एक्यूप्रेशर चिकित्सा द्वारा असमय जवानी के जोश की कमी का इलाज

आजकल की महानगरीय जीवन शैली की वजह से अक्सर नव विवाहित जोड़ों में अपने शादी के प्रति उत्साह कुछ ही वर्षों में कम होने लगता है ………………….. आज से मात्र 50 – 60 साल पहले तक भारत में एक प्रसिद्ध कहावत थी कि “साठा तो पाठा” मतलब साठ साल में तो जवानी का दूसरा फेज शुरू होता था …………… पर अब तो वास्तविक स्थिति इतनी भयानक हो चुकी है कि जवानी शुरू होने से पहले ही कई युवा अंदर से जवानी खो चुके होतें हैं ……………. आईये जानने की कोशिश करतें हैं समाज के लिए घातक इसी समस्या के परमानेंट सल्यूशन की !

वास्तव में शरीर की ऐसी मजबूती ना रह पाने के कई अहम कारण हैं जिसमें से एक मुख्य कारण है प्रकृति से मानव शरीर के डायरेक्ट जुड़ाव का अभाव !

प्रकृति से मानव शरीर के डायरेक्ट जुड़ाव का अभाव का मुख्य कारण है आज की कृत्रिम महानगरीय जीवन शैली जिसमे पञ्च तत्वों (पृथ्वी, आकाश, वायु, जल, अग्नि) से बनी मानव शरीर, इन पञ्च तत्वों से काफी दूर हो गयी है जिस वजह से मानव शरीर जो ऊपर से भले ही मेकअप के बल पर चमकती दमकती नजर आये पर अंदर से क्रमशः निस्तेज और नाजुक मिजाज होती जा रही है !

आज का इम्मेच्योर मॉडर्न साइंस भले ही माने या ना माने लेकिन वास्तविकता यही है कि कोई भी मानव शरीर तभी पूर्ण रूप से स्वस्थ रह पायेगा जब इसका इन पञ्च तत्वों से भरपूर सम्पर्क नियमति रूप से होता रहेगा, जिसका बड़ा उदाहरण हैं गावों या जंगलों में रहने वाले अधिकाँश लोग जो निश्चित रूप से शहर वालों की तुलना में शारीरिक रूप से ज्यादा मजबूत होतें हैं …………………………. क्योंकि गाँवों में रहने वाले अधिकाँश लोग प्रकृति से सीधे इन पञ्च तत्वों के शुद्ध रूप से नियमित सम्पर्क में आते रहतें हैं …………………………… जैसे – खेतों में काम करने के दौरान शुद्ध मिट्टी से बार बार सम्पर्क होता है जबकि शहरों में रहने वाले अधिकांश लोग पेंट (केमिकल) पुते हुए कंक्रीट व टाइल्स आदि के सम्पर्क में आतें हैं ………………… तथा गाँवों में रहने वाले अधिकाँश लोग ताज़ी नेचुरल वायु का सेवन अपना पसीना सुखाने के लिए करतें हैं जबकि शहर के लोग एयरकंडीशन या बंद कमरे की पंखे की हवा का सेवन करतें हैं और साथ ही साथ जाने अनजाने खूब प्रदूषित हवा को भी सोखतें रहतें हैं ……………….. अगर गाँव के आसपास कोई खतरनाक केमिकल्स पैदा करने वाले उद्योग या खेतों में रासायनिक खाद व कीटनाशकों का ज्यादा प्रयोग ना हो रहा हो तो गाँव के लोग हैण्डपंप का जो ताजा पानी पीतें है उसमें मिनरल्स की उचित मात्रा होती है, जबकि शहरों में विभिन्न प्लास्टिक की पाइपों और टंकियों के द्वारा पहुचने वाला पानी (जिसमें घरेलू वाटर फ़िल्टर की सफाई के बावजूद भी शहर के गटर व उद्योगों से निकलने वाले हानिकारक केमिकल्स के सूक्ष्म अंश पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पातें हैं) या बोतल बंद मिनरल वाटर उतना ज्यादा गुणवान नहीं रह जाता है …………………………….. गाँव में रहने वाले लोग खुले आकाश के नीचे सूर्य की रोशनी का सेवन नियमित करतें हैं जिसकी वजह से उनके शरीर में आकाश तत्व व अग्नि तत्व की मात्रा उचित अवस्था में बरकरार रहती है जबकि शहरों में रहने वाले कई लोग कुछ मिनट सूर्य की रोशनी को झेलने से भी बचने के लियें सन लोशन लगातें हैं (ऐसे लोगों को यह नहीं पता कि आज के वैज्ञानिकों ने भी हिन्दू धर्म की इस बात को स्वीकारना शुरू कर दिया है कि भगवान् सूर्य ही हमारे इस पृथ्वी के जीवन के मुख्य आधार हैं, इसलिए इनसे बचने की नहीं बल्कि इन्हें नमस्कार करने की जरूरत है……………. और अगर दोपहर की धूप बर्दाश्त ना हो तो कम से कम सुबह व शाम में तो सूर्य प्रकाश को शरीर पर अधिक से अधिक रोज पड़ने देना चाहिए) !

