विश्व सम्राट के खोये हुए पद को दुबारा वापस पाने के लिए ये तो करना ही पड़ेगा

· September 9, 2015

172766 (1)आप एक बड़े ऑफिसर या बिजनेस मैन हैं और अपनी वाइफ और बच्चे के साथ बढ़िया आलिशान घर में रहते हैं और पैसे की कमीं नहीं है, जो आप चाहते हैं और जो आपका बच्चा – वाइफ चाहते है उसे आप खरीद लेते हैं, कुल मिलाकर आप एक सक्सेस फुल लाइफ जी रहें हैं और आपको अपनी लाइफ और लाइफ स्टाइल को देखकर ख़ुशी और गर्व महसूस होता है !

बढियां है या यूँ कहें बहुत अच्छा हैं !

समय तो बीतेगा ही, क्योंकि कौन माई का लाल दुनिया में पैदा हुआ है जो समय को बढ़ने से रोक पाया है !

तो जब आप बूढ़े हुए, और बूढ़े हुए, और बूढ़े हुए तो आप महसूस करते हैं की आपको आपके बच्चों की बहुत याद आ रही और याद इतनी ज्यादा बढ़ती जा रही है की आपके पास सब सुख सुविधा नौकर चाकर यार दोस्त होते हुए भी आपका मन किसी भी चीज में बिलकुल नहीं लग रहा है, बस और बस आपको आपके बच्चों को देखने और उनके साथ रहने का मन कर रहा है, पर लड़का तो परमानेंट विदेश में सेटेल हो गया और वापस इंडिया आने को तैयार ही नहीं !

वापस आने के लिए इसलिए तैयार नहीं क्योंकि उसे वापस आने में कोई रुचि ही नहीं और रूचि हो भी कैसे ? क्योंकि बचपन से तो आपने उसके मन में अंग्रेजी भाषा अंग्रेजी माहौल अंग्रेजी देश के प्रति जो प्रशंसा गर्व प्रेम का भाव भरा है और हिंदी भाषा हिंदी माहौल हिंदी देश के लिए जो हीन भावना भरी है वही भाव वही सोच अब आपके लड़के का स्वभाव बन गया है ! जहाँ एक तरफ आप अपने लड़के को देखने के लिए मरे जा रहे हैं वही आपका लड़का है की उसको आपके लिए थोडा सा भी समय निकालना समय की बर्बादी लगता है !

अगर लड़का आपके पास आकर नहीं रहना चाह रहा है तो आप ही उसके पास रहने के लिए चले जाईये पर इसमें भी समस्या है की लड़का और लड़के की वाइफ बूढ़े माँ बाप की जिम्मेदारी उठाने में इंटरेस्टेड नहीं हैं क्योंकि उन्हें भी तो अपनी पर्सनल लाइफ एन्जॉय करनी है (जैसे एक ज़माने में आपने अपनी पर्सनल लाइफ एन्जॉय की थी आपके माता पिता के बिना) जिसमें आप बूढ़े लोगों की सेवा सिर्फ व्यर्थ का एक झमेला है !

अत: यहाँ पर इसके मूल में जाने की जरूरत है की हिंदी केवल एक भाषा नहीं है जिसे सिर्फ बोलना आना चाहिए ! हिंदी संस्कारों की एक बहुत बड़ी गठरी है जिसके विभिन्न संस्कार पहले इन्सान को अच्छा बनाते है फिर अच्छे इन्सान से एक मजबूत परिवार का निर्माण करते हैं और फिर मजबूत परिवारों के समूह से उज्जवल समृद्ध देश का निर्माण करते हैं !

और यही देश पूरे विश्व में जगत गुरु व जगत अध्यक्ष की भूमिका निभा सकता है, जो की हमारा प्यारा भारत वर्ष पूर्व के हजारों साल तक था पर अपने ही देश के कुछ जयचंद टाइप के देश द्रोहियों के वजह से अंग्रेजों का गुलाम बना !

अगर अंग्रेजियत में परिवार सँभालने की क्षमता होती तो अमेरिका यूरोप में आज परिवारवाद अपनी समाप्ति के दौर में ना होता और वहां के सामाजिक विज्ञान के प्रोफेसर्स भारत आकर यहाँ के जॉइंट फैमिली मॉडल पर रिसर्च ना कर रहे होते !

किसी फॅमिली में पैसा ना हो लेकिन हर आदमी एक दूसरे का लिहाज, सम्मान और प्रेम करें तो उस परिवार का हर आदमी भूखे पेट भी खुश दिखाई देगा वहीँ किसी परिवार में धन दौलत तो बहुत हो पर आपसी प्रेम गायब हो तो वहां के लोगों की जिंदगी नरक ही है !

इसलिए हिंदी की महिमा समझिये, हिंदी में लिखे आदरणीय ग्रंथो को पढ़िये, हिंदुस्तान के सच्चे महापुरुषों संतों से मिलिए और ज्ञान लीजिये, तब आपको समझ में आयेगा की हिंदी केवल बोलने की चीज नहीं बल्कि एक सम्पूर्ण विज्ञान है इस दुनिया में सुखी जीवन जीने का !

अत: संस्कारों की जननी संस्कृत भाषा और उन संस्कारों की सरल वाहक हिंदी भाषा के चरणों में कोटि कोटि नमन है ! !

facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail


ये भी पढ़ें :-