गैस, गठिया, कब्ज, अतिसार, खांसी-कफ, रक्त, ह्रदय, डायबिटिज, नशा, ज्वर रोगों में फायदा अमरुद

3282570419_9b5d0c368d_bदुनिया में ऐसे विचित्र लोग भी हैं जो चीजों के दाम के आधार पर उसके फायदे को तय करते हैं ! मतलब ज्यादा महंगी चीज हो तो ज्यादा फायदा करेगी और कम महंगी चीज हो तो कम फायदा करेगी ! फलों, अनाज और सब्जियों के सड़ने से होने वाले नुकसान को कम से कम करने के लिए आजकल के व्यापारी लोग जो भयानक खिलवाड़ कर रहें है इन खाने वाले चीजों पर जहरीले कीटनाशक, रंग और पॉलिश लगा कर, उस हिसाब से अमरुद सबसे सुरक्षित माना जा सकता है !

साधारणतया अमरुद इन सब हानिकारक चीजों से बचा रहता है क्योंकि ये सस्ते दाम में हर जगह उपलब्ध हो जाता है और इस पर कीटनाशक या रंग लगाने का खर्चा करने से दुकानदारों का प्रॉफिट और कम हो जाता है !

और रही बात स्वास्थ सम्बन्धी फायदे की तो, अमरुद फायदे में किसी मामले में सेब या अन्य किसी महंगे फल से कम नहीं बल्कि कुछ मामले में तो इसके आगे दुनिया का कोई फल नहीं टिकता ! इस हिसाब से तो ये मानवों के लिए ईश्वर का बेशकीमती तोहफा ही है इसलिए पूरे सीजन भर 1 अमरुद का सेवन नियमित करना ही करना चाहिए !

अमरूद में प्रोटीन 10.5 प्रतिशत, वसा 0. 2 कैल्शियम 1.01 प्रतिशत पाया जाता है। अमरूद विटामिन सी पूर्ति के लिए सर्वोत्तम फलों में से एक है। विटामिन सी छिलके में और उसके ठीक नीचे होता है तथा भीतरी भाग में यह मात्रा घटती जाती है। फल के पकने के साथ-साथ यह मात्रा बढती जाती है। अमरूद में प्रमुख सिट्रिक अम्ल है 6 से 12 प्रतिशत भाग में बीज होते है। इससे नारंगी, पीला सुगंधित तेल प्राप्त होता है।

आइये जानते हैं अमरुद के कुछ औषधीय फायदे –

– गठिया के दर्द को सही करने के लिए अमरूद की 4-5 नई कोमल पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर रोजाना खाने से जोड़ो के दर्द में काफी राहत मिलती है।

– डायबिटीज के रोगी के लिए एक पके हुये अमरूद को आग में डालकर उसे भूनकर निकाल लें और भुने हुये अमरुद को छीलकर साफ़ करके उसे अच्छे से मैश करके उसका भरता बना लें, उसमें स्वादानुसार नमक, कालीमिर्च, जीरा मिलाकर खाएं, इससे डायबिटीज में काफी लाभ होता है। ताजे अमरूद के 100 ग्राम बीजरहित टुकड़े लेकर उसे ठंडे पानी में 4 घंटे भीगने दीजिए। इसके बाद अमरूद के टुकड़े निकालकर फेंक दें। इस पानी को मधुमेह के रोगी को पिलाने से बहुत लाभ होता है।

– अमरूद को कुचलकर उसका आधा कप रस निकाल लें। उसमें थोड़ा-सा नींबू का रस डालकर पीए तो हृदय की दुर्बलता दूर होती है | अमरूद में विटामिन-सी होता है। यह हृदय में नई शक्ति देकर शरीर में स्फूर्ति पैदा करता है।

– जब भी आप फोड़े और फुंसियों से परेशान हो तो अमरूद की 7-8 पत्तियों को लेकर थोड़े से पानी में उबालकर पीसकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को फोड़े-फुंसियों पर लगाने से आराम मिल जाएगा। चार हफ्तों तक नियमित रूप से अमरूद खाने से भी पेट और खून साफ होता है जिससे मुहांसे और फुंसियों की समस्या से राहत मिलती है।

– यदि कभी आपका गला ज्यादा ख़राब हो गया हो तो अमरुद के तीन -चार ताज़े पत्ते लें ,उन्हें साफ़ धो लें तथा उनके छोटे-छोटे टुकड़े तोड़ लें | एक गिलास पानी लेकर उसमे इन पत्तों को डाल कर उबाल लें , थोड़ा पकाने के बाद आंच बंद कर दें | थोड़ी देर इस पानी को ठंडा होने दें ,जब गरारे करने लायक ठंडा हो जाये तो इसे छानकर, इसमें नमक मिलाकर गरारे करें, याद रखें कि इसमें ठंडा पानी नहीं मिलना है |

– अमरूद के ताजे पत्तों का रस 10 ग्राम तथा पिसी मिश्री 10 ग्राम मिलाकर 21 दिन प्रात: खाली पेट सेवन करने से भूख खुलकर लगती है और शरीर सौंदर्य में भी वृद्धि होती है।

