भूकम्प जब हिलाने लगे शहर को, तब आप क्या क्या कर सकते हैं ?

zzभूकम्प के बारे में सटीक भविष्यवाणी करना आज के वैज्ञानिकों के लिए तो असम्भव है और यह भी असम्भव है यह कहना की दुनिया की कौन सी जगह भूकम्प से एकदम सुरक्षित है या असुरक्षित है !

हालांकि भारतवर्ष के आदरणीय सन्त समाज को आने वाली किसी भी बड़ी आपदा के बारे में पूर्वाभास हो जाता है और वे ऐसी जानकारियां सिर्फ योग्य गम्भीर पात्रों को ही बताते हैं !

साधारण संसारी आदमी को ये समझ में नहीं आता की जब संतों को किसी बड़ी दुर्घटना का पूर्वाभास हो जाता है तो वे इसके बारे में सबको क्यों नहीं बताते जिससे भारी जन धन की हानि बचायी जा सके !

तो इसका उत्तर हमारे शास्त्र देते है की प्रकृति की हर गतिविधि, स्वयं परमेश्वर की इच्छा से ही होती है अतः अगर प्रकृति, अधर्म की वृद्धि पर क्रोधित होकर संहार करना चाहती है तो वो ऐसा कर के ही रहेगी !

प्रकृति अर्थात महामाया एकदम स्वतंत्र है और इसके काम में कोई बाधा नहीं डालता ! हाँ ये जरूर है की परमेश्वर जिसे चाहते है उसे प्रकृति के क्रोध से अछूता रखते है ! परमेश्वर के चाहने या ना चाहने की पूर्ण जानकारी भी सिर्फ परमेश्वर को ही पता होती है !

परमेश्वर के पास हजार तरीके हैं प्रकृति के ज्वलन्त क्रोध से किसी भी प्राणी की रक्षा करने की ! इसलिए असली जिंदगी में यह भी अक्सर देखने को मिलता है की भूकम्प आने पर, मजबूत घर में बैठा मजबूत आदमी भी घर के गिरने से मर जाता है जबकि मिटटी के बने कच्चे घर में रहने वाला दूध पिता बच्चा जिन्दा बच जाता है !

इसलिए भूकम्प जैसी स्थिति में जब सेकेंडों में ही वारे न्यारे हो जाते है, उस समय मानवी प्रयास जितना महत्वपूर्ण है उतना ही ज्यादा किस्मत भी महत्वपूर्ण हैं !

भूकम्प में बचाव के लिए मानवी प्रयासों के बारे में तो विस्तार से नीचे बताये गए हैं पर कुछ अध्यात्मिक प्रयास भी हैं जिनसे भूकम्प जैसे आकस्मिक विपत्ति में सहारा मिल सकता है !

सन्तान कितना भी नालायक, दुष्ट, पापी, नीच, गिरा हुआ इन्सान हो पर किसी मुसीबत के समय अपने पिता को मदद की लिए सच्चे दिल से पुकारे तो हर बाप का मन जरूर करता है अपने बेटे की मदद के लिए ! ठीक यही स्थिति परम पिता, अनन्त दयालु भगवान् के साथ भी है !

तो सबसे अच्छा यही होता है की जब भी भूकम्प आये तो उस समय नीचे लिखी सारी मानवीय सावधानियों का पालन करें, ईश्वर के लगातार नाम स्मरण के साथ ! और अपने परिवार के अन्य लोगों को भी ये बाते जरूर बतायें जिससे मुसीबत में वे भी अपनी रक्षा कर सकें !

आइये सबसे पहले जानते हैं की भूकम्प होता क्या है आज के वैज्ञानिकों की निगाह में –

भूकंप पृथ्वी की परत से ऊर्जा के अचानक उत्पादन के परिणाम स्वरूप आता है जो भूकंपी तरंगें उत्पन्न करता है। भूकंप का रिकार्ड एक सीस्मोमीटर के साथ रखा जाता है, जो सीस्मोग्राफ भी कहलाता है। एक भूकंप का क्षण परिमाण पारंपरिक रूप से मापा जाता है, या सम्बंधित और अप्रचलित रिक्टर परिमाण लिया जाता है ! 3 या कम परिमाण की रिक्टर तीव्रता का भूकंप अक्सर इम्परसेप्टीबल होता है और 7 रिक्टर की तीव्रता का भूकंप बड़े क्षेत्रों में गंभीर क्षति का कारण होता है।

जब एक बड़ा भूकंप अधिकेन्द्र अपतटीय स्थति में होता है, यह समुद्र के किनारे पर पर्याप्त मात्रा में विस्थापन का कारण बनता है, जो सूनामी का कारण है। भूकंप के झटके कभी-कभी भूस्खलन और ज्वालामुखी गतिविधियों को भी पैदा कर सकते हैं।

सर्वाधिक सामान्य अर्थ में, किसी भी सीस्मिक घटना का वर्णन करने के लिए भूकंप शब्द का प्रयोग किया जाता है, एक प्राकृतिक घटना या मनुष्यों के कारण हुई कोई घटना -जो सीस्मिक तरंगों को उत्पन्न करती है। अक्सर भूकंप भूगर्भीय दोषों के कारण माने जाते हैं, भारी मात्रा में गैस प्रवास, पृथ्वी के भीतर मुख्यतः गहरी मीथेन, ज्वालामुखी, भूस्खलन और नाभिकीय परिक्षण ऐसे मुख्य दोष हैं।

कुछ भौतिक मानवीय तरीके भूकम्प में सुरक्षा के –

– भूकंप के लिए हमेशा और हर वक्‍त तैयार रहना चाहिये। घर बनवाते वक्‍त हमेशा भूकंप की दृष्टि से मजबूत घर बनवाना चाहिये, ताकि भूकंप आने पर घर पर ज्‍यादा असर नहीं पड़े।

– घर में इस प्रकार सामान रखें कि आपदा के वक्‍त आप आसानी से बाहर निकल सकें। यह नियम ऑफिस में भी लागू होता है।

– मकान, दफ्तर या किसी भी इमारत में अगर आप मौजूद हैं तो वहां से फ़ौरन बाहर निकलकर खुले में आ जाएं पर लिफ्ट का इस्तेमाल ना करें ! ऐसी स्थिति में सीढ़ियों का इस्तेमाल ही सबसे सुरक्षित होता है !

