क्या स्वमूत्र पान करने से शरीर मजबूत बनता है ?

aqwqsयह एक ऐसा विषय है जिसके विषय में बहुत से लोग कन्फ्यूज्ड रहते हैं !

वास्तव में आज के मॉडर्न एलोपैथिक ट्रीटमेंट से लोगों का मोह भंग तेजी से हो रहा है और लोग अपनी बीमारियों के इलाज के लिए अनन्त वर्ष पुरानी पैथी अर्थात योग, आयुर्वेद की शरण में वापस आ रहें हैं क्योंकि ये एलोपैथिक दवाएं किसी बीमारी को परमानेंट ठीक तो करती नहीं अलबत्ता इनके साइड इफेक्ट्स से दस नयी शारीरिक समस्याएं पैदा हो जाती हैं !

दुनिया में कोई ऐसी एलोपैथिक मेडिसिन नहीं है जिसका कोई साइड इफ़ेक्ट ना हो और कई बार इन एलोपैथिक दवाओं के साइड इफेक्ट्स तो इतने ज्यादे खतरनाक हो जाते हैं कि व्यक्ति की स्थिति अत्यंत दयनीय हो जाती है !

धड़ल्ले से मार्केट में बिकने वाली कई एलोपैथिक दवाओं के साइड इफेक्ट्स तो ऐसे हैं कि वे ह्रदय गति को अनियमित कर देतें हैं जिससे धडकन बढ़ सकती है, बहुत घबराहट व बेचैनी महसूस हो सकती है, शरीर में झटके व झंझनाहट महसूस हो सकती है, त्वचा पर बदसूरत चकत्ते उभर सकते हैं, लीवर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो सकता है जिससे भूख एकदम मर सकती है और खाया पिया सब उल्टी से निकल सकता है, किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है, आँखों के आगे अँधेरा छाने लग सकता है, सांस लेने में तकलीफ महसूस हो सकती है आदि आदि !

फिर इन साइड इफेक्ट्स से पैदा हुई समस्याओं को दूर करने के लिए डॉक्टर्स अलग से दूसरी और एलोपैथिक दवाएं देते हैं जिनके अपने भी और नये साइड इफेक्ट्स होते हैं !

opoकुल मिलाकर अगर किसी आदमी को एक हफ्ते के लिए भी हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ता है तो वो ऐसा कान पकड़ता है कि दुबारा हॉस्पिटल आने से पहले 100 बार सोचता है !

अगर कोई इमरजेंसी या कोई कठिन प्रॉब्लम (जैसे -एक्सीडेंट, हार्ट अटैक, कैंसर, डायबिटिज, ब्लडप्रेशर, कोई सर्जरी या कोई तेज दर्द आदि) ना हो तो कोई भी समझदार व्यक्ति कभी भी, किसी एलोपैथिक डॉक्टर की शक्ल भी देखना पसन्द नहीं करता है !

किसी भी एलोपैथिक दवा का साइड इफेक्ट्स पता करना हो तो इन्टरनेट (Google) पर उसका नाम टाइप करके उसके साइड इफेक्ट्स खोजिये तो आपको तुरन्त जो जानकारियाँ दिखाई देगी उनको देखकर आपके पैर के नीचे की जमीन खिसक सकती है कि…….. अरे, मै अब तक इतनी खतरनाक दवा इतने धड़ल्ले से खाता आ रहा था………और तब ही आपको समझ में आएगा कि कैसे अब तक आपकी अच्छी किस्मत के भरोसे आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ने उन साइड इफेक्ट्स से आपको सुरक्षित बचाया हुआ था !