ऐसा नहीं है कि गाँवों में रहने वाले लोग बीमार नहीं पडतें है, लेकिन ज्यादातर गाँव के वही लोग बीमार पडतें हैं जो गाँव में रहने के बावजूद शहर की दिनचर्या (जैसे कम शारीरिक मेहनत पर अधिक तला भुना गरिष्ठ भोजन का सेवन आदि) फॉलो करने की कोशिश करतें हैं या कोई गलत आदत (जैसे तम्बाखू, बीड़ी, शराब आदि का नशा) पालतें हैं या अपनी हर छोटी मोटी बीमारी के लिए एलोपैथिक दवाओं के खाने के कुचक्र में फस जातें हैं या मांस मछली अंडा खातें हैं जिसकी वजह से उन्हें निर्दोष बेजुबान जानवरों का भयंकर श्राप लगता है जो निश्चित एक ना एक दिन उन्हें खून के आंसू रुला कर ही रहता है !

बड़े बड़े शहरों में रहने वाले कई ऐसे अमीर लोगों (जिनके शरीर में कोई बेहद कष्टदायक जिद्दी बीमारी लग चुकी होती है) के मन में अक्सर पछतावा और ईष्या पैदा होती हैं उन भोले भाले सीधे मेहनती गाँव के गरीब लोगों को देखकर जो दिन भर कड़ी मेहनत के बाद हसते मुस्कुराते हुए सूखी रोटी को ही बड़े प्रेम से खाकर गहरी नीद सो जातें हैं …………………… ऐसे गाँव के संतोषी लोगों को देखकर ही ऐसे अमीरों को अपनी गलती का अहसास होता है कि भले ही कागज के नोट कमाने की अंधी दौड़ में वे उन गाँव वालों से काफी आगे निकल गयें हों, लेकिन जो सबसे बड़ी पूजीं होती है (अर्थात निरोगी काया) उसमे वे उन गरीब लोगों से काफी पीछे रह गए ………………….. शरीर में कोई बेहद कष्टकारी रोग लगा हो तो सोने चांदी के बिस्तर पर भी नीद नहीं आती है और इफरात पैसा होने के बावजूद सिर्फ दाल के पानी व रोटी के छिलके से गुजारा करना पड़ता है लेकिन शरीर एकदम स्वस्थ मजबूत हो तो आदमी घी भी पीये तो भी पच जाता है और टूटी चारपाई पर भी बहुत गहरी नीद आती है …………………….. सारांश यही है कि स्वास्थ एक ऐसी पूजी है जिसे कभी भी पैसे से नहीं ख़रीदा जा सकता है क्योंकि अगर ऐसा होता तो पैसे वाले कभी भी बीमार ही नहीं पड़ते !

