रोज रोज बासी खाना आदमी की प्रजनन क्षमता बर्बाद कर देता है

शरीर ऊपर से देखने में नपुंसक नहीं लगेगा क्योंकि काम भर की स्टेमिना (ताकत), ओज, चमक शरीर पर दिखाई देगी और नामर्दानगी का कोई प्रत्यक्ष लक्षण भी नहीं दिखाई देगा पर सबके बावजूद सन्तान पैदा नहीं होगी ! ये असर होता है रोज सुबह शाम सिर्फ बासी खाना कई कई दिनों तक खाने से !

यह मामूली बात नहीं, बड़ी बात है की बासी खाना भी कोई कारण हो सकता है आदमी की प्रजनन क्षमता के नाश का ! इसकी जानकारी आजकल के मॉडर्न साइंस को फ़ॉलो करने वाले डॉक्टर्स और वैज्ञानिकों को भी नहीं पता है क्योंकि वे तो सिर्फ खाने में अभी तक प्रोटीन, विटामिन्स, न्यूट्रीशन आदि तक ही खोज पाए हैं और इसके आगे की बहुत सी चीजों से वे अभी तक एकदम अनजान हैं !

दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में से माने जाने वाले वैज्ञानिक, अलबर्ट आइंस्टीन भारत आकर, जब भारतीय आध्यात्म के सम्पर्क में आये तो काफी प्रभावित हुए और वो कई दिनों तक भारतीय वैज्ञानिकों के साथ मिलकर शोध करते रहे ! अलबर्ट आइंस्टीन का ही कहना है की, आज का विज्ञान जहाँ ख़त्म हो जाता है वहां से आध्यात्म शुरू होता है !

हमारे अनन्त वर्ष पुराने परम आदरणीय हिन्दू धर्म के आयुर्वेद ग्रन्थ की एक प्रसिद्ध कहावत है कि, रोज 100 काम छोड़ कर समय से नहाना चाहिए, 1000 काम छोड़ कर ताजा बना हुआ खाना समय से खाना चाहिए, और लाख काम छोड़ तड़पते जरूरतमंद की सहायता करना चाहिए !

ये सब कहावते ऐसे ही टाइम पास के लिए नहीं कह दी गयी हैं, बल्कि इनके पीछे बहुत गहरा साइंस छिपा है, और इनके होने से वाले फायदे या इनके न होने से वाले नुकसान, सिर्फ भुक्त भोगी ही समझ सकते है !

रोज सुबह प्रातः काल (सुबह 4 से 5 बजे के बीच) नहाने के सैकड़ों शारीरिक लाभ है ! साधारण लोग नहाने को शरीर की केवल सफाई की प्रक्रिया समझते है जबकि अगर इसे ढंग से किया जाय तो ये एक उच्च स्तर की अध्यात्मिक प्रक्रिया है ! नहाने के लिए केवल जल पर्याप्त होता है और किसी साबुन की जरूरत बिल्कुल नहीं होती है पर अगर विशेष इच्छा करे तो सिर्फ प्राकृतिक चीजों (जैसे बेसन, मलाई, मुल्तानी मिटटी, हल्दी, चन्द, नींबू, नीम आदि) का रोज इस्तेमाल किया जा सकता है ! नहाते समय भगवान का नाम लेने से बहुत फायदा मिलता है क्योंकि इससे शरीर की सफाई के साथ अन्तर आत्मा की भी सफाई होती है !

आयुर्वेद कहता है की ताजा बना हुआ खाना भले ही कितना सादा साधारण हो पर वो बहुत ही स्वास्थ्य वर्धक होता है जबकि बासी खाना भले ही कितना भी स्वादिष्ट हो, पर वो हमेशा नुकसान ही करेगा ! बासी खाने को खाने से ठीक पहले गर्म करने के बावजूद वो कभी भी ताजे खाने की बराबरी नहीं कर सकता है और वो भी बासी खाने की तरह नुकसान ही करता है !

अब आजकल नौकरी पेशा, बिजनेस मैन लोगों की दिनचर्या इतनी अनिश्चित हो गयी है की लोगों का हर समय ताजा तुरन्त का बना हुआ खाना मिल पाना बहुत मुश्किल होता है तो ऐसे में सुझाव यह है की सुबह का खाना और रात का खाना तो घर का ताजा बना हुआ खाना चाहिए और दोपहर को भूख लगे तो किसी मौसमी फल का सेवन या 1 कटोरी दही ले लेना चाहिए और अगर शाम को भूख लगे तो कुछ ड्राई फ्रूट्स (जैसे- मेवा – बादाम, काजू, अखरोट, किशमिश, नारियल आदि) लिया जा सकता है ! सूर्यास्त के बाद कुछ फल और उनका जूस तथा दही खाना नुकसान करते हैं इसलिए सूर्यास्त के बाद सिर्फ ड्राई फ्रूट्स खाना चाहिए ! डाईबिटिज और हर्ट के मरीज भी दही का सेवन थोड़ा सा काला नमक मिलाकर रोज आराम से कर सकते हैं, पर जब ठण्ड बहुत ही ज्यादा पड़े तो दही ना लें !

और सबसे बड़ी बात की इस अनिश्चित दुनिया में कब किसके साथ क्या अनहोनी हो जाय इसको सिर्फ भगवान् ही जानते हैं इसलिए जब तक साँसे चल रही हैं तब तक दूसरों की सेवा कर खूब आशीर्वाद बटोर लेना चाहिए क्योंकि अन्त समय सिर्फ यही आशीर्वाद का धन ही साथ जाता है !

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