बोल साचे दरबार की…. “जय”

· October 12, 2014

durga_faceशारदीय नवरात्रि वो महान दिन है जिसमें अम्बे देवी की थोड़ी सी भी शुद्धता पूर्वक भक्ति करने वाला बिना निहाल हुए नहीं रह सकता !

ये नौ दिन वही है जिसमे अति बलशाली भयानक राक्षस महिषासुर की अत्यंत दुःखदायी यातना से मुक्ति दिलाने के लिए महा देवी ने अपने महा रौद्र रूप में प्रकट होकर राक्षस महिषासुर को चीर फाड़ दिया था और अपने डरे हुए भक्तों को झोली भर भर के वरदान और आशीर्वाद दिया था !

दुनिया में बस एक माँ का रिश्ता ऐसा है जो कभी कमजोर नहीं पड़ा ! बेटा कितना भी नालायक हो माँ उसकी चिंता करना नहीं छोड़ती ! कभी कभी बेटे की गलत आदत सुधारने के लिए माँ उसे डाटती या मारती भी है पर उस डांट या मार का कई गुना दर्द बेटे से ज्यादा माँ को ही होता है !

उसी तरह देवी दुर्गा को तो पुराणों में महा माता कहा गया है क्योंकि ये अनन्त ममता मयी है !

हो सकता हो हमारे किसी पूर्व जन्म या इस जन्म के पाप की वजह से हम इस समय तकलीफ में हों पर अगर हम माँ को लगातार पुकारेंगे तो माँ कब तक अपने आप को रोक पायेगी ?

अब आज यही देखने का समय आ गया है आखिर जीत होती किसकी है, हमारे पुकारने की या दुर्गा माँ की अपनी ममता छुपाने के नाटक की !

देवी जगदम्बा सुन ले ध्यान से कि हम जो तुम्हारे असंख्य पाप किये हुए पुत्र हैं, आज अपने जन्म जन्म के पाप धोयेंगे और तुम्हे तो तब तक पुकारेगें जब तक शरीर में आखिरी सांस है, अब देखना यह है की तुम कब तक नाटक कर सकती हो की तुम हमें प्यार नहीं करती हो और हम जिए या मरे, हँसे या रोयें तुम्हे कोई फरक नहीं पड़ता हैं !

आज ये गारन्टी मुझसे ले लो माँ की तुझसे मेरी पीड़ा ज्यादा दिनों तक बर्दाश्त नहीं होगी और तू बहुत जल्द ही दौड़ कर मेरे पास आयेगी और मुझे अपनी अनन्त सुख दायी गोद में शरण देगी ! !

बोलिए सिंह वाहिनी माँ जगदम्बा की…….”जय”

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