जैसा की हम यहा बात कर रहें हैं विवाह सम्बन्धों में कामेच्छा, जोश व उत्साह आदि की कमी की !

किसी मानव में काम की इच्छा बढ़ाने के उसके शरीर में लिबिडो हार्मोन का उचित स्राव होना जरूरी होता है !

एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति (जो की भारतीय मर्दन विद्या का अधूरा रूप है) में लिबिडो हार्मोन का स्राव शरीर में बढ़ाने के लिए शरीर में नाभि और इसके आसपास के क्षेत्र (खासकर दो अंगुल नीचे तक के क्षेत्र acupressure points for sexual diseases) पर बार बार अपनी उँगलियों से सुबह शाम खाली पेट, 5 मिनट तक दबाव डालना पड़ता है !

सिर्फ दबाव देने से हारमोंस का उतना अच्छा स्राव नहीं हो पाता है जितना कि सूर्य नमस्कार करने से !

सूर्य नमस्कार सभी योगासनों में सर्वश्रेष्ठ है !

यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है !

इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है ! सूर्य नमस्कार (yogasana soory namskar in hindi, yoga Surya Namaskar steps in hindi) स्त्री, पुरुष, बाल, युवा तथा वृद्धों अर्थात सभी के लिए भी बहुत ही उपयोगी बताया गया है !

सूर्य नमस्कार के बारे में प्राचीन हिन्दू धर्म के ग्रन्थों में कहा गया है-

“आदित्यस्य नमस्कारन् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।
आयुः प्रज्ञा बलम् वीर्यम् तेजस्तेशान् च जायते ॥“

अर्थात जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज रोज बढ़ता ही जाता है !

सूर्य नमस्कार ना केवल कामेच्छा, जोश, उत्साह आदि बढाता है बल्कि सभी यौन रोगों (जैसे – वीर्य अल्पता, शीघ्र पतन, स्वप्नदोष, निल शुक्राणु, लिंग में कड़ापन ना होना आदि) के अलावा अन्य सभी शारीरिक रोगों (जैसे – मोटापा, मधुमेह, हृदय, किडनी व लीवर की समस्याओं, डिप्रेशन स्ट्रेस सुस्ती जैसे सभी मानसिक रोगों, गठिया, गैस, आँख की रौशनी की कमी, कमजोर मसूढ़े व दांत, झुर्रियां, त्वचा का ढीलापन, सर्वाइकल कमर स्याटिका दर्द, पथरी, अंडकोष सूजन, प्रोस्टेट, अस्थिक्षय, सभी तरह के कैंसर, एड्स आदि) जैसी सभी घातक बीमारियों में निश्चित ही उम्मीद से बढ़कर फायदेमंद है !

वास्तव में सूर्य ही प्रत्यक्ष शिव हैं, सूर्य ही प्रत्यक्ष नारायण हैं ……………….. अर्थात सारांश रूप में सूर्य ही परम ब्रह्म के प्रत्यक्ष अंश रूप हैं इसलिए सूर्य नमस्कार करने से उनकी उर्जा से मानव शरीर के नाभि स्थित मणिपूरक चक्र में सूर्य का भी धीरे धीरे उदय होने लगता है जिससे निश्चित है कि दुनिया की कोई भी बड़ी से बड़ी बीमारी ऐसी नहीं है जिसका देर सवेर नाश ना हो सके !

