जब प्राण घातक संकट चारो तरफ से घेर ले

ploवैसे तो “होए वही जो राम रची राखा”, पर आदमी को बेहद कठिन परिस्थिति पड़ने पर भी उससे बाहर निकलने का प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिए !

संसार की हर बड़ी से बड़ी मुसीबत को आदमी अपनी कोशिशों से कुछ न कुछ स्तर तक जरूर हल कर सकता है पर हर आदमी के जीवन में कभी कभी ऐसा खून के आंसू रुलाने वाला भयंकर समय आता है, जब सारे मानवीय प्रयास मौन पड़ जाते हैं और आदमी अपने आप को सिर्फ किस्मत के हाथों का बेबस खिलौना भर महसूस करता है, तथा लाचारगी से किस्मत का फैसला आने का इन्तेजार करता है !

ये खतरनाक प्राण घातक समय कभी भी, कहीं भी और किसी भी रूप में सामने धमक सकता है, जैसे किसी का कोई अपना हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होकर जिंदगी मौत के बीच जूझ रहा हो !

ऐसे बेहद कठिन समय में आदमी की किस्मत बहुत निर्दयी फैसला भी ले सकती है क्योंकि किस्मत के मन में क्या है ये किस्मत ही जानती है !

पर क्या कोई तरीका है, किस्मत को क्रूर फैसला लेने से रोकने के लिए !

किस्मत का रूख अचानक से मोड़ने की ताकत अगर किसी में है, तो है ईश्वर की कृपा में !

ऐसे मौके पर जितना ज्यादा हृदय से ईश्वर को याद किया जाता है उतना ज्यादा कृपा का अनुभव होता है !

वैसे तो “हारे को हरि नाम” ही पर्याप्त है पर ईश्वर के अलग अलग अवतारों की अलग अलग लीलाओं से सम्बंधित मन्त्रों से अलग अलग विशेष उद्देश्यों की पूर्ती होती है !

सन्त जनों के आशीर्वाद स्वरुप प्राप्त जानकारी के अनुसार प्राण घातक संकट पड़ने पर श्री हनुमान चालीसा का निम्नलिखित मन्त्र बहुत ही चमत्कारी और बहुत तेज गति से फायदा प्रदान करने वाला है !

ये मन्त्र है –

“लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुवीर हरषि उर लाये”

{ इस बेहद शक्तिशाली मन्त्र में यही भावना है कि जैसे युद्ध में घायल प्रभु श्री राम के छोटे भाई, श्री लक्ष्मण बेहोश होकर तेजी से मृत्यु की तरफ बढ़ रहे थे पर महाबली हनुमान जी ने धरती पाताल एककर संजीवनी नाम की जड़ी बूटी लाकर श्री लक्ष्मण को फिर से एकदम स्वस्थ कर दिया और भगवान श्री राम को अपार सुख प्रदान किया, ठीक उसी तरह हमारा परिजन (जो बीमारी – चाहे कैंसर लास्ट स्टेज, एड्स, हार्ट अटैक या कोई भी अन्य खतरनाक बीमारी हो या एक्सीडेंट से घायल होकर) बेहोश पड़ा है कृपया उसे भी जल्द से जल्द ठीक करिये }

जपने का तरीका –

ploइस मन्त्र को बीमार या घायल आदमी खुद जपे तो जल्दी फायदा मिलेगा पर अगर बीमार या घायल आदमी खुद जपने में सक्षम ना हो तो उसकी जगह उसका कोई भी परिचित आदमी या औरत जो शुद्धता और सही उच्चारण से जपने में सक्षम हो, जप सकता है !

जप करना बहुत ही आसान है ! इसमें बस शुरू में श्री हनुमान जी से प्रार्थना करनी होती है कि भगवान् मै उस आदमी (जिसकी बीमारी या चोट ठीक करनी हो) की बीमारी या चोट से बहुत दुखी और परेशान हूँ इसलिए कृपया उस आदमी के शरीर को जल्द से जल्द स्वस्थ और निरोगी बनाइये !

