गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 12 (असाध्य बीमारियों से छुटकारा)

cropped-gayatribannerठा. रामकरणसिंह वैद्य, जफरापुरा, लिखते हैं कि कुछ वर्ष पूर्व मेरी स्त्री को संग्रहणी रोग हुआ था, बहुत चिकित्सा की पर कुछ लाभ न हुआ। दो वर्ष इस रोग से ग्रसित रहने के कारण उसका शरीर अस्थि पंजर हो गया था। और अच्छा होने की आशा घटती जा रही है। उसका यह हाल देखकर हम सभी को बड़ा दु:ख रहता था।

उसी साल अखण्ड ज्योति का गायत्री अंक छपा थ। मैंने गायत्री मंत्र की महिमा पढ़ी और बताई हुई विधि से सवा लक्ष का अनुष्ठान किया। हवन तथा ब्राहण भोजन के साथ जप समाप्त किया। उसी दिन से स्त्री की बीमारी घटनी आरम्भ हो गई। जो कार्य दो वर्ष की कीमती चिकित्सा न कर सकी थी वह गायत्री की कृपा से कुछ दिनों में ही पूरी हो गयी। स्त्री का जर्जर शरीर फिर अच्छी स्थिति में आने लगा। मैंने उत्साहपूर्वक माता की आराधना जारी रखी।

ईश्वर की कृपा से एक पुत्र भी उत्पन्न हुआ जो स्वास्थ्य की दृष्टि से अपनी माता से अच्छा है। यह सब भगवती की ही कृपा है। अप्रैल सन् 50 की बात है। मैं अपनी सुसराल जा रहा था तो रास्ते में बैनीपुर गांव में एक ऐसी रोगिणी थी जिसे पन्द्रह वर्ष से रक्त प्रदर का स्त्राव होता था। बीस दिन अधिक रक्त जाता था, दस दिन कुछ कम हो जाता था। उसका शरीर अत्यन्त कृश हो रहा था।

न जाने उसे ईश्वर ने कैसे जीवन दान दे रखा था, सदा चारपाई पर ही पड़ी रहती थी। मुझे वह रोगिणी दिखाई गई। मैंने उसके घर वालों को सलाह दी कि गायत्री का अनुष्ठान कराओ। उसके घर वालों ने मेरी सलाह मानकर वैसा ही किया। संयोगवश मैं 28 मई, 51 को सुसराल जाते समय बैनीपुर उस रोगिणी के घर फिर गया। देखा कि वह घर का काम-धन्धा कर रही थी, स्वस्थ थी और उसे गर्भ था। दो चार महीने में बालक उत्पन्न होने वाला है।

जैसे ही मैं उनके यहां गया वह स्त्री मेरे पैर छूने दौड़ी। मैंने उसे रोककर कहा आप ब्राहण हैं, मैं क्षत्रिय हूं। ऐसा अनुचित कार्य न करें। आप हमारी पूज्य हैं। उन लोगों ने बताया कि आपके कथनानुसार हमने गायत्री का अनुष्ठान कराया था तभी से यह अच्छी होने लगी थी। मेरा गायत्री पर भारी विश्वास है। जो रोगी मेरी चिकित्सा में आते हैं उन्हें मैं गायत्री का जप भी औषधि अनुपान की तरह बताता हूं।

सौजन्य – शांतिकुंज गायत्री परिवार, हरिद्वार

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