वास्तव में हठ योग में ऋषियों ने हर मानव शरीर के नाभि में एक पूरे ब्रह्मांड का वास बताया है जिसमें अलग अलग योगी अपने अभीष्ट मनोकामना पूर्ती हेतु अलग अलग चीजों का ध्यान करतें है …………………… जैसे कुछ योगी नाभि में हजार पंखुड़ियों वाले पीले रंग के पुष्प का ध्यान करतें हैं जिसका उन योगियों को विचित्र दिव्य किस्म का लाभ मिलता है (हम जल्द ही अलग अलग चीजों के ध्यान सम्बन्धित फलों पर एक विशेष लेख प्रकाशित करने वालें हैं जिसकी जानकरी हमें एक ईश्वर दर्शन प्राप्त महान योगी की हमारे “स्वयं बनें गोपाल” समूह के प्रति अगाध कृपा स्वरुप मिली है) ……………………… नाभि में सूर्य का ध्यान करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ती होती है …………….. लेकिन नाभि में सूर्य का ध्यान सिर्फ दिन में ही करना उचित होता है जब सूर्य उदय रहतें हैं ………………………… इसलिए सबसे अच्छा रहता है कि सूर्य नमस्कार करते समय लगातार ध्यान करते रहा जाए की नाभि के अंदर, भगवान सूर्य प्रचंड रूप से जगमगा रहें हैं और उनसे निकलने वाली सुनहली दिव्य किरणे पूरे शरीर को तेजी से दिव्य, तेजोमय, बलवान और निरोगी बना रहीं हैं …………………… किसी भी योगासन और प्राणायाम को करते समय इस तरह की मानसिक भावनाओं को करने से फायदा कई गुना बढ़ जाता है !

अतः अगर ज्यादा असरकारक प्रभाव शीघ्र चाहिए हो तो व्यक्ति को कम से कम 1 बार लेकर 13 बार तक सूर्य नमस्कार का अभ्यास रोज करना चाहिए (वैसे हिमालय में दुर्लभता से मिलने वाले कुछ ऐसे साधु जिनकी आयु की सही जानकारी किसी को नहीं है और ना ही वे अपने से अपनी आयु के बारे में किसी को कुछ बतातें हैं, उन्हें प्रतिदिन 52 बार से लेकर 108 बार तक सूर्य नमस्कार करते हुए देखा गया है) !

सूर्य नमस्कार की हर स्थिति में कम से कम 5 से 7 सेकेंड तक रुकना ही चाहिए ! सूर्य नमस्कार खुले आसमान के नीचे एक चद्दर बिछा कर किया जाए तो सर्वोत्तम है लेकिन अगर ऐसा ना हो सके और कमरे के अंदर करना पड़े तो सभी खिड़की दरवाजे खोल देना चाहिए ताकि अधिक से अधिक सूर्य का प्रकाश कमरे में आ सके !

सूर्य नमस्कार कभी भी नंगी जमीन पर नहीं करना चाहिए, कम से कम एक चद्दर या कम्बल बिछा कर ही तथा केवल समतल जमीन पर ही करना चाहिए ! अन्य सभी योगासन और प्राणायामों की तरह सूर्य नमस्कार को भी जूता पहन कर नहीं करतें हैं ! ठण्ड के मौसम में जरूरत महसूस हो तो मोज़े पहन कर सकतें है लेकिन बाकी शरीर पर ढीला ढाला कपड़ा ही पहनना चाहिए ! सूर्य नमस्कार केवल दिन में करना चाहिए, ना कि रात में (कुछ महीने पहले सर्जरी करवा चुके मरीजों को इसे करने से पहले एक बार चिकित्सक की सलाह भी ले लेना चाहिए तथा हृदय रोगियों को कोई भी योग आसन, प्राणायाम या अन्य कोई एक्सरसाइज धीरे धीरे शुरू करके बढ़ाना चाहिए) !

