प्रशांत किशोर का अभिमान गरुड़ की तरह है

· August 13, 2016

swseaजैसे एक बार भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ को घमण्ड हो गया था कि जो सबका बोझ उठाने वाले नारायण हैं उनका बोझ मै उठाता हूँ इसलिए मैं निश्चित रूप से अति विशिष्ट हूँ !

भगवान् को जब गरुड़ के मन में पैदा होने वाले घमण्ड का पता चला तो उन्होंने गरुड़ को अपने पास बुलाया और गरुड़ की पीठ पर अपना केवल एक हाथ रख दिया, तो उसी पल गरुड़ को भगवान् का हाथ इतना ज्यादा भारी लगने लगा कि उनका दम घुटने लगा और उन्हें लगा कि अगर भगवान् ने तुरन्त उनके ऊपर से अपना हाथ नहीं हटाया तो उनकी मौत हो जायेगी !

गरुड़ की ऐसी अत्यंत दयनीय स्थिति देखकर भगवान् विष्णु ने तुरन्त अपना हाथ गरुड़ के ऊपर से हटा लिया !

तब गरुड़ को समझ में आया कि भगवान् ने उनके मन में आये दंभ के नाश के लिए ही ऐसी लीला की थी !

अपनी गलती का अहसास होने पर उन्होंने भगवान् से माफ़ी मांगते हुए कहा कि सच है प्रभु, कि केवल अपने वाहन होने का सम्मान देने के लिए आपने मुझे अपना वाहन बनाया है अन्यथा मै आपका नहीं, बल्कि आप ही मेरा बोझ उठाते हैं और मेरा ही क्या इस पूरे पृथ्वी मंडल और समूचे ब्रह्माण्ड को भी आपने ही धारण किया है !

ठीक इसी तरह मोदी जी को आगे करके भारतीय जनता पार्टी जब लोक सभा चुनाव लड़ रही थी तो उसके चुनाव प्रचार में बहुत से लोगों ने अथक मेहनत की थी ! उस चुनाव प्रचार में कुछ लोगों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण और शक्तिशाली थी जिसमे बाबा रामदेव, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, कुछ सच्चे साधू संत और सामाजिक संगठन आदि प्रमुख थे ! इन्होने ज़मीनी स्तर पर काम किया और इनके अत्यधिक परिश्रम और त्याग का ही परिणाम था वो अभूतपूर्व और ऐतिहासिक जनादेश जिसकी बदौलत आज शीर्ष पद पर नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी विराजमान हैं और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा भी रहे हैं ! पर बिकाऊ और मूर्ख मीडिया ने मोदीजी की जीत का सारा क्रेडिट दे दिया प्रशांत किशोर जैसे नौसिखिये विश्लेषक (Analyst) को !

खुद मोदी जी के ईमानदारी से गुजरात में किये गए हजारों अभूतपूर्व कामों की वजह से उनकी प्रसिद्धि भारत के छोटे से छोटे गाँवों में भी पहुँच रही थी क्योंकि मोदी जी ने गुजरात के छोटे से छोटे गाँव की तरफ भी विकास रुपी नदी की धारा को मोड़ दिया था !

ऊपर से बाबा रामदेव का साथ जिनके संगठन की पहुँच आर. एस. एस. की ही तरह भारत के लगभग हर जिले में हो गयी थी और इन सब के साथ साथ भारतवर्ष का भाग्य उस समय करवट ले रहा था जिसे ऐसे ही असाधारण पुरुषार्थों कि आवश्यकता थी, तो मोदी जी को तो लोक सभा जीतना ही था पर बिकाऊ मीडिया को तो कोई भी सही बात दिखाने में पेचिश पड़ने लगती है इसलिए हर बार की तरह बिकाऊ मीडिया ने कोशिश की बाबा रामदेव, मोदीजी आदि लोगों की लोकसभा में जीत दिलाने की भूमिका को छिपाकर प्रशांत किशोर को असली हीरो बनाने में !

भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली, पश्चिम बंगाल और बिहार में हुई हार और प्रशांत किशोर द्वारा बिहार में नितीश कुमार का साथ देकर उन्हें जीत दिलाने की घटना से कुछ लोगों को बोलने का मौका मिल गया कि सही में प्रशांत किशोर चमत्कारी आदमी हैं और जिससे जुड़ जाते हैं उसे जीता कर ही छोड़ते हैं !