– अमरूद खाने या अमरूद के पत्तों का रस पिलाने से शराब का नशा कम हो जाता है।

– कच्चे अमरूद को पत्थर पर घिसकर उसका एक सप्ताह तक लेप करने से आधा सिर दर्द समाप्त हो जाता है। यह प्रयोग प्रात:काल करना चाहिए।

– यदि सूखी खांसी हो और कफ न निकलता हो तो, सुबह ही सुबह ताजे एक अमरूद को तोड़कर, चाकू की सहायता के चबा-चबाकर खाने से खांसी 2-3 दिन में ही दम तोड़ देती है।

– अमरूद का रस भवक यन्त्र द्वारा निकालकर उसमें शहद मिलाकर पीने से भी सूखी खांसी में लाभ होता है।

– यदि बलगम खूब बनता हो, खांसी अधिक आती हो, दस्त साफ न हो और हल्का बुखार भी हो तो अच्छे ताजे मीठे अमरूदों को अपनी इच्छानुसार खायें, निश्चित लाभ होगा ।

– यदि जुकाम की साधारण खांसी हो तो अधपके अमरूद को आग में भूनकर उसमें नमक लगाकर खाने से लाभ होता है।

– अमरूद के पत्तों के 10 ग्राम काढ़े को पिलाने से वमन या उल्टी बंद हो जाती है।

– बच्चे का पुराना अतिसार मिटाने के लिए इसकी 15 ग्राम जड़ को 150 ग्राम पानी में ओटाकर, जब आधा पानी शेष रह जाये तो 6-6 ग्राम तक दिन में 2-3 बार पिलाना चाहिए। कच्चे अमरूद के फल उबालकर खिलाने से भी अतिसार मिटता है।

– अमरूद की छाल व इसके कोमल पत्तों का 20 मिलीलीटर क्वाथ पिलाने से हैजे में लाभ मिलता है।

– अमरूद का मुरब्बा प्रवाहिका एवं अतिसार में लाभदायक है।

– बच्चों के गुदा भ्रंश रोग पर इसकी जड़ की छाल का काढ़ा गाढ़ा-गाढ़ा लेप करने से लाभ होता है।

– तीव्र अतिसार या गुदाभ्रंश होने पर अमरूद के पत्तों की पोटली बनाकर बांधने से सूजन कम हो जाती है और गुदा अंदर बैठ जाता है।

– अमरूद के पेड़ की छाल, जड़ और पत्ते, बराबर-बराबर 250 ग्राम लेकर पीसकर रख लें तथा 1 किलो पानी में उबालें, जब आधा पानी शेष रह जायें, तब इस काढ़े से गुदा को बार-बार धोना चाहिए और उसे अंदर धकेलें। इससे गुदा अंदर चली जायेगी।

– अमरूद के पेड़ की छाल 50 ग्राम, अमरूद की जड़ 50 ग्राम और अमरूद के पत्ते 50 ग्राम को मिलाकर कूटकर 400 ग्राम पानी में मिलाकर उबाल लें। आधा पानी शेष रहने पर छानकर गुदा को धोऐं। इससे गुदाभ्रंश (कांच निकलना) ठीक होता है।

– अमरूद के कोमल पत्तों को पीसकर गठिया के वेदना युक्त स्थानों पर लेप करने से लाभ होता है।

– अमरूद के कोमल पत्तों को पीस-छानकर पिलाने से ज्वर के उपद्रव दूर होते है।

– अमरूद के बीज निकालकर पीसकर गुलाब जल और मिसरी मिला कर पीने से अत्यंत बढ़े हुए पित्त की शांति होती है।

– अमरूद के पत्तों के रस को भरपेट पिलाने से या अमरूद खाने से भांग, धतूरा आदि का नशा दूर हो जाता है।

– अदरक का रस एक चम्मच, नींबू का रस आधा चम्मच और शहद को मिलाकर खाने से पेट की गैस में धीरे-धीरे लाभ होता हैं।

– रोजाना भोजन करने के बाद अमरूद का सेवन करने से छाले में आराम मिलता है।

– अमरूद के पत्तों में कत्था मिलाकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

– अमरूद के पेड़ की कोमल नई पत्तियों को पानी में उबालकर, छानकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पीने से अतिसार का आना रुक जाता है।

– मुंह के रोग में जौ, अमरूद के पत्ते एवं बबूल के पत्ते, इन सबको जलाकर इसके धुंए को मुंह में भरने से गला ठीक होता है तथा मुंह के दाने नष्ट होते हैं।

– अमरूद के पेड़ की 2 पत्तियों को चबाकर पानी के साथ सेवन करने से अपच में आराम होता हैं।

– अमरूद, लीची, शहतूत व खीरा खाने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।

– अमरूद के पेड़ की जड़ को पीसकर 25 ग्राम की मात्रा में लेकर 300 ग्राम पानी में डालकर पका लें, फिर इसी पानी से योनि को साफ करने से योनि में होने वाली खुजली समाप्त हो जाती है।

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