(नोट – सूर्य नमस्कार समेत अन्य योगासनों की क्रियाविधि व लाभ जानने के लिए कृपया नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें)-

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[ यौन समस्याएं (sex information about sex problems, gupt rog gyan), गुप्त रोग (gupt rog of hidden part), , धातु रोग, रति रोग (private part Venereal Diseases Symptoms) मैथुन रोग, सम्भोग रोग, वीर्य रोग (varieties of sexual diseases like semen, seminal fluid, sperm, nerve, seed, slime, veery, virya, veerya, spermatozoon, spunk, cum related problems), नपुंसकता (impotency, impotence, castrate, eunuch, sexless ,adjective, impotent, neuter) एवं जननांगो से सम्बंधित रोग कई प्रकार के होतें हैं –

जैसे – शीघ्रपतन (early ejaculation or Premature ejaculation ), वीर्य अल्पता या शुक्राणु अल्पता या वीर्य में स्वस्थ शुक्राणुओं की कमी या वीर्य की कमी या निल शुक्राणु (sexual debility), वीर्य का पतलापन, शुक्रमेह, धातु गिरना (shukrmeh, dhatu rog), स्वप्न दोष (Night emission, night fall), धातुक्षीनता (Spermatorrhea), लिंग में कड़ापन ना होना या लिंग में उत्थान ना होना (erectile dysfunction, erection, retention, ejaculation), यौन संचारित रोग (sexually transmitted disease, STD), उपदंश (सिफलिस, powerful metastastic or latent Syphilis), सुजाक (गोनोरिया, Gonorrhoea), लिंफोग्रेन्युलोमा बेनेरियम (Lyphogranuloma Vanarium), रतिज व्राणाभ (Chancroid), एड्स या एच आई पॉजिटिव (AIDS or HIV positive), जोश उत्साह की कमी या काम इच्छा की कमी या कामुकता की कमी (lack of sexual desire, sex force, sex feeling), वीर्यवाहक नली सम्बंधित समस्या (Spermatic cord problems), लिंग दोष (defect of penis), शिश्न चर्म रोग (skin disease of penis), वीर्य के दोष (sperm disorder), पौरुषग्रंथि का बढ़ना व सूजन (Enlargment of prostate gland), लिंगोद्रेक (Chordee), लिंग में वृद्धि (Enlargement of the penis), अष्ठीला (Hypertrophy), अण्डकोष का बढ़ना (Hydrocele), अण्डकोष की जलन (Inflammation of the testicles), अण्डकोष की सूजन (Swelling of the testicles), अण्डकोष की खुजली (Itching of the testicles), अण्डकोष के रोग (Testicles problems), बांझपन (Sterility, egg, testicle, acarpous, barren, neuter, Female Infertility), शुक्राणुओं द्वारा स्त्री के डिम्बाणु के निषेचन में समस्या जिससे गर्भ धारण में समस्या, योनि का ढीलापन, श्वेत प्रदर (ल्युकोरिया, likoria, leucorrhoea symptoms treatment), रक्‍त प्रदर आदि महिलाओं के रोग, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओ), ऐंडोमेटरिओसिज़, गर्भाशय फाइब्रॉएड, अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूबज़, कैंडिडा, क्लैमिडिया (chlamydia symptoms and treatments), श्रोणि जलन बीमारी (पीआईडी, Salpingitis, श्रोणि सूजन बीमारी, VTO, यह महिला जननांग अंगों के एक गंभीर संक्रमण है, गर्भाशय में शामिल हैं जो, अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब), योनि त्वचा रोग (genital herpes योनि त्वचा रोग काम क्रिया से फैलने वाली बीमारी, यौन संचारित बीमारी एसटीडी है जो कि हर्पिस सिम्प्लेक्स नामक वायरस प्रकार – 1, एच एस वी-1, और टाइप – 2 ,एच एस वी-2 से पैदा होता है) !

