जानिये जीव की मृत्यु के बाद की हाहाकारी यात्रा के बारे में

मृत्यु एक ऐसी चीज है जिसको आदमी दूसरों के साथ होते हुए देखने पर भी लगातार यही सोचता है की उसकी मौत में तो अभी काफी समय बचा है ! जबकि इस कलियुग में आयु की कोई निश्चित समय सीमा तो है नहीं ! अक्सर देखने को मिलता है की बच्चा पैदा होते ही मर जाय या 60 – 70 साल जी कर मरे ! मरने का कोई कारण भी फिक्स नहीं है मतलब कब अचानक से कोई बीमारी पैदा हुई या एक्सीडेंट हुआ और आदमी कुछ ही दिनों में संसार की सारी नौटंकी छोड़ कर राख या मिटटी में बदल गया !

जब तक जिये आदमी, संसार के नाटक को ही एकदम असली मानकर जूझता रहता है पर मृत्यु नाम की राक्षसी जब चलती है तो बिना आदमी को खाए नहीं लौटती !

मृत्यु को लेकर कुछ रहस्यमय प्रश्न भी उठतें है की क्या वाकई, मृत्यु के समय व्यक्ति को कोई दिव्य दृष्टि मिलती है ? आखिर मृत्यु के कितने दिनों बाद, आत्मा यमलोक पहुंचती है ?

गरुण पुराण में, भगवान के वाहन श्री गरुण देव, भगवान श्री विष्णु से मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति को लेकर प्रश्न उठाते हैं ! वह पूछते हैं कि मृत्यु के बाद, आत्मा की गति के बारे में ? इसका उत्तर भगवान श्री विष्णु ने, गरुण पुराण में दिया है। गरुण पुराण में, मृत्यु के पहले और बाद की स्थिति के बारे में बहुत विस्तार से बताया गया है !

गरुण पुराण के अनुसार, मृत्यु से पहले, मनुष्य की आवाज चली जाती है। जब अंतिम समय आता है, तो मरने वाले व्यक्ति को दिव्य दृष्टि मिलती है ! इस दिव्य दृष्टि के बाद, मनुष्य, सारे संसार को, एक रूप में देखने लगता है। उसकी सारी इंद्रियां शिथिल हो जाती हैं।

गरुण पुराण के अनुसार, अगर मरने वाला पापी है तो मृत्यु के समय 2 अति भयंकर दिखने वाले यमदूत आते हैं। यमदूतों के डर से अंगूठे के बराबर जीव, हा हा की हाहाकारी आवाज़ करते हुये, मरे हुए शरीर से बाहर निकलता है। यमराज के दूत, जीवात्मा के गले में पाश बांधकर, उसे महा भयानक नगरी यमलोक की ओर ले चल पड़ते हैं। जीव का सूक्ष्म शरीर, यमदूतों के डर से काँपता और रोता हुआ और तरह तरह के कष्ट भोगते हुए आगे बढ़ता है !

यमलोक पहुंचने पर, पापी जीव को उसके कर्म के अनुसार दंड या महा दंड मिलता है !

काफी समय यातना भोगने के बाद, उसे विभिन्न योनियों में नया शरीर मिलता है।

संसार के बड़े से बड़े बाहुबली, ताना शाह और अमीर आदमी भी अगर पापी हैं तो मृत्यु के ठीक सामने पहुचने पर भिखारी की तरह रो रोकर जान की भीख मांगने लगते हैं ! तो जब सबको पता है की मृत्यु के सामने सबको पहुचना है तो मृत्यु के सामने पहुँचने की पहले से कुछ तैयारी क्यों नहीं की जाती है !

शास्त्र कहते हैं की किसी को अगर तुरन्त मरने से डर लग रहा है तो इसका मतलब है अभी तक उसके मरने की तैयारी पूरी नहीं है मतलब वो मृत्यु नामक सबसे बड़े, सबसे इम्पॉर्टेंट (महत्वपूर्ण) और सबसे आखिरी एग्जाम (इम्तिहान, परीक्षा) को अच्छे नंबरों से पास करने की क्षमता नहीं रखता है ! बहुत कम ही लोग ऐसे होते हैं जो अपनी मेहनत (कड़े सेवा धर्म) से अपने आप को मृत्यु के भय से मुक्त कर पाते हैं !

मृत्यु नामक सबसे बड़े इम्तिहान को सुख पूर्वक पास करने के कई तरीके दिए गए हैं हमारे परम आदरणीय हिन्दू धर्म में !

