धातु व मूत्र सम्बंधित रोगों की बेहद असरदार औषधि है, शतावर

images (2)महर्षि चरक ने भी शतावर को बल्य और वयः स्थापक (चिर यौवन को बरकार रखने वाला) माना है I आधुनिक शोध भी शतावरी क़ी जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मान चुके हैं I

आयुर्वेद में इसे ‘औषधियों की रानी’ माना जाता है। इसकी गांठ या कंद का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें जो महत्वपूर्ण रासायनिक घटक पाए जाते हैं वे हैं ऐस्मेरेगेमीन ए नामक पॉलिसाइक्लिक एल्कालॉइड, स्टेराइडल सैपोनिन, शैटेवैरोसाइड ए, शैटेवैरोसाइड बी, फिलियास्पैरोसाइड सी और आइसोफ्लेवोंस।

शतावर पुराने से पुराने कमजोर रोगी के शरीर को रोगों से लड़ने क़ी क्षमता प्रदान करता है I मूत्र और धातु सम्बंधित रोगों में असरदार फायदा पहुचाने की वजह से यूरोप में भी इसकी भारी डिमांड है !

इसकी जड़ तंत्रिका प्रणाली और पाचन तंत्र की बीमारियों के इलाज, ट्यूमर, गले के संक्रमण, ब्रोंकाइटिस और कमजोरी में फायदेमंद होती है। यह पौधा कम भूख लगने व अनिद्रा की बीमारी में भी फायदेमंद है। बच्चों और ऐसे लोगों को जिनका वजन कम है, उन्हें भी फायदा होता है। इसे महिलाओं के लिए एक बढ़िया टॉनिक माना जाता है। इसका इस्तेमाल कामोत्तेजना की कमी और पुरुषों व महिलाओं में बांझपन को दूर करने और रजोनिवृत्ति के लक्षणों के इलाज में भी होता है।

शतावरी शुक्रजनक (शुक्र दौर्बल्य को दूर करनेवाली), बुद्धिवर्धक, स्तन्यजनक, शीतल, मधुर एवं दिव्य रसायन औषधि मानी गयी है I

यह एक झाड़ीनुमा लता की तरह होती है, जिसमें एक से दो इंच लम्बे गुच्छे लगे होते हैं और यह फल (शतावरी) पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं ! इसका उपयोग स्त्री रोगों व गर्भपात आदि में किया जाता है। यह जोडों के दर्द एवं मिर्गी में भी लाभप्रद होता है। सतावर की जड़ का उपयोग मुख्य रूप से ग्लैक्टागोज के लिए किया जाता है जो स्तन दुग्ध के स्राव को उत्तेजित करता है।

इसकी जड़ का उपयोग दस्त, क्षय रोग (ट्यूबरक्लोसिस) तथा मधुमेह के उपचार में भी किया जाता है। सामान्य तौर पर इसे स्वस्थ रहने तथा रोगों के प्रतिरक्षण के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसे कमजोर शरीर प्रणाली में एक बेहतर शक्ति प्रदान करने वाला पाया गया है।

आइये जानते हैं शतावर के कुछ औषधीय फायदे –

– रोगी खांसते-खांसते परेशान हो तो शतावरी चूर्ण 1.5 ग्राम, वासा के पत्ते का रस 2.5 मिली, मिश्री के साथ लें तो लाभ मिलता है !

– स्वप्न दोष से पीड़ित हो तो शतावरी मूल का चूर्ण 2.5 ग्राम, मिश्री 2.5 ग्राम को एक साथ मिलाकर, 5 ग्राम क़ी मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय माता के दूध के साथ देने से प्रमेह, स्वप्न-दोष आदि में बढ़िया लाभ मिलता है I

– शतावरी के जड के चूर्ण को पांच से दस ग्राम क़ी मात्रा में दूध से नियमित से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है! यदि पुरुष यौन शिथिलता और यौन दुर्बलता से परेशान हो तो शतावरी पाक को दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है I

– गाँव के लोग इसकी जड़ को गाय व भैंस को खिलाते हैं, जिससे उनकी दूध न आने क़ी समस्या में लाभ मिलता है, इसके ऐसे ही लाभ प्रसूता स्त्रियों को भी मिलते हैं I प्रसूता स्त्रियों में दूध न आने क़ी समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण पांच ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है !

– मूत्र या मूत्रवह संस्थान से सम्बंधित विकृति हो तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है I

– शतावरी के पत्तियों का कल्क बनाकर घाव पर लगाने से भी घाव भर जाता है !

– वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का प्रयोग या इनके क्वाथ का सेवन ज्वर (बुखार) से मुक्ति प्रदान करता है I

– शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन, दर्द एवं पित्त से सम्बंधित अन्य बीमारीयों में लाभ मिलता है !

– अनिद्रा हो तो बस शतावरी क़ी जड़ को खीर के रूप में पका लें और थोड़ा गाय का घी डालें, इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पायेंगे !

– शतावरी क़ी ताज़ी जड़ को कूट कर, इसका रस निकालें और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें ! इस तेल को माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगायें और लाभ देखें I

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