– खुले मैदान की ओर भागें, भूकंप के दौरान खुले मैदान से ज्यादा सेफ (सुरक्षित) जगह कोई नहीं होती ! बिजली के तारों और खम्भों से बचकर खड़े रहें !

– घर में फर्स्‍ट एड किट हमेशा तैयार रखी चाहिये, भूकंप या किसी भी प्रकार की दुर्घटना के लिए !

– जैसे ही आपको भूकंप के तेज झटके महसूस हों, और आप बाहर निकलने की स्थिति में ना हों तो आप किसी मजबूत टेबल, बेड के नीचे बैठ जायें और कस कर पकड़ लें।

– जब तक झटके जारी रहें, तब तक एक ही जगह बैठे रहें। या जब तक आप सुनिश्चित न कर लें कि आप सुरक्षित ढंग से बाहर निकल सकते हैं।

– बड़ी अलमारियों से दूर रहें, यदि वो आपके ऊपर गिर गई तो आप चोटिल हो सकते हैं।

– यदि आप ऊंची इमारत में रहते हैं तो खिड़की से दूर रहें।

– यदि आप बिस्‍तर पर हैं तो वहीं रहें या उसके नीचे चले जाए और उसे कसकर पकड़ लें। अपने सिर पर तकिया रख लें।

– यदि आप बाहर हैं तो किसी खाली स्‍थान पर चले जायें, यानी बिल्डिंग, मकान, पेड़, बिजली के खंभों से दूर।

– यदि आप उस समय कार चला रहे हैं तो कार धीमी करें और एक खाली स्‍थान पर ले जाकर पार्क कर दें। तब तक कार में बैठे रहें, जब तक झटके खत्‍म नहीं हो जायें।

– घर की सभी बिजली स्विच को ऑफ कर दें |

– भूकंप के दौरान लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वो पैनिक (आतंक, भय) न मचाएं और किसी भी तरह की अफवाह न फैलाएं, ऐसे में स्थिति और बुरी हो सकती है !

– किसी भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त इमारत अथवा ढांचे से दूर रहें।

– भूकंप के बाद, मलबे के ढेर से अपने पैरों को बचाने के लिए जूते-चप्पल पहन कर रखें।

– पहले झटके के बाद, दूसरे झटके की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। कई बार बाद के झटके एक घंटे, दिन, सप्ताह और कई बार कुछ महीनों के बाद तक भी आ सकते हैं।

– मोमबत्ती या लालटेन की जगह टॉर्चलाइट का इस्तेमाल करें।

– जिस इमारत में आप रह रहे हैं, यदि वह भूकंप के बाद पूरी तरह सुरक्षित है तो आप अंदर रहें और रेडियो में दी जा रही सलाह सुनें।

– जमीन पर बिखरी हुई दवाइयां, ब्लीच, गैसोलीन व अन्य ज्वलनशील पदार्थों को तुरंत साफ कर लें। गैस सिलेंडर स्विच बंद करें।

– इलैक्ट्रिकल सिस्टम के किसी भी प्रकार के नुकसान से सावधान रहें। चिंगारी या टूटी हुई तारों से सावधान रहें। ऐसी स्थिति में मेन फ्यूज बॉक्स से इलेक्ट्रिसिटी बंद कर दें।

– इस स्थिति के लिए घर के सदस्यों को अवगत कराकर रखें कि यदि आप एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं, तो कहां संपर्क किया जा सकता है।

अपने घर में पीने के पानी की बोतलें, लंबे समय तक चलने वाले खाद्य पदार्थ, फर्स्ट-एड किट, टॉर्चलाइट, बैटरी ऑपरेटेड रेडियो, अतिरिक्त बैटरी के साथ हर समय रखें।

परिवार के सदस्यों को बिजली, गैस आदि उपकरणों के सही उपयोग की जानकारी दें। ऐसे स्थानों की भी जानकारी दें, जहां भूकंप के समय मौजूद रहना सुरक्षा की दृष्टि से बेहतर साबित हो सकता है।

भूकंप जैसी स्थितियों के बाद यह बहुत हद तक संभव है कि आपके आसपास के नेटवर्क में खराबी उत्पन्न हो जाए। ऐसी स्थिति में अपने जेब में, दूर शहर में रहने वाले कुछ दोस्त व रिश्तेदारों के फोन नंबर और पते अवश्य रखें, जिनसे मदद के लिए संपर्क किया जा सके। घर में छोटे बच्चों को भी इस संबंध में जानकारी अवश्य देकर रखें।

घर निर्माण के समय भूकंप रोधी उपायों का पालन करें। बिल्डिंग कोड के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए अच्छे कॉन्ट्रक्टर से संपर्क किया जा सकता है। घर के कमजोर भागों की मरम्मत कराकर उन्हें मजबूत कराएं।

नोट – भूकम्प डर से घिग्घी बधने का समय नहीं, बाहुबल दिखाने का समय है इसलिए डर से हाय तौबा में समय बर्बाद करने की बजाय खुद भी बचना चाहिए और दूसरों को भी बचाना चाहिए !

facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail


ये भी पढ़ें :-