महा मातृ भक्त, अथाह संपत्ति दाता श्री गणेश अनायास परम प्रसन्न हो जाते है अपनी माँ गौरी के भक्त से

lord_shivas_familyमहागौरी रूप में देवी ममतामयी और शांत दिखती हैं !

भगवान गणेश स्वयं माँ गौरी की संतान है अतः श्री गौरी आराधना से महा मंगल दायक, महा शुभकारी, महा सम्पति दाता श्री गणेश अनायास परम प्रसन्न हो जाते हैं !

मां दुर्गा का आठवां रूप, महागौरी व्यक्ति के भीतर पल रहे गंदे व मलिन विचारों को समाप्त कर प्रज्ञा व ज्ञान की ज्योति जलातीं है।

जिनकी कुंडली में विवाह से संबंधित परेशानियां हों, महागौरी की उपासना से मनपसंद जीवन साथी और शीघ्र ही सुन्दर विवाह संपन्न होता है !

यहाँ तक की श्री कृष्ण की पत्नी श्री रुक्मणि जी ने श्री गौरी आराधना से श्री कृष्ण जैसा सुन्दर पति प्राप्त किया था !

मां कुंवारी कन्याओं से शीघ्र प्रसन्न होकर उन्हें मनचाहा जीवन साथी प्राप्त होने का वरदान देती हैं !

महागौरी जी ने खुद तप करके भगवान शिवजी जैसा वर प्राप्त किया था, ऐसे में वो अविवाहित लोगों की परेशानी को समझती और उनके प्रति दया दृष्टि रखती हैं ! यदि किसी के विवाह में विलंब हो रहा हो तो वो भगवती महागौरी की साधना करें, मनोरथ निश्चित ही पूर्ण होगा !

माँ महागौरी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी !

एक बार भगवान भोलेनाथ पार्वती जी को देखकर कुछ कह देते हैं। जिससे देवी का मन आहत होता है और पार्वती जी तपस्या में लीन हो जाती हैं। इस प्रकार वषों तक कठोर तपस्या करने पर जब पार्वती जी नहीं आती तो पार्वती जी को खोजते हुए भगवान शिव उनके पास पहुँचते हैं !

वहां पहुंचे तो वहां पार्वती जी को देखकर आश्चर्य चकित रह जाते हैं। पार्वती जी का रंग अत्यंत ओजपूर्ण होता है, उनकी छटा चांदनी के सामन श्वेत और कुन्द के फूल के समान धवल दिखाई पड़ती है, उनके वस्त्र और आभूषण से प्रसन्न होकर देवी उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं।

अतः इनका वर्ण पूर्णतः गौर है। महागौरी की चार भुजाएँ हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है।

ये मनुष्य की वृत्तियों को सत्‌ की ओर प्रेरित करके असत्‌ का विनाश करती हैं और प्रसन्न होने पर सर्व मनोवांछित फल प्रदान करती है !

जय हो जगत माता, अनन्त ममता मयी, श्री गणेश माता, श्री महादेव अर्धांगनी, श्री महा गौरी की जय !

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