बाल कहानिया – (लेखक – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)

· August 24, 2013

The_Reciting_Brahmanएक गधा लकड़ी का भारी बोझ लिए जा रहा था। वह एक दलदल में गिर गया। वहाँ मेढकों के बीच जा लगा। रेंकता और चिल्‍लाता हुआ वह उस तरह साँसें भरने लगा, जैसे दूसरे ही क्षण मर जाएगा।

आखिर को एक मेढक ने कहा, ”दोस्‍त, जब से तुम इस दलदल में गिरे, ऐसा ढोंग क्‍यों रच रहे हो? मैं हैरत में हूँ, जब से हम यहाँ हैं, अगर तब से तुम होते तो न जाने क्‍या करते?”

 

हर बात को जहाँ तक हो, सँवारना चाहिए। हमसे भी बुरी हालतवाले दुनिया में हैं।

 

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एक घड़ा मिट्टी का बना था, दूसरा पीतल का। दोनों नदी के किनारे रखे थे। इसी समय नदी में बाढ़ आ गई, बहाव में दोनों घड़े बहते चले। बहुत समय मिट्टी के घड़े ने अपने को पीतलवाले से काफी फासले पर रखना चाहा।

 

पीतलवाले घड़े ने कहा, ”तुम डरो नहीं दोस्‍त, मैं तुम्‍हें धक्‍के न लगाऊँगा।”

 

मिट्टीवाले ने जवाब दिया, ”तुम जान-बूझकर मुझे धक्‍के न लगाओगे, सही है; मगर बहाव की वजह से हम दोनों जरूर टकराएँगे। अगर ऐसा हुआ तो तुम्‍हारे बचाने पर भी में तुम्‍हारे धक्‍कों से न बच सकूँगा और मेरे टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे। इसलिए अच्‍छा है कि हम दोनों अलग-अलग रहें।”

 

जिससे तुम्‍हारा नुकसान हो रहा हो, उससे अलग ही रहना अच्‍छा है, चाहे वह उस समय के लिए तुम्‍हारा दोस्‍त भी क्‍यों न हो।

 

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एक गाड़ीवान अपनी भरी गाड़ी लिए जा रहा था। गली में कीचड़ था। गाड़ी के पहिए एक खंदक में धँस गए। बैल पूरी ताकत लगाकर भी पहियों को निकाल न सके। बैलों को जुए से खोल देने की जगह गाड़ीवान ऊँचे स्‍वर में चिल्‍ला-चिल्‍लाकर इस बुरे वक्‍त में देवताओं की मदद माँगने लगा कि वे उसकी गाड़ी में हाथ लगाएँ। उसी समय सबसे बली देवता महावीर गाड़ीवान के सामने आकर खड़े हो गए, क्‍योंकि उसने उनका नाम लेकर कई दफे उन्हें पुकारा था।

 

उन्‍होंने कहा, ”अरे आलसी आदमी! पैंजनी से अपना कंधा लगा, और बैलों को बढ़ने के लिए ललकार। अगर इस तरह गाड़ी नहीं निकली, तब तेरा काम देवताओं को पुकारना होता है। क्‍या तुम्‍हारे विचार में यह आता है कि जब तुम खड़े हो, उन्‍हें तुम्‍हारे लिए काम करना पड़ता है? यह अनुचित है।”

 

जो अपनी मदद करता है, ईश्‍वर उसी की मदद करते हैं।

 

 

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एक शेर एक रोज जंगल में शिकार के लिए निकला। उसके साथ एक गधा और कुछ दूसरे जानवर थे। सब-के-सब यह मत ठहरा कि शिकार का बराबर हिस्‍सा लिया जाएगा। आखिर एक हिरन पकड़ा और मारा गया। जब साथ के जानवर हिस्‍सा लगाने चले, शेर ने धक्‍के मारकर उन्‍हें अलग कर दिया और कुल हिस्‍से छाप बैठा।

 

उसने गुर्राकर कहा, ”बस, हाथ हटा लो। यह हिस्‍सा मेरा है, क्‍योंकि मैं जंगल का राजा हूँ और यह हिस्‍सा इसलिए मेरा है, क्‍योंकि मैं इसे लेना चाहता हूँ, और यह इसलिए कि मैंने बड़ी मेहनत की है। और एक चौथे हिस्‍से के लिए तुम्‍हें मुझसे लड़ना होगा, अगर तुम इसे लेना चाहोगे।” खैर, उसके साथी न तो कुछ कह सकते थे, न कर सकते थे; जैसा अकसर होता है, शक्ति सत्‍य पर विजय पाती है, वैसा ही हुआ।

 

 

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एक सौदागर समुद्री यात्रा कर रहा था, एक रोज उसने जहाज के कप्‍तान से पूछा, ”कैसी मौत से तुम्‍हारे बाप मरे?”

 

कप्‍तान ने कहा, ”जनाब, मेरे पिता, मेरे दादा और मेरे परदादा समंदर में डूब मरे।”

 

सौदागर ने कहा, ”तो बार-बार समुद्र की यात्रा करते हुए तुम्‍हें समंदर में डूबकर मरने का खौफ नहीं होता?”

 

”बिलकुल नहीं,” कप्‍तान ने कहा, ”जनाब, कृपा करके बतलाइए कि आपके पिता, दादा और परदादा किस मौत के घाट उतरे?”

 

सौदागर ने कहा, ”जैसे दूसरे लोग मरते हैं, वे पलंग पर सुख की मौत मरे।”

 

कप्‍तान ने जवाब दिया, ”तो आपको पलंग पर लेटने का‍ जितना खौफ होना चाहिए, उससे ज्‍यादा मुझे समुद्र में जाने का नहीं।”

 

विपत्ति का अभ्‍यास पड़ जाने पर वह हमारे लिए रोजमर्रा की बात बन जाती है।

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