जरा गौर से पहचानिए इन आँखों को

· September 11, 2015

imagesprabhupada_4कुछ लोग कहते हैं कि आज के आधुनिक युग में भगवान, ईश्वर आदि सब झूठ बातें हैं, और भगवान के बारें में जो कुछ भी कहा सुना या लिखा गया है सब पुराने ज़माने की काल्पनिक मनगढ़ंत कहानियां हैं !


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ठीक है ! कुछ देर के लिए सही मान लेते है इन बातों को, तो पिछले कुछ वर्षों में ये लोग जो पैदा हुए, उनके बारें में क्या कहेंगे ?

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ये लोग, जो अपने व्यक्तिगत मुददों पर अधिकांश समय चुपचाप रहते थे, अधिकांश समय आंखे बंद रखते थे या आंखे खुली होने पर भी भौतिक संसार उन्हें आकृष्ट नहीं कर पाता था, अधिकांश समय अकेले में ही रहना पसंद करते थे व भीड़ में घिरे होने पर भी एकांत सेवी ही होते थे, स्वादिष्ट खाना पीना अच्छा कपड़ा पहनना अच्छे बिस्तर पर सोना अच्छे घर में रहना आदि किसी भी चीज में कोई रुचि नहीं रखते थे, टी वी, सिनेमा देखना तो बहुत दूर की बात थी, जो सबके सगे होने के बावजूद किसी के सगे नहीं थे (मतलब प्रेम के बंधन में थे लेकिन मोह के नहीं), जो किस लिए जी रहें हैं यह साधारण संसारी गृहस्थ लोगों को समझ में आता ही नहीं था !

पर घनघोर आश्चर्य की बात है की, संसार और संसारी चीजों के बीच रहते हुए भी, दुनिया के हर सुख ऐशो आराम और रिश्तों से आतंरिक उदासीनता और दूरी बना कर रखने वाले ये लोग 24 घंटा मुस्कुराते हुए दिखते थे !

1download-6आखिर ये कैसे संभव है ?

एक सामान्य आदमी जो सोचता है कि एक खुशहाल जिंदगी जीने के लिए जिन जिन चीजों की जरूरत है उन उन चीजों में से किसी भी चीज से तो इनका लगाव नहीं था चाहे हम बात करें रूपए पैसे मकान जमीन गाड़ी एसी फर्नीचर गहने सोना चांदी आदि किसी भी चीज की !

कोई इनका भक्त इनसे प्रार्थना करके, इन्हें पैदल अपने घर ले जाय या गाड़ी पर, इन्हें कोई फरक नहीं पड़ता था ! कोई भक्त इन्हें खाने के लिए सिर्फ सूखा आटा दे या मिठाई इन्हें कोई फरक नहीं पड़ता था !

अच्छा एक बात और, ये लोग सनकी भी नहीं थे क्योंकि जब भी कोई इनसे कुछ पूछता तो ये उसका जवाब बहुत बुद्धिमान पूर्ण तरीके से देते और इतना ही नहीं, हर बार लोगो ने महसूस किया की इनकी वाणी पर तो साक्षात् जगदम्बा सरस्वती विराज रही हैं क्योकि ये जो भी कह रहें है वो सब सच साबित oiuहोता जा रहा है !

दुनिया का कोई भी विषय ऐसा नहीं था जिनके बारे में इन्हें पता नहीं होता था !

इनके साधारण से दिखने वाले शरीर में इतनी ताकत थी की कोई भी दूसरा आदमी इनके शरीर का थोडा सा स्पर्श पा जाय तो उसके ना जाने कितने दुर्भाग्य जल जाते थे, इनकी नजरों में इतना तेज था की देखने भर से बड़ी से बड़ी बीमारी के दर्द में आराम पहुंचा देंते थे, इनके चरणों में इतना शक्ति थी कभी किसी घर में चरण रख दें तो उस घर में से कलह झगड़े दरिद्रता बाहर निकल जाते थे !

 

तो प्रत्यक्ष रूप से कुछ नहीं करते दिखाई देने वाले, पर सब कुछ कर सकने की महा शक्ति रखने वाले इन लोगों downloadमें ये क्षमता कहाँ से आयी ?

images-11संसार के किसी भी आदमी में थोड़ी भी जादुई ताकत आ जाय तो वो तुरन्त उसका प्रदर्शन दूसरे लोगों के सामने शुरू करके दौलत शोहरत कमाने के चक्कर में पड़ जायेगा, पर ये लोग ऐसे थे जिन्हें अपनी इन शक्तियों को जग जाहिर करने में भी कोई रुचि थी ही नहीं, इन्हें तो बस, जैसे किसी चुम्बक ने खींच रखा था

वो चुम्बक भी कितना शक्तिशाली और मनमोहक था कि संसार की सभी आकर्षक चीजें इन्हें बकवास लगती थी !

वो चुम्बक कुछ और नहीं स्वयं साक्षात् ईश्वर हैं जिनका दर्शन हो जाने के बाद तो पूरा जीवन ही बदल जाता है ! साधारण आदमी जिस तरह जिंदगी जीने के बारे में सोचते हैं वो इन लोगों को बच्चों का तरीका लगता था !

इनमें से किसी को ईश्वर के माँ काली रूप के दर्शन हुए तो किसी को माँ गायत्री रूप के, किसी vhhjghgyu-300x200को माँ तारा के दर्शन हुए तो किसी को श्री राधा कृष्ण रूप के ! किसी को श्री शिव के रूप में दर्शन हुआ तो किसी को श्री राम के रूप में !

पर जिस जिसको भी दर्शन हुए उन सब ने हर्ष से गगन भेदी महा उद्घोष किया, नेति नेति अनिर्वचनीय अनिर्वचनीय !

अर्थात प्रभु आपके दर्शन का सुख इतना ज्यादा है की उसे वाणी से बयान ही नहीं किया जा सकता !

वैसे तो भारत माँ की पवित्र भूमि अनन्त काल से ऐसे दिव्य योगियों सन्यासियों का प्रिय घर रही है जिन्हें साक्षात् भगवान के दर्शन हुए हैं, पर ऐसे महान साधु संतों को साधारण संसारी लोगों द्वारा देख पाना, मिल पाना या बात कर पाना भी, बिना ईश्वरीय कृपा के संभव नहीं हैं ! !

lokpagal-baba-temple-300x225यह बड़ी उत्सुकता और आश्चर्य का विषय है कि अनन्त ब्रह्मांडो को बनाने वाले भगवान वास्तव में दिखते कैसे होंगे ?

सुना है कि भगवान जब सही में सामने आकर खड़े हो जाते हैं तो शरीर के रोम रोम में, ख़ुशी के ज्वालामुखी का महा विस्फोट होता है !

ईश्वर दर्शन के बाद जीव को समझ में आता है की अब तक वो कौन सी व्यर्थ जिंदगी जी रहा था और अब वो कौन सी परम दिव्य और महा सुखी जिंदगी जी रहा है !

तो क्या हमें भी ईश्वर दर्शन के लिए अपने जीवन में एक बार पूरा प्रयास नहीं करना चाहिए, और बिना इस ख़ुशी के महा समुद्र में नहाये पूरी जिंदगी रोजी रोटी के जुगाड़ में बिता कर ही मर जाना चाहिए ?

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