यहाँ पर एक बात ध्यान से समझने वाली बात है कि एलोपैथिक दवाओं के जो बुरे इफेक्ट्स होते हैं, आखिर उन्हें साइड इफेक्ट्स क्यों कहते हैं ? क्यों नहीं उन्हें ऑप्शनल इफेक्ट्स कहते हैं ?

deक्योंकि, जब किसी रासायनिक एलोपैथिक दवा को लैब में सबसे पहले बनाया जाता है तो उसकी टेस्टिंग के दौरान यह देखा जाता है कि वह दवा, वो काम तो कर रही है जिसके लिए उसे बनाया गया है लेकिन साथ ही में कुछ या कई हानिकारक बुरे प्रभाव (जिन्हें साइड इफेक्ट्स कहते हैं) भी पैदा कर रही है !

इसे और आसानी से समझने के लिए इस उदाहरण का सहारा लिया जा सकता है कि, जैसे कई लोगों की दिली इच्छा होती है कि वे अपने जीवन में एक प्रसिद्ध सेलिब्रिटी बन कर, समाज में शान से घूमें लेकिन यह असलियत उन्हें सेलिब्रिटी बनने के बाद ही पता चलती है कि अब तो वे समाज में खुल्लम खुल्ला अकेले घूम फिर ही नहीं सकते, नहीं तो भीड़ उन्हें चारो ओर से ऐसा घेर लेगी कि शान से कौन कहे, वे तो ठीक से सांस लेने के लिए भी परेशान हो जायेंगे !

तो इसे कहते हैं कि सेलिब्रिटी बनने के साइड इफेक्ट्स ! सेलिब्रिटी बनने के जो मुख्य फायदा हैं (जैसे कि आर्थिक स्थिति में सुधार आदि) वो तो मिला लेकिन एक साइड इफ़ेक्ट यह भी मिला कि अब वे पहले कि तरह जब मन किया, जहाँ मन किया, वहां अकेले आजाद पंक्षी की तरह घूम फिर नहीं सकते !

download-2कई बार ऐसा भी होता है कि कुछ सेलिब्रिटीज बिना मेकअप के अपनी कल्पना से भी परे ओरिजिनल अति साधारण व झुर्रीदार शक्ल के साथ, या बड़े चश्मे या अन्य किसी चीज से चेहरा थोड़ा ढ़ककर, आम जनता के बीच में धड़ल्ले से घूमते हैं और उन्हें कोई पहचान नहीं पाता है तो यह है उनकी किस्मत का साथ ! ठीक इसी तरह कई बार होता है कि कोई व्यक्ति एलोपैथिक दवायें खाता है लेकिन उसे उसका कोई साइड इफेक्ट्स नहीं महसूस होता है तो इसे भी कह सकते हैं कि किस्मत का साथ !

पर यह किस्मत का साथ आगे भी हमेशा मिलता रहे इसकी संभावना भी अब धीरे धीरे कम होती दिख रहीं है क्योंकि बीतते वक्त के साथ जैसे जैसे वातावरण, खाने पीने की सब चीजें, रोज पहले से ज्यादा प्रदूषित होती जा रहीं हैं, वैसे वैसे ही लोगों का इम्यून सिस्टम रोज पहले से ज्यादा और कमजोर होता जा रहा है इसलिए जो व्यक्ति आज बीमार पड़ने पर प्रतिदिन सामन्यतया 5 से 10 एलोपैथिक टेबलेट बर्दाश्त कर ले रहें हैं, वही लोग बहुत संभव है कि आने वाले 10 – 15 वर्षों में ही शायद 1 टेबलेट भी बर्दाश्त ना कर पायें !

इसी भविष्य के खतरे को भांपते हुए आज अमेरिका यूरोप की सरकारें बहुत बुद्धिमानी दिखा रहीं हैं और वे भारत की योग, आयुर्वेद विद्या को अपने यहाँ स्थापित करने के लिए बड़े पैमाने पर इन्वेस्ट कर रहीं है और इतना ही नहीं भारतीय योग, आयुर्वेदिक व अन्य गूढ़ ग्रन्थों पर रिसर्च करने के लिए बाकायदा भारत से संस्कृत भाषा के जानकारों को अपने यहाँ बुलाकर काफी हाई सैलरी पर नियुक्त भी कर रहीं हैं !

