मूली से कई बिमारियों का इलाज

 bcggcमूली कई बीमारियों को ठीक करने में कारगर है | मूली में प्रोटीन, कैल्शियम, गन्धक, आयोडीन तथा लौह तत्व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं। इसमें सोडियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन तथा मैग्नीशियम भी होता है। मूली से विटामिन ए, बी और सी भी प्राप्त होते हैं।

स्वास्थ्य तथा उपचार की दृष्टि से छोटी, पतली और चरपरी मूली ही उपयोगी है। ऐसी मूली वात, पित्त और कफ नाशक है। इसके विपरीत मोटी और पकी मूली नुकसान दायक मानी जाती है। मूली कच्ची खायें या इसके पत्तों की सब्जी बनाकर खाएं |

मूली स्वयं हजम नहीं होती, लेकिन अन्य भोज्य पदार्थों को पचा देती है। भोजन के बाद यदि गुड़ की 10 ग्राम मात्रा का सेवन किया जाए तो मूली हजम हो जाती है।

मूली का सेवन बालों को गिरने से रोकता है। इसमें मौजूद विटामिन बी और विटामिन सी भी नर्वस सिस्टम को भी मजबूत करता है।

100 ग्राम मूली में अनुमानित तत्व हैं – प्रोटीन – ०.7 ग्राम, वसा – ०.1 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट – 3.4 ग्राम, कैल्शियम – 35 मि.ग्रा., फॉस्फोरस – 22 मि.ग्रा, लोह तत्व – ०.4 मि.ग्रा., केरोटीन- 3 मि.ग्रा., थायेसिन – ०.०6 मि.ग्रा., रिवोफ्लेविन – ०.०2 मि.ग्रा., नियासिन – ०.5 मि.ग्रा., विटामिन सी – 15 मि.ग्रा.।

मूली, शरीर से विषैली गैस कार्बन-डाई-आक्साइड को निकालकर जीवनदायी आक्सीजन प्रदान करती है। मूली हमारे दाँतों को मज़बूत करती है तथा हडि्डयों को शक्ति प्रदान करती है। इससे व्यक्ति की थकान मिटती है और अच्छी नींद आती है। मूली खाने से पेट के कीड़े नष्ट होते हैं तथा पेट के घाव ठीक होते हैं। यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करती है। आइये जानते हैं मूली के कुछ अन्य बेहतरीन फायदे –

– मूली का रस रुचिकर एवं हृदय को प्रफुल्लित करने वाला होता है। यह हलका एवं कंठशोधक भी होता है।

– घृत में भुनी मूली वात-पित्त तथा कफनाशक है। सूखी मूली भी निर्दोष साबित है। गुड़, तेल या घृत में भुनी मूली के फूल कफ वायुनाशक हैं तथा फल पित्तनाशक।

– यकृत व प्लीहा के रोगियों को दैनिक भोजन में मूली को प्राथमिकता देनी चाहिए।

– उदर विकारों में मूली का खार विशिष्ट गुणकारी है।

– मूली के पतले कतरे सिरके में डालकर धूप में रखें, रंग बादामी हो जाने पर खाइए। इससे जठराग्नि तेज हो जाती है।

– मूली के रस में नमक मिलाकर पीने से पेट का भारीपन, अफरा, मूत्ररोग दूर होता है।

– मूली की राख को सरसों के तेल में फेंटकर मालिश करने से शोथ दूर होता है। पांडु व पीलिया में मूली के पत्तों का रस निकाल लें और आग पर चढ़ा दें। उबाल आने पर पानी को छान लें। दो तोला (20 ग्राम) लाल चीनी मिलाएँ। 9-10 दिनों तक सेवन करें। इससे नया खून बनना प्रारंभ हो जाता है।

– मूली कच्ची खायें या इस के पत्तों की सब्जी बनाकर खाएं, हर प्रकार से बवासीर में लाभदायक है।

