गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये -1 (कठिन पेट के रोगो से मुक्ति)

cropped-gayatribannerश्री हरमानभाई पटेल, सदनपुरा, लिखते हैं कि गायत्री माता द्वारा उपार्जित शक्ति का मैंने प्रथम बार उपयोग किया और वह बहुत ही सफल रहा। मेरे बड़े भाई डाहभाई के पेट में कुछ दिन पूर्व बड़ा भंयकर दर्द उठा। नलों के  आस-पास से पीड़ा आरम्भ होती थी और सारे शरीर में फैला जाती थी।

रात को वेदना का ऐसा प्रकोप होता था कि कई बार तो वे पीड़ा से चीखने लगते थे। दस्त हो रहे थे। कई बार मल के साथ रक्त भी जाता था। डाक्टरों का इलाज करते हुये 15 दिन बीत गये, पर कुछ लाभ न हुआ। उनका कहना था कि यह आंतों की सूजन और सपना मरोड़ रोग है।

इलाज को इतने दिन बीत गये और कुछ लाभ न हुआ तो बड़ी चिन्ता हुई, घर के सब लोग बड़े दु:खी हो रहे थे। जब काफी दिन चिकित्सा कराते हो गये और कोई लाभ न हुआ, तो मैंने आध्यात्मिक प्रयोग किया।

प्रति-दिन जप के समय प्रयुक्त हुये जल पात्र में से मैं जल लेता और गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित करके उसे भाई साहब को पिला देता इस उपचार से आश्चर्य जनक लाभ हुआ। कुछ ही समय में उनकी पीड़ा बन्द हुई,दस्त बन्द हुये और आठ ही दिन मे रोग के सब लक्षण दूर हो गये।

यह माता की कृपा है, जो कठिनाई डाक्टरों से दूर न हो सकी वह माता की कृपा कण में हल हो गयी। संसार में अनेक कठिनाइयों हैं और वे आये दिन किसी न किसी रूप में सामने आती रहती हैं। इसमें से कुछ को तो मनुष्य अपने प्रयत्न और पुरुषार्थ से हल कर सकता है, पर कुछ का निवारण उसके बस की बात नहीं होती, ऐेसे अवसरों पर माता की कृपा परम कल्याण-कारिणी सिद्घ होती है।

सौजन्य – शांतिकुंज गायत्री परिवार, हरिद्वार

 

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