उपर्युक्त इलाज दुष्ट वीर्य रोगों में बेहद चमत्कारी रूप से फायदेमंद है जिसे विभिन्न शीर्षकों से खोजा जाता है, जैसे – सेक्स शक्ति को बढ़ाने वाले घरेलू उपाय, यौन-रोग सूज़ाक की बेअसर होती दवाईयां, गुप्त रोगों के लिये नेट पर बिकने वाली दवाईयां, पुरुष के प्रमुख यौन रोग , कारण , लक्षण एवं निवारण, नारी काम-विमुखता, बुझते यौवन में भरें जवानी का जोश, शुक्राणु अल्पता निवारक सरल उपचार, शुक्राणु अल्पता निवारक सरल उपचार, सेक्स विषयक रोचक तथ्य, गर्भ धारण कैसे करें (how to get pregnant), गर्भ धारण कैसे करें, how to get pregnant, नपुसंकता दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय, शीघ्रपतन दूर करने के उपाय, योनि से संबधित कुछ रोग एवं उनका निदान, पुरूषों की सेक्‍स संबंधी समस्‍याएं और उनका उपचार, गर्भधारण करके के लिए तथा बांझपन दूर करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार, गर्भधारण करके के लिए तथा बांझपन दूर करने के लिए जड़ीबूटीयां, प्रेग्‍नेंसी (pregnancy problems) के दौरान होने वाली समस्‍याएं, डिलीवरी (pregnant woman delivery problems) के समय और बाद की समस्‍याएं डिलीवरी आसानी से होने के आयुर्वेदिक टिप्स, मासिक धर्म सम्बंधित परेशानियां, लिंग का छोटापन, लिंग का टेढ़ापन, कैसे बढ़ाए यौन-शक्ति (make love), कैसे बढ़ाए यौन-शक्ति आयुर्वेदिक उपायों से (herbal treatment of increasing seminal power, vitality power), त्वचा को तेल व रुखापन से मुक्त बनाने के हर्बल उपाय ट्रीटमेंट, पुरुषों की हर तरह कमजोरी को जड़ से मिटाने के कुछ आसान आयुर्वेदिक औषधि (herbal treatment or herbal upachar), पतंजलि धातु की दवा, पतंजलि धातु की औषधि, बाबा रामदेव की नपुंसकता की दवा दिव्य यौवनामृत वटी patanjali divya yauvanamrit vati के फायदे, पतंजलि दिव्य यौवनाचूर्ण (Patanjali Youvan Churna Detail and Uses in impotence) ke labh, पतंजलि शिलाजीत कैप्सूल (patanjali shilajit capsule benefits in hindi), पुरुषों की हर तरह कमजोरी को जड़ से मिटाने के कुछ आयुर्वेदिक टिप्स (shighr patan ke ayurvedic tips) , लड़कों की आम समस्या हस्त-मैथुन के दुष्परिणाम व आयुर्वेदिक इलाज (ayurvedik ilaj hast maithun, swapn dosh, napunskta, veery rog), युवकों की आम यौन समस्यायें, धातु दुर्बलता (dhatu durbalta door karne ke upay ) दूर करने के उपाय, धातु दुर्बलता दूर करने के उपाय, नपुसंकता दूर कर मर्दांगनी वापस पाने के उपाय, हर्बल कैप्सूल शिलाजीत (herbal capsule shilajit can give mardana takat, paye shilajit se mardangi vapas) और मर्दाना ताकत पाये, सभी तरह के मासिक रोग (masik rog aur peshab ke rogo ka ayurvedik upachar), सभी तरह के पेशाब रोग, टी कोशिकाओं सेल्स, प्रशिक्षक यौन रोग विशेषज्ञ, गुप्त रोग एवं यौन रोग के संबंध में विस्तृत जानकारी, शेंक्रोआइड, यौन रोगों का इलाज से संबंधित खोज, नपुसंकता का इलाज, धातु रोग का देसी इलाज, आयुर्वेद के उपचार, गुप्त रोगों की जानकारी, गुप्त