– गुर्दे की खराबी से यदि पेशाब का बनना बन्द हो जाए तो मूली का रस थोड़ी मात्रा पीने से फिर बनने लगती है।

– मूली खाने से मधुमेह में लाभ होता है।

– एक कच्ची मूली नित्य प्रातः उठते ही खाते रहने से कुछ दिनों में पीलिया रोग ठीक हो जाता है।

– गर्मी के प्रभाव से खट्टी डकारें आती हो तो एक कप मूली के रस में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ होता है।

– मासिक धर्म की कमी के कारण लड़कियों के यदि मुहाँसे निकलते हों तो प्रातः पत्तों सहित एक मूली खाने से लाभ होता है |

– मूली का रस कीड़े के काटने से होने वाली जलन, खुजली, इन्फेक्शन और दर्द को दूर करती है।

– मूली में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो आपकी स्किन को डैमेज होने से बचाते हैं।

– मूली आपको जवां बनाएं रखने में मदद करती है। इसमें पाए जाने वाले विटामिन सी, फॉस्फोरस और जिंक से स्किन लंबे वक्त तक फ्रेश रहती है।

– मूली आपकी बॉडी में से सभी विषैले तत्वों को बाहर कर देती है, जिसके परिणामस्वरूप आपकी स्किन क्लीन होने लगती है। इसके अलावा स्किन की क्लिनिंग के लिए मूली को क्रश करके स्किन पर लगाना चाहिए।

– हल्दी के साथ मूली खाने से भी बवासीर में लाभ होता है।

– मूली के पत्तों के चार तोला रस में तीन माशा अजमोद का चूर्ण और चार रत्ती जोखार मिलाकर दिन में दो बार एक सप्ताह तक नियमित रूप से लेने पर गुर्दे की पथरी गल जाती है।

– एक कप मूली के रस में बहुत थोड़ा सा अदरक का और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर नियमित सेवन से भूख बढ़ती है और पेट संबंधी सभी रोग नष्ट हो जाते हैं।

– मूली के रस में समान मात्रा में अनार का रस मिलाकर पीने से रक्त में हीमोग्लोबिन बढ़ता है और रक्ताल्पता का रोग दूर होता है।

– पानी में मूली का रस मिलाकर सिर धोने से जुएं नष्ट हो जाती हैं।

– आधी मूली को पीसकर उसका रस निकाल लें। इसे दो-दो घंटे बाद पिएं। यह कमज़ोर दांतों के लिए लाभदायक है।

– मूली के पत्तों में सोडियम होता है, जो हमारे शरीर में नमक की कमी को पूरा करता है।

– मूली के पत्ते खाने से दांतों का असमय हिलना बंद होता है।

– पेट में गैस बनती हो तो मूली के पत्तों के रस में नीबू का रस मिलाकर पीने से तुरंत लाभ होता है।

– सूखी मूली का काढ़ा बनाकर जीरे और नमक के साथ उसका सेवन किया जाये, तो खाँसी और दमे के रोग में भी लाभ होता है।

– त्वचा के रोगों में यदि मूली के पत्तों और बीजों को एक साथ पीसकर लेप कर दिया जाये, तो यह रोग खत्म हो जाते हैं।

– चूंकि मूली के पत्तों में फास्फोरस होता है। इसलिए भोजन के साथ सेवन करने से बालों का असमय गिरना बंद हो जाता है।

– मूली के पत्तों को धोकर मिक्सी में पीस लें। फिर इन्हें छानकर इनका रस निकालें व मिश्री मिला दें। इस मिश्रण को रोजाना पीने से पीलिया रोग में आराम मिलता है।

– हाथ-पैरों के नाख़ूनों का रंग सफ़ेद हो जाए तो मूली के पत्तों का रस पीना हितकारी है।

– मूली के नरम पत्तों पर सेंधा नमक लगाकर प्रात:खाएं, इससे मुंह की दुर्गंध दूर होगी।

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