1 सेकेण्ड भी चैन से सोने नहीं देगा ये लड़का

BAL KRISHNA N YASHODAये लड्डू गोपाल जिस पर रीझ जाएँ उसका चैन से सोना मुश्किल ही है ! क्योकि उस भक्त के घर में ऐसा बच्चा आ चुका होता है जिसकी नटखट शैतानियाँ सिर्फ घर में नहीं, सिर्फ मोहल्ले तक ही नहीं, बल्कि पूरे शहर में होती है ! और असली समस्या यह है की इन शैतानियाँ का कोई समय भी फिक्स नहीं है, ये कहीं भी और कभी भी शुरू हो जाती हैं !

इस लड्डू गोपाल की अच्छी खासी लम्बी चौड़ी नटखट बच्चों की टीम है और ये सारे लड्डू गोपाल के सखा, बाल गोपाल के समान ही बहुत छोटे, सुन्दर, प्यारे और शरारती हैं और इनका सबसे फेवरेट काम है घूम घूम कर हर भक्त के घर में नईं नईं, अनोखी शरारतें करना !

लड्डू गोपाल और इनकी टीम की इसी आदत की वजह से पुराणों में इनका एक नाम “व्रज कोलाहलकर:” दिया है जिसका मतलब है पूरे व्रज मंडल को अपनी प्यारी लीलाओं से हर समय गुंजायमान करने वाले !

इनकी टीम के शोर गुल से ही व्रज के निवासी अंदाजा लगा लेते थे की इनकी टीम अभी व्रज में कहाँ घूम रही हैं और व्रजवासी अपने अपने घर के दरवाजे खिड़कियाँ खोल देते थे कि, काश बाल गोपाल हमारे घर में भी अपने चरण रखने की महान कृपा करें !

तो ऐसे परम प्यारे, नटखट बाल गोपाल का कल अर्थात जन्माष्टमी को जन्म हो चुका है और जो जो भी इस बाल गोपाल के भक्त हों, वो वो संभल जाय क्योकि इस बाल गोपाल और इसकी नटखट टीम को हर समय शोर गुल, धूम धडाका बहुत पसंद है और ये लोग कभी भी बिन बुलाये किसी भी भक्त के घर अचानक से धमक पड़ते है और उसके बाद उस भक्त के घर में जो धमाचौकड़ी मचाते है की बन्दर भी फेल (शास्त्रों में कहावत है की, बालक बानर एक स्वाभावा) !

अत: जब घर के आसपास इन अत्यधिक नटखट बाल गोपालों की मंडली मौजूद हो तो भक्त बेचारा कैसे चैन से सोये और कैसे चैन से अपना काम, नौकरी, व्यापार करे ! !

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