चाहे एलोपैथिक दवा के इलाज से आखिरी तंग आकर या समझदारी वश भारत में भी अब बहुत से लोग अपनी कठिन बिमारियों का इलाज योग और आयुर्वेद से खोजने की कोशिश कर रहें हैं !

भारत में अब से कुछ वर्ष पहले तक अधिकाँश लोग योग आयुर्वेद से इलाज कराने में हिचकते थे क्योंकि भारत को आजादी मिलने के बाद से लेकर और बाबा रामदेव के प्रादुर्भाव तक, भारत में सच्चे और जानकार वैद्य, संख्या में काफी कम थे ! जो थोड़े बहुत वैद्य दिखते भी थे उनमे से काफी कुछ नीम हकीम टाइप थे, जिनके बेढंगे इलाज से पीड़ित व्यक्ति के मन में आयुर्वेद के प्रति नफरत पैदा हो जाती थी !

पर अब ऐसा नहीं रहा, क्योंकि बाबा रामदेव द्वारा लायी हुई वैचारिक चेतना की वजह से अब ब्राइट स्टूडेंट्स ने भी आयुर्वेदिक डॉक्टर व योग के कोर्स में एडमिशन लेना शुरू कर दिया है जिससे भारत में होनहार और तेजस्वी आयुर्वेदिक चिकित्सकों व योगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है !

वो दिन बहुत दूर नहीं जब पूरे विश्व को अपना लोहा मनवा देने वाली पैथी अर्थात योग और आयुर्वेद, भारत समेत पूरे विश्व से ही एलोपैथी (जिसे अब बहुत से लोग शैतानी पैथी भी कहने लगे हैं) का नामोनिशान मिटा देगी जिसकी वजह से भविष्य में सभी छोटे बड़े एलोपैथिक डॉक्टर्स को भी अपनी रोजी रोटी चलाने के लिए आयुर्वेदिक ज्ञान को सीखना मजबूरी हो जाएगी क्योंकि आने वाले समय में आयुर्वेद के सम्पूर्ण ज्ञान के पुनर्प्रकटीकरण से सिर्फ आयुर्वेद के दम पर ही निश्चित ही बड़ी से बड़ी सर्जरी भी सम्भव होगी !

jhjवास्तव में आयुर्वेद एक पूर्ण पैथी और इसमें भी सर्जरी, आदि अन्य सभी विधाओं का प्रावधान है जो कि आज के मॉडर्न एलोपैथिक इलाज में है, बस जरूरत है उस ज्ञान को पुनः जागृत करने की !

भारत में ही खुदाई के दौरान इतने ज्यादे और विचित्र किस्म के सर्जरी के टूल्स मिले हैं जिन्हें देखकर आज के डॉक्टर्स भी हैरान हैं कि ऐसे सोफीस्टिकेटेड टूल्स तो उनके पास भी नहीं हैं !

इसी से अंदाजा लगता है कि प्राचीन भारत में आयुर्वेदिक चिकित्सा विज्ञान कितना ज्यादा उन्नत अवस्था में था जिसका जम कर नाश किया गया पहले कई अत्याचारी मुग़ल शासकों द्वारा फिर क्रूर अंग्रेजों द्वारा !

बाबा रामदेव, भारत की उसी भुला दी गयी बेशकीमती तकनीकी को पुनः जिलाने में लगातार सफल हो रहें है जिसमे सिर्फ आयुर्वेद के दम पर ही बड़ी से बड़ी सर्जरी को सफलतापूर्वक किया जा सके !