इन तरीकों में से कई तरीकों के बारे में लोगों को गलत फहमियां हैं ! जैसे कई लोगों का कहना है की सिर्फ भगवान की रोज थोड़ी देर पूजा कर लेने भर से मरने के बाद आदमी को कष्ट नहीं भोगना पड़ता है ! तो इस हिसाब से तो कई भ्रष्ट अधिकारी नेता व्यापारी हैं जिन्होंने अपने जीवन में दूसरों का हक़ बहुत बार मारा है और भगवान की पूजा भी की है और अचानक से किसी बीमारी या एक्सीडेंट से मर गए हैं तो क्या उन्हें अपने पापों का दंड नहीं भोगना पड़ा होगा ? ऐसा बिल्कुल नहीं है क्योंकि भगवान तो खुद कहते हैं की कुछ पाप ऐसे जघन्य होते हैं जिनका प्रायश्चित सिर्फ दूसरों की सेवा से ही हो सकता है ! दूसरों की सेवा में लगातार मन लगा रहे इसके लिए भगवान का स्मरण, पूजा, नाम जप या मन्त्र जप, भजन आदि भी बहुत जरूरी होता है, पर पत्थर के भगवान या हमेशा गायब रहने वाले भगवान की पूजा से भी बहुत बहुत बहुत बढ़कर होता है जिन्दा भगवान की पूजा करना !

और जिन्दा भगवान होते कहाँ है ?

कई जगह बताई गयी है जहाँ जिन्दा भगवान मिलते हैं जैसे माँ के अन्दर, पिता के अन्दर, अपने बुजुर्गों के अन्दर, गरीब के अन्दर, बीमार के अन्दर, हर ऐसे दुखी परेशान और जरूरतमन्द आदमी के अन्दर जो अपनी तकलीफ से घुट घुट कर मर रहा हो !

मंदिर में रोज की 15 से 30 मिनट की पूजा पर्याप्त होती है दिमाग से गन्दे विचारों को हटाकर साफ़ सुथरे विचार पैदा करने के लिए !

पर जिन्दा भगवान की थोड़ी सी पूजा या यों कहें सेवा महा पुण्य दायी होती है जिससे बुरी किस्मत बहुत तेजी सुधरती है !

कुछ देर के लिए मान लीजिये की आप एक बेहद ईमानदार और संतोषी आदमी हैं, तथा आप किसी दूसरे आदमी से नाराज हों और वो आदमी आपकी नाराजगी दूर कर आपको खुश करने के लिए आपको सोने का मुकुट चढ़ाये, स्वादिष्ट मिठाइयाँ खिलाये या आपके पैर में नोटों की गड्डी रखे तो क्या आप इन सब चीजों से खुश हो जायेंगे ? और हद तो तब हो जाती है जब आप जैसे ईमानदार आदमी को खुश करने के लिए वह आदमी बेईमानी के धन का सोना चांदी चढ़ाता है !………अब अगर वही आदमी आपको खुश करने के लिए आपके बजाय, आपके ही गरीब बेटे के दुःख दूर करने का प्रयास करे तो निश्चित ही आपकी नाराजगी उस आदमी के लिए धीरे धीरे कम होने लगेगी !

ठीक यही स्थिति भगवान के साथ भी तो होती है मतलब भगवान के ही बनाये सोना चांदी हीरा मोती रुपये पैसे आदि सब कुछ है तो फिर उन्ही की चीज उन्ही को देकर लोग कौन सा कमाल कर देते हैं ! कमाल तो तब होता है जब उसी रूपए पैसे से भगवान के किसी भूखे लड़के के पेट में खाना जाता है या किसी बीमार लड़के का इलाज होता है !

हमेशा याद रखने वाली बात है की अब तक करोड़ो मूर्ख लोगों ने इस पृथ्वी की जमीनों को अपना होने का दावा किया पर वो सब के सब उसी जमीन में दफ़न हो गए !

इस दुनिया में कोई भी चीज किसी के जोर से नहीं टिकी है पर जब तक वो उसके पास है तब तक वो उससे दान, सेवा कर महा पुण्य जरूर कमा सकता है !

नारद पुराण के अनुसार, सेवा धर्म का कड़ाई से अपने जीवन में पालन करने वाला आदमी जब मरता है तो उसके मरने पर यमराज के भयंकर दूत नहीं भगवान् के अति सुन्दर गण आते हैं और उसे बहुत आदर सम्मान से दिव्य विमान पर बैठाकर भगवान के लोक ले जाते हैं जहां वो कल्पना से भी परे परम सुख को प्राप्त करता है !

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