महा मंदी लाने वाली है महा बेरोजगारी

hjgअर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा चरित्र होता है कि ये लगातार अपना आधार बदलती रहती है जिसे बुद्धिमान व दूरदर्शी लोग समझ लेते हैं !

लकीर के फ़कीर की तरह तरक्की पाने के लिए सिर्फ चन्द रास्तों पर आगे बढ़ने की कोशिश करने वाले, वैश्विक परिवर्तन के कठिन दौर में बिखर सकते हैं !

इसलिए अगर भगवान् ने इन्सान को बहुमुखी सोच की क्षमता दी है तो उसे उसका उपयोग भी करना चाहिए ना की किसी एक ही ढर्रे को पकड़ कर यह मान लेना चाहिए की इसी से जीवन में सारी उपलब्धियां मिल जायेंगी !

कुछ महत्व पूर्ण प्राकृतिक रिसोर्सेस का निकट भविष्य में होने वाला अकाल तथा कुछ महत्व पूर्ण प्राकृतिक रिसोर्सेस का अचानक से जरूरत से ज्यादा मात्रा में उपलब्ध हो जाने, की वजह से विश्व के कई देशों में तनातनी बढ़ गयी है जो नए समीकरणों को जन्म दे रही है !

इसके अलावा अन्य दो भीषण समस्याएं, आतंकवाद और ग्लोबल वार्मिंग की है जो हर प्रगतिशील देश को काफी चिन्तित किये हुए है ! जहाँ आतंकवाद की वजह से वर्ग विशेष के लोगों को नौकरियां मिलने में दिक्कत आ रही है वहीँ ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पूरी दुनिया का इको सिस्टम तेजी से बर्बाद हो रहा है ! आज के मॉडर्न साइंस में मानव लाख तरक्की कर ले लेकिन उसे ये नहीं भूलना चाहिए कि प्रकृति की हल्की सी करवट भी लाखों मानवों की जान ले सकती है !

अन्य देशों की तरह भारत देश की भी कुछ दैनिक बुनियादी समस्याएं हैं जिनका परमानेंट सल्यूशन खोजने के साथ निकट भविष्य में आने वाली कई खतरनाक त्रासदी से भी देश को सुरक्षित निकालना ही सबसे बड़ा चैलेंज है ! इन समस्याओं की भूमिका पिछले कई सालों से बन रही थी पर पूर्व की मूर्ख सरकारों ने इसके लिए कितना काम किया है अब ये सबको पता चल चुका है !

आश्चर्य है कि, कैसे गुलाम मानसिकता से ग्रसित, लालची, देशद्रोही लोग अभी भी बिना किसी संकोच के देशद्रोही राजनैतिक पार्टियों की प्रतिदिन मुक्त कंठ से प्रशंसा किये बिना बाज नहीं आते ! अपने स्वार्थ व लालच (जैसे इलेक्शन का टिकट चाहना या दलाली के लिए कोई वैध प्लेटफॉर्म खोजना आदि) के पूर्ति के लिए इन पार्टियों की सियारों जैसी चाटुकारिता करके देश द्रोह के फैशन को प्रोत्साहन देना महा पाप है ! भगवान जल्द से जल्द इन धरती पर बोझों को सद्बुद्धि दे जिससे इनके सन्तति को इनके पापों का प्रायश्चित ना करना पड़े !

वैसे तो अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता पर आज की डेट में भारत में अकेला चना भाड़ फोड़ रहा है ! मतलब भारतीय जनता पार्टी में कितने सांसद पीठ पीछे मोदी जी की टांग खींच रहे हैं ये तो सिर्फ मोदी जी ही जानते हैं पर ये तो तय हैं की मोदी जी सही में लोहे के ही बने हुए हैं क्योंकि सारे विरोधों के अंगारों को अपनी कांख में दबाकर, एक मुस्कराते हुए ऋषि तुल्य तेजस्वी चेहरे के साथ, बारी बारी विकास के हर रुके कार्य को शरू करवा कर ही छोड़ रहें हैं !

2017 – 18 तक वैश्विक मंदी का अपने फुल फॉर्म में आ जाने के आसार हैं ! इस मंदी का असर हर सेक्टर में पड़ेगा ! फिर अमेरिका, यूरोप से लाखो आई टी इंजीनियर्स को वापस भारत लौटना पड़ सकता है ! कम्पनियाँ अपने घाटे को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर लोगो को नौकरियों से निकालेंगी !

विशाल स्तर पर फैली जाने वाली सर्वत्र बेरोजगारी की वजह से गरीबी के भी बढ़ने के आसार हैं ! खेती और हथियार को छोड़ हर लीगल बिज़नेस में बड़ी गिरावट के आसार हैं ! ऐसा कठिन समय आने से पहले बेहतर यही होता है कि अपनी नौकरी के अलावा और कोई माध्यम (जैसे गैर परम्परागत तरीको से इन्वेस्ट कर पैसे को सुरक्षित रखना या बैंक एफ. डी. आदि) की भी व्यवस्था कर लेना चाहिए जिससे इमरजेंसी पड़ने पर कम से कम परिवार का दाल रोटी लायक खर्चा निकलता रहे !

सन्त जनों से प्राप्त संकेतों के अनुसार कुछ बड़े भूकम्प भी भारत की धरती पर व अन्य देशों में भी अवश्यम्भावी हैं और ये भूकम्प इतने बड़े होंगे कि पूरे मानव जाति के सोचने की दिशा भी बदलेंगे ! भूकम्प की वजह से भी रियल एस्टेट सेक्टर में ज्यादा गिरावट आने के आसार हैं !

इस तरह की मंदी लम्बी भी खिच सकती है इसलिए ऐसी कठिन परिस्थितियों में प्रॉपर्टी के रूप में रखा हुआ धन हो सकता है मौके पर काम ना आये, काम आ सकता है तो बैंक या घर में रखा कैश, सोना, चांदी आदि ! सोना एक सर्वमान्य कीमती धातु है जो पूरे विश्व में आसानी से स्वीकार्य होता है !

बेहद कठिन परिस्थितियों में भी सिर्फ अपने और अपने परिवार की देखभाल तक ही सीमित नहीं रह जाना चाहिए क्योंकि ईश्वर लगातार यही देखता रहता है कौन कौन से वो महात्मा हैं जिन्होनें बेहद कठिन समय आने पर भी अपने मुंह के निवाले को अपनी इच्छा से दूसरे भूखे के पेट में भी डाला है !

सन्त जनों से प्राप्त संकेतो के अनुसार अगले एक से डेढ़ साल में संसार में कल्पना से परे कई नाटकीय परिवर्तन होने वाले हैं तथा इन नाटकीय परिवर्तन से उत्पन्न होने वाली भीषण त्रासदी में सहायता हेतु परम सत्ता के विशिष्ट अंशों का भी इस धरा पर आगमन का संकेत है !

बेहद कठिन समय आने पर ऐसे परिवार और उनके सदस्य पूरी तरह से धराशायी हो जाते हैं जिनमे नैतिक संस्कारों की जड़ें कमजोर होती हैं !

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