“स्वयं बने गोपाल” समूह से जुड़े कुछ स्वयं सेवी योगियों को भी कुछ आश्चर्यजनक बढियां रिजल्ट्स देखने को मिलें जब उन्होंने कैंसर, टी बी, और एड्स के मरीजों को आयुर्वेदिक दवाओं और योग के कुछ दुर्लभ स्टेप्स से गुजारा ! अभी यह प्रक्रिया अंडर आब्जर्वेशन है जिसका हम बहुत जल्द आप लोगों के सामने खुलासा करेंगे !

asqईश्वर की कृपा से भारत में अगर इसी तरह हर जगह योग और आयुर्वेद के खोये हुए दुर्लभ ज्ञान के पुनर्जागरण का प्रयास चलता रहे और मोदी जी जैसे बुद्धिमान शासक का सपोर्ट भी मिल जाय तो वो दिन दूर नहीं जब हम सभी लोग और हमारे वंशज भी फिर से अपने पूर्वजों की ही तरह कम से कम 100 साल एकदम निरोगी, फुर्तीले और ताकतवर बने रहकर जी पायेंगे !

यहाँ पर उपर्युक्त विषय को इतना विस्तार से इसलिए समझाया गया है क्योंकि आज भी कई लोगों को मालूम ही नहीं है कि उनकी नयी पैदा हुई बीमारी, उस एलोपैथिक इलाज के वजह से भी हो सकती है जो उन्होंने अपनी किसी बीमारी को ठीक करवाने के लिए कभी करवाया था !

जानकारी ही बचाव है ……..! ! !

इसलिए जब तक कोई विशेष मजबूरी ना पड़े अपना इलाज प्रकृति से ही करवाइये !

इसी प्राकृतिक इलाज में एक आता है स्व मूत्र यानी अपनी ही पेशाब को पीना !

हमारे समूह से भी अक्सर लोग सम्पर्क करके स्व मूत्र के बारे जानने का प्रयास करते हैं !

वैसे साधारणतया कई लोगों का कहना है कि भाई आयुर्वेद में तो गोमूत्र पीने को बोला गया है लेकिन शायद स्वमूत्र के लिए नहीं कहा गया है ! कुछ लोगों का कहना है कि पेशाब होती ही है वेस्ट (ख़राब) चीज, इसलिए तो शरीर उसको बाहर निकाल देता है, तो फिर उसको पीना कैसे सही हो सकता है ?

इन सारी बातों का उत्तर जानने के लिए कुछ बेहद अनुभवी वैद्यों से विचार विमर्श करने पर हमें पता चला कि मनुष्य को स्वमूत्र का पान सिर्फ उस स्थिति में करना चाहिए जब उसका शरीर एकदम जीर्ण शीर्ण स्थिति में पहुँच जाए (जैसे कैंसर की लास्ट स्टेज आदि) वो भी किसी ऐसे वैद्य की देखरेख में जो वहां उपलब्ध हो और जानकार भी हो !

शरीर की जीर्ण शीर्ण स्थिति में स्वमूत्र पीने से शरीर में जीवनी शक्ति बढ़ती है जिससे शरीर मजबूत बनता है !

पर शरीर की नार्मल स्थिति में स्वमूत्र पीने से चर्म रोग (त्वचा की बीमारी) होने की संभावना हो सकती है इसलिए स्वस्थ आदमी, स्वमूत्र का पान ना ही करे तो बेहतर है !

gaumata-top2पर हाँ, गोमूत्र का पान हर अवस्था में, हर व्यक्ति (चाहे कोई बच्चा हो, जवान हो या बूढ़ा) द्वारा किया जा सकता है ! बल्कि जरूर करना चाहिए और रोज करना चाहिए………… लेकिन सिर्फ और सिर्फ भारतीय देशी गाय माता के मूत्र को ही पीना चाहिए, ना कि जर्सी गाय या भैंस का !

भारतीय देशी गाय माता के मूत्र को हमारे आयुर्वेद में जीवों द्वारा पाए जाने वाली दवाओं में सर्वोच्च स्थान हासिल है और बहुत से अनुभवी वैद्यों का कहना है कि दुनिया कि कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसमे देशी गाय माता का मूत्र थोड़ा या बहुत फायदा ना करता हो !

गोमूत्र के बेहद आश्चर्यजनक फायदों को विस्तार से जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें –

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