एक क्षण भी बहुत ज्यादा है प्रसन्न स्कंदमाता के लिए महा दरिद्र को महा धनी बनाने में

Skandamata_Sanghasri_2010_Arnab_Duttaबच्चों को खुश करो तो माँ अपने आप गदगद हो जाती है ! बहुत ही आसान और सरल है माँ स्कन्द माता को खुश करना !

बस छोटे गरीब बच्चे जो जिंदगी की हर खुशियों से वंचित है उन्हें जितना अधिक से अधिक खुशियाँ आप दे सकें उतना ही माँ स्कन्द माता आपसे प्रसन्न होंगी !

और स्कन्द माता के खुश होने से होगा क्या, इसका अंदाजा सामान्य आदमी कभी नहीं लगा पायेगा !

क्योंकि ये जगदम्बा है और इनकी ताकत अपार है ! अगर ये खुश हो गयी तो एक क्षण भी बहुत ज्यादा है, दरिद्र को महाधनी बनने में !

इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार (कार्तिकेय) की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से उद्धृत किया गया है।

भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं।

यह देवी दुर्गा का ममतामयी रूप है। मां इस रूप में अपने गोद में बालक स्कंद को लिए हुए स्नेह की वर्षा कर रही हैं। जो भक्त मां के इस स्वरूप का ध्यान करता है उस पर मां ममता की वर्षा करती हैं और हर संकट एवं दुःख से मुक्त करती है।

भगवान स्कंद ‘कुमार कार्तिकेय’ नाम से भी जाने जाते हैं। ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे। पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है।

स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा वरमुद्रा में है तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प ली हुई हैं। इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। सिंह इनका वाहन है।

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