जपते समय जपने वाले की रीढ़ की हड्डी सीधी रहे तो बेहतर होता है (सीधे लेटकर भी जप किया जा सकता है), और जप जितना ज्यादा मात्रा में होगा उतना जल्दी फायदा मिलेगा पर ज्यादा जपने के चक्कर में गलत नहीं जपना चाहिए !

अगर कोई बहुत बीमार, बूढ़ा या घायल हो तो उसके ऊपर कोई नियम – परहेज आदि लागू नहीं होता और वो कभी भी जप कर सकता है ! लेकिन कोई अपेक्षाकृत ठीक शारीरिक अवस्था में हो तो उसके द्वारा इस मन्त्र को जपते समय उसके शरीर पर चमड़े का कोई सामान (जैसे – बेल्ट आदि) नहीं होना चाहिए और लैट्रिन, पेशाब व खाना खाते समय भी नहीं जपना चाहिए, बाकि हर समय जप सकते हैं !

भगवान के नाम और भगवान के मन्त्र, दोनों के जप में अन्तर होता है ! भगवान के नाम का जप कहीं भी, बिना शुद्ध अशुद्ध अवस्था का परहेज किये किया जा सकता है जबकि भगवान के मन्त्र का जप अशुद्ध जगह (जैसे – लैट्रिन, पेशाब, जूठे मुंह, चमड़े का स्पर्श, पत्नी पति के साथ रति क्रिया आदि) पर नहीं करना चाहिए ! लेकिन बहुत बीमार, बूढ़े या घायल होने पर कोई नियम – परहेज आदि लागू नहीं होता ! पर एक बात का परहेज सभी पर लागू होता है, और वो है कि भगवान के किसी भी नाम या मन्त्र का गलत उच्चारण नहीं करना चाहिए नहीं तो फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है !

जप के अन्त में भगवान् हनुमान जी से माफ़ी मांगना चाहिए की मुझसे जानबूझकर और अनजाने में जो कुछ भी गलतियाँ हो गयी हैं कृपया उन सब के लिए मुझे माफ़ करिए !

सामान्य आदमी भी इस मन्त्र को रोज जपे तो हनुमान जी उसे हर तरह की खतरनाक बिमारियों और हर तरह की खतरनाक मुसीबतों से बचाते हैं !

ध्यान रहे की श्री हनुमान जी परम सत्व गुण के देवता हैं इसलिए जप करने वाले को खुद, तामसिक भोजन मतलब मांस, मछली, अंडा, शराब, बियर आदि का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए और ना ही ऐसे मार्केट में मिलने वाले सामान जिसमें ये सब मिले होने की सम्भावना हो (जैसे – पिज्जा, बर्गर, चाकलेट, नूडल्स, कॉस्मेटिक, लिपस्टिक, डीयो आदि) का सेवन या इस्तेमाल करना चाहिए !

जप शुरू करने से पहले और अन्त में एक बार श्री राम सीता जी को नमस्कार करना नही भूलना चाहिए !

[नोट – कुछ लोगों को संदेह होता है की स्त्रियाँ, हनुमान जी का मन्त्र जप सकती हैं की नहीं ? तो इसका उत्तर है की स्त्रियाँ बिल्कुल, बेधड़क हनुमान जी का मन्त्र तथा चालीसा आदि का जप कर सकती हैं ! हनुमान जी, शिव जी के ही अवतार है और भगवान् के लिए स्त्री और पुरुष समान रूप से स्वीकार्य हैं ! शरीर की हर प्रक्रिया भगवान् के द्वारा ही बनायीं गयी है इसलिए केवल शरीर की सरंचना के आधार पर कोई योग्य और अयोग्य नहीं हो सकता है ! हनुमान जी की आराधना में केवल एक मात्र परहेज है तामसिक भोजन को खाना, बाकि स्त्री हो या बालक, हनुमान जी की हर पूजा को बेहिचक कर सकता है]

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