गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 4 (पागलपन ठीक हुआ)

· March 28, 2015

cropped-gayatribannerश्री शोभाराम गाप, शंकरपुर, लिखते हैं कि हमारा भतीजा राम किशोर बड़े उत्साही स्वभाव का था। सब कामों में आगे रहता था। साथियों को पहलवानी करने का शौक हुआ तो वह भी अखाडें जाने लगा। दूकान का काम करते हुए भी प्राइवेट मैट्रिक परीक्षा देने की ठानी। रात भर पढ़ता रहता, एक वर्ष फेल होकर दूसरे वर्ष द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हो गया। कीर्तन मंडली में नियमित रूप से जाता। किसी का ब्याह कारज होता तो राम किशोर की लोग खुशमद करते, जब वह पहुँच गया तो समझना चाहिए कि सब काम पूरा हो गया।

उसका उत्साह परिश्रम, प्रबन्ध तथा चातुर्य देखते ही बनता था।चार वर्ष हुए न जाने क्या आकस्मिक घटना घटी कि वह पागल हो गया। कहाँ तो वह सबकी पार लगाता थ, कहाँ उसके लिए एक आदमी बंधुआ रखने की जरुरत पड़ गयी। अकेला छोड़ देने से वह खतरनाक गड़बड़े उत्पन करने लगा। घर के सब लोग अधिक चिन्तित थे, क्योंकि अकेला कमाने वाला पाँच सेर अनाज नित्य खने वाला कुटुम्ब, गुजारा कैसे हो? साथ ही उसके उपद्रवों की देखभाल वैद्य, ओझा, आदि की मिन्त और भेंट स्थिति से घर वालों के अतिरिक्त मुहल्ला, पड़ोसन के लाग, नाते रिश्तेदार सब कोई दु:खी थे।

उसके पागल हो जाने के सम्बन्ध में लागों के तरह-तरह के अनुभव थे कोई कहता था। अधिक पढऩे से पागल हुआ है किसी की समझ में अधिक व्यायाम करना ओर घी दूध से वंचित रहना इसका कारण है। कोई कहता तथ ब्रह्मचर्य पर ध्यान न देने का परिणम है। किसी का मत थ कि किन्हीं देवी-देवता का प्रकोप है या किसी शत्रु ने मन्त्र चलवा कर वैसा करा दिया है। जितने मुँह उतनी बात, जिसने जो उपाय बताया वही किया गया। दिमाग को ताकत देने वाली दवाइयाँ खिलाईं, ओझा सयानों ने कुछ बताया वह सब किया गया। मेंहदीपुर बालाजी के दर्शन कराये पर किसी से कुछ फायदा न हुआ।

डेढ़ वर्ष बराबर यही दशा रही। इतने दिनों में लड़के को तथा उसके कुटुम्ब की जो दयनीय दशा हो गई उसे देखकर सुनने वालों को भी रोना आता था। लोग यथासंभव सहायता भी करते, पर रीता कुआँ पत्तों से पटता। परिस्थिति दिन-पर-दिन शोचनीय होती जा रही थी। ईश्वर को जब किसी का भला करना होता है तो उसका निमित बना देते हैं। पड़ोस में एक सज्जन के यहाँ रिश्तेदार आये। वे गायत्री के बड़े भक्त थे। प्रात: काल बहुत तड़के उठकर गायत्री का जप करते थे। उन्होंने जब पागलपन की बात सुनी तो स्वयं आये और सब लोगों को गायत्री मन्त्र सिखाया मन्त्र सिखाया और कहा आप लोग इसे जपते रहें, माता की कृपा होगी तो लड़का अच्छा हो जायेगा। मन्त्र जप तो क्या, कोई कठिन से कठिन काम बताया जाता तो भी उसे वे करने को तैयार थे, उसी दिन से जप होने लगा।

लड़के की स्थिति दिन-पर-दिन सुधरती गई। ढाई तीन महीने में वह पूर्ण तथा ठीक हो गया। धीरे-धीरे वह अपने सब कामकाज करने लगा। अब उसमें कोई लक्षण ऐसा नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि यह कभी पागल रहा होगा। हाँ, उसका स्वास्थ्य पहले जैसा अच्छा था अब वैसा नहीं है। गायत्री के इस चमत्कार को देखकर अब अनेको मनुष्य उपासना  करने लगे हें। एक लड़का जो आरम्भ से ही कुछ बेवकूफ और आवारा सा था, पिता जी की साधना के प्रभाव से बहुत कुछ सुधारने लगा है। हमारे कुछ गुरु जी भी गायत्री की बड़ी महिमा बताया करते हैं। कि राम किशोर के अच्छा होने की बात साधारण-सी है। इस मन्त्र के द्वारा सब कट सकते हैं।

सौजन्य – शांतिकुंज गायत्री परिवार हरिद्वार

 

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