दिल्ली और बिहार में क्यों भाजपा के विपक्षी दल जीत गए, अब धीरे धीरे इसकी असली वजह आम जनता को पता लगने लगी है क्योंकि अब वहां की बहुसंख्यक आम जनता को अपने निर्णय पर बहुत पछतावा होने लगा है !

दिल्ली में चुनाव जीतने के लिए केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से कई चमत्कारी वायदे किये थे जैसे बिजली बिल, पानी, इन्टरनेट, शिक्षा आदि लगभग मुफ्त जितनी सस्ती कर देंगे, खूब नौकरियां देंगे, ये देंगे, वो देंगे आदि आदि पर चुनाव जीतने के बाद जनता को दिया सिर्फ रोज रोज नए नए ड्रामे का तकलीफदेह मनोरंजन !

असल में अन्दर की बात यही सुनने को मिलती है कि खानदान विशेष की पार्टी की लोक सभा में हुई जबरदस्त हार से उस पार्टी को यह तो समझ में आ गया था कि जनता के बीच में उनका तुरंत कम बैक होना असम्भव है लेकिन उन्हें मोदी जी के तेजी से बढ़ते जनाधार को भी हर हाल में रोकना था इसलिए खानदान विशेष की पार्टी ने बिहार, दिल्ली और पश्चिम बंगाल की मोदी विरोधी पार्टियों से अंदरूनी गठजोड़ करके और उन्ही पार्टियों को आगे करते हुए उन्होंने अथाह पैसा खर्च किया मोदी जी का विजय रथ रोकने के लिए !

इन तीनों प्रदेशों में चुनाव के बाद वहां के कई निवासियों की आपबीती सुनने को मिली कि हमारे मोहल्ले में तो विजयी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा इलेक्शन पीरियड में सरेआम वोटर्स के पूरे परिवार को ही मुहं माँगा पैसे देकर खरीद लिया जा रहा था और साथ ही साथ कई तरह की काल्पनिक अफवाहें भी फैलाई जा रही थी खासकर अल्पसंख्यक समुदाय में कि मोदी आ गया तो तुम सब खतरे में पड़ जाओगे आदि आदि !

इस कलियुग का यही सिद्धांत है कि बुरे लोग जितनी मेहनत अपनी तरक्की में नहीं करते, उससे कहीं ज्यादा मेहनत अच्छे लोगों को बर्बाद करने में करते हैं !

माना कि मोदी जी अपनी ही पार्टी में बैठे कुछ आस्तीन के साँपों की वजह से काला धन, गो हत्या निषेध क़ानून आदि जैसे वायदे अभी तक नहीं पूरे कर पायें हैं लेकिन उन्होंने केंद्र में रहकर अब तक जो जो भी अभूतपूर्व विकास के काम किया है उसे लाल बहादुर शास्त्री के अलावा किस किस प्रधानमंत्री ने किया है ?

इस अगस्त प्रथम सप्ताह में उदय हुए महामारक नक्षत्र की वजह से जो हर तरह के विनाश (युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं आदि) के बादल भारत समेत पूरे विश्व पर मंडरा रहें हैं उन परिस्थितियों में भारत में अगर पूर्वकाल की तरह कोई दब्बू प्रधानमंत्री होता तो भारत को उसके धूर्त पड़ोसी (चीन, पाकिस्तान आदि) और घरेलु समस्याएं पूरी तरह से बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ते !

dsdsdयह प्रशांत किशोर की खुश किस्मत थी कि जब वे अपना कैरियर, एक चुनाव विश्लेषक के रूप में बनाना शुरू कर रहे थे तो उन्हें सबसे पहले मोदी जी का साथ देने का सौभाग्य मिल गया जिसकी वजह से उन्हें शुरू में ही 99 की सीढ़ी मिल गयी पर जब कोई सफलता के भ्रामक नशे में आकर सत्य का साथ छोड़कर पूरी तरह से बिकाऊ हो जाय और देशप्रेम जैसे मुद्दों को दरकिनार करते हुए सिर्फ पैसे का गुलाम बनकर किसी भी पार्टी का साथ देने को तैयार हो जाय तो उसका भविष्य उसी तरह हो जाता है जैसे चार दिन की चांदनी फिर अँधेरी रात !

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