देवी चंद्रघंटा के घंटे की ध्वनि से प्रेत पिशाच भूत राक्षसों में खलबली मच जाती है

· March 3, 2015

552014_09_27_03_13_54_maa-durga6माँ चन्द्र घंटा की आराधना से समाज में रुतबा बढ़ता है ! इनका भक्त जहाँ भी जाता है उसे विशेष सम्मान मिलता है !


Complete cure of deadly disease like HIV/AIDS by Yoga, Asana, Pranayama and Ayurveda.

एच.आई.वी/एड्स जैसी घातक बीमारियों का सम्पूर्ण इलाज योग, आसन, प्राणायाम व आयुर्वेद से

देवी चन्द्रघंटा के घंटे की आवाज जहाँ भक्तों को परम सुख दायी लगती है वहीँ इस तेजस्वी ध्वनि से दानव, अत्याचारी, दैत्य, राक्षस डर से कांपने लगते हैं !

देवी का ध्यान इस प्रकार है –

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥

पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

शब्द चंद्रघंटा का संधिविच्छेद इस प्रकार है की चंद्र का अर्थ है चंद्रमा और घंटा का अर्थ है ध्वनि करने वाला घंटाकर्ण अर्थात जिन देवी के मस्तक पर घंटा (घंटीनुमा) आकार का चंद्रमा विराजमान है वही हैं मां चंद्रघंटा ।

इनके शरीर का रंग सुनहला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए सदैव तत्पर रहने की है।

देवी चंद्रघंटा की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाई देने लगती हैं।

इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। इनके घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों को प्रेतबाधा से रक्षा करती है। इनका ध्यान करते ही शरणागत की रक्षा के लिए इस घंटे की ध्वनि निनादित हो उठती है।

माँ का स्वरूप अत्यंत प्यारा है। इनकी पूजा से बहादुरी के साथ प्रेम का विकास होता है।

अतः हर देवी भक्त को देवी चंद्रघंटा की आराधना विधिवत करनी चाहिए और देवी के चरणों में खूब बढियां खाने पीने का सामान चढ़ाकर गरीबों को दोनों हाथों से बाटना चाहिए !

facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail


ये भी पढ़ें :-