अंग पर तिल, ह्यूमन पेपिलोमावायरस इन्फेक्शन, gupt rog medicine hindi, गुप्त रोगी, नपुसंकता का इलाज से संबंधित खोज, नपुसंकता की दवा, आक का तेल, मर्दाना कमजोरी का इलाज, नपुसंकता क्या है, नपुसंकता के कारण, लिंग वर्धक यंत्र, नपुसंकता के लक्षण, नामर्दी की दवा, स्तंभन दोष, मर्दाना कमजोरी का इलाज से संबंधित खोज, मर्दाना ताकत बढ़ाने के उपाय, मर्दाना कमजोरी क्या है, मर्दाना ताकत की दवा, शारीरिक कमजोरी दूर करने के उपाय, मर्दानगी की दवा, मर्दाना कमजोरी की दवा, ताकत का खजाना, ताकत की गोली, मर्दाना ताकत को बढाने का रामबाण ईलाज, लिंग को बड़ा लम्बा और मोटा करने के उपाय, मर्दाना कमजोरी का राज, मर्दाना कमजोरी का इलाज के लिए और चित्र, मर्दाना कमजोरी का इलाज के लिए अंग्रेज़ी वेब से चित्र, मर्दाना कमज़ोरी का इलाज इन हिंदी घरेलु नुस्खे, आयुर्वेद यौन शक्ति बढ़ाने के कुछ सरल घरेलू उपाय, धात रोग और लिंग की कमजोरी का अचूक देसी इलाज Dhatu rog, मर्दाना ताकत बढ़ाने वाली दवाएं, Mardana Kamzori ka Ilaj: पाइए मरदाना कमजोरी का इलाज, मर्दाना ताकत बिल्कुल समाप्त हो गयी है तो अपनाएँ ये आयुर्वेदिक दवाएं, यौनांग छोटा होने पर ये है आयुर्वेदिक उपाय, पौरूष शक्ति के उपाय, नपुसंकता का शर्तिया इलाज, शिलाजीत खाये और मर्दाना ताकत पाये, हरपिस प्रोजेनाइटेलिस एवं नन-गोनोकोकल यूरेथ्राइटिस प्रचलित यौन रोग है, पुरूषों के लिंग से मवाद अथवा तरल पदार्थ का स्राव होना, गुप्तांगों (ling, yoni, guptang ke rogo ke liye jadi butiya) पर घाव, फोड़ा-फुंसी होना, लिंग का ना तनना, गुप्तांगों के समीप गिल्टि होना, शरीर पर चकते का होना एवं पेशाब में जलन होना गुप्त रोग अथवा यौन रोग के लक्षण हैं। वहीं महिलाओं में योनि से स्राव होना, गुप्तांगों के आसपास खुजली या जलन होना, स्त्रियों में प्रजनन क्षमता विभिन्न स्वास्थ्य समस्यायें पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओ), ऐंडोमेटरिओसिज़, गर्भाशय फाइब्रॉएड, अवरुद्ध फैलोपियन ट्यूबज़, कैंडिडा, पेट के निचले भाग में दर्द होना आदि यौन रोग के लक्षण हैं, इन-विट्रो-फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) या सरोगेट-मां के माध्यम से कई महिलाएं बच्चा प्राप्त करना, Vriddhavasthaa or Sex, वृद्धावस्था और सेक्स, Old Age and Sex, बुढापे में सम्भोग (sambhog) के घातक परिणाम, Sex Sahvaas ki Shi Umar, Vriddh or Javan ki Shaadi ka Prinaam, Praudhavastha mein Sharirik Sambandhon ke Natije, सेक्स रोग, गुप्तांग की दोषपूर्ण बनावट होना, लिंग का गलना (Decaying of penis), शरीर में जिंक तत्व की कमी, प्रोस्टेट ग्रंथि के विकार, यौन रोग (yaun rog, yon rog, yaun samsya), Best Sexologist suggests Home Remedies for Female Infertility, health care tips, Healthy Life, Fallopian Tubes Function Pictures Definition, The uterine tube (fallopian tube) carries an egg from the ovary to the uterus. 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