पूरा लाभ उठाने के लिये उसे खूब चबा कर खाना चाहिये। जितनी लार भोजन में मिलेगी उतना ही अधिक कार्बोहाइड्रेट्स शरीर को मिलेगा।

कैल्शियम –  यह हड्डियों और दाँतों को मजबूत बनाता है, बाल घने और मजबूत बनाता है और दिल को ठीक रखता है। यह हरी सब्जियों, गेहूँ, चावल, दालों, दूध, छाछ, पनीर, बादाम, समस्त मीठे फल, खांड, मुरब्बा आदि में पाया जाता है।

फॉस्फोरस – बढते शरीर और दिमाग की ताकत के लिये यह विशेष लाभदायक है और पनीर, दही, गेहूँ, मक्का, दाल, दूध, छाछ, पनीर, बादाम, समस्त मीठी फल, खांड, मुरब्बा आदि में पाया जाता है।

Medical Basis of Nutrition Published by Charitable के अनुसार शाकाहार में निम्न विटमिंस पाये जाते हैं-

विटामिन A- हरी सब्जियों, नीबू, अमरूद, आँवला, संतरा, मौसमी आदि में मिलता है।
विटामिन B- हरी पत्तेदार सब्जियों तथा अनाज में पाया जाता है।
विटामिन C- हरी सब्जियों, नीबू, अमरूद, आँवला, संतरा, मौसमी आदि में मिलता है।
विटामिन D- इसका प्रमुख स्त्रोत है सूर्य की किरणें और गाय माता का दूध है। यद्यपि पशु तथा पौधों से प्राप्त खाद्य पदार्थों में भी कुछ मात्रा में प्राप्त होता है।
विटामिन E- यह घी मक्खन में बहुतायत से होता है।
विटामिन K- यह हरी सब्जियों में पाया जाता है।

एक प्रेस समाचार के अनुसार अमरीका में डेढ़ करोड़ व्यक्ति शाकाहारी हैं। दस वर्ष पूर्व नीदरलैंड की ”1.5 % आबादी” शाकाहारी थी जबकि वर्तमान में वहाँ बढ़कर ”5 %” व्यक्ति शाकाहारी हो गए हैं। सुप्रसिद्ध गैलप मतगणना के अनुसार इंग्लैंड में प्रति सप्ताह ”3००० व्यक्ति” शाकाहारी बन रहे हैं। सुप्रसिद्ध गायक मैडोना और कई मशहूर हॉलीवुड एक्टर पहले से ही 100 % शाकाहारी हो चुके हैं। विश्व की सुप्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा ने भी ‘शाकाहार’ व्रत धारण कर लिया है। बुद्धिजीवी व्यक्ति शाकाहारी जीवन प्रणाली को अधिक आधुनिक, प्रगतिशील और वैज्ञानिक कहते हैं एवं अपने आपको शाकाहारी कहने में गर्व महसूस करते हैं।

संसार के महान बुद्धिजीवी, उदाहरणार्थ अरस्तू, प्लेटो, लियोनार्दो द विंची, शेक्सपीयर, डारविन, पी.एच.हक्सले, इमर्सन, आइन्सटीन, जार्ज बर्नार्ड शा, एच.जी.वेल्स, सर जूलियन हक्सले, लियो टॉलस्टॉय, शैली, रूसो आदि सभी शाकाहारी ही थे।

आज विश्व में सबसे बड़ी समस्या है चारो ओर बढ़ती हुई हिंसा को रोकने की। चारों ओर हिंसा एवं युद्ध के बादल उमड़ रहे हैं। उन्हें यदि रोका जा सकता हैं तो केवल मनुष्य के स्वभाव को अहिंसा और शाकाहार की ओर प्रवृत्त करके ही। महाभारत से लेकर गौतम बुद्ध, ईसा मसीह, भगवान महावीर, गुरुनानक तक सभी संतों एवं मनीषियों ने अहिंसा पर विशेष ज़ोर दिया है। भारतीय संविधान की धारा ”51 ए (जी)” के अंतर्गत भी हमारा यह कर्तव्य है कि हम सभी जीवों पर दया करें।

इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि हम किसी को जीवन प्रदान नहीं कर सकते तो उसका जीवन लेने का भी हमें कोई हक नहीं हैं।

2012 में मैसाच्युसेट्स के वुड्स होल रिसर्च सेंटर के निदेशक इरिक डेविडसन के अध्ययन में कहा गया है कि विकसित देशों को मांसाहारी भोजन में कटौती करनी होगी। मांस उत्पादक कारखाने जल प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोत के रूप में सामने आए हैं। दिलचस्प तथ्य ये भी है कि एक पौंड मांस के उत्पादन में 2500 गैलन पानी की खपत होती है जबकि एक पौंड गेंहूं के उत्पादन में मात्र 25 गैलन पानी की आवश्यकता होती है। इनके अलावा भी मांसाहार के चलते पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा है।

कुछ लोग दूसरे तरह की बेवकूफी भी बतियाते है की अगर हम लोग जानवरो को नहीं खाएंगे तो उनकी जनसँख्या बहुत बढ़ जाएगी। इस स्तर की बचकानी बात करने वाले ये नहीं समझते की इस संसार में लोंग ज्यादात्तर 500 से 1000 किस्म के जानवरों का मांस खाते है जबकि इस दुनिया में लाखो किस्म के जानवर है तो क्या वो जानवर जिनको इन्सान नहीं खाते उनकी जनसँख्या जरुरत से ज्यादा बढ़ गयी है ? ऐसा बिल्कुल नहीं है, क्योकी प्रकृति जो की सबसे पावरफुल शक्ति है उसके पास हज़ार तरीके है जनसँख्या कण्ट्रोल करने के | निर्दोष जानवरों की जनसख्या की चिंता करने के बजाय इसकी चिंता करनी चाहिए की उस निर्दोष जानवर को खाने के लिए क़त्ल करते समय उसकी दिल से जो भयंकर दर्द भरा श्राप निकलता है वो एक न एक दिन उस आदमी का सुख चैन हराम जरुर कर देगा जिसने उसे खाया है !!

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