गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 33 (असफलात में सफलता की झांकी)

cropped-gayatribannerश्री बैजनाथ भाई रामजी भाई गुलारे का कहना है कि गायत्री की पूजा में धर्म और अर्थ दोनों का लाभ है, इसलिए दूसरी पूजाओं के बजाय मुझे यही अधिक प्रिय है। गायत्री की मैंने बड़ी प्रशंसा सुनी थी। कई व्यापारियों ने मुझसे कहा था कि हम पंडितों से गायत्री का जप कराते हैं। इससे लक्ष्मी जी की कृपा रहती है। तब से मेरा ध्यान भी उधर गया। पहले मैंने सम्वत् 2००1 में 24 पंडितों द्वारा गायत्री पुरश्चरण कराया। हमारे ऊपर इनकम टैक्स का मुकदमा चल रहा था, बड़ी रकम का मामला था, माता से यह प्रार्थना की कि इसमें जिता दें, अनुष्ठान में तीन हजार रुपया लगा।

मुकदमा हम हार गये, पर एक लाभ ऐसा हुआ जो मुकदमें को जीतने से भी बड़ा था। मेरे छ: सन्तान हुई थीं, छओं कन्याएं हैं। एक मर गई और पांच जीवित हैं। अनुष्ठान के बाद स्त्री गर्भवती हुई और पुत्र पैदा हुआ, वंश डूबने की जो चिन्ता हो रही थी वह दूर हो गई, घर भर खुशी से फूला न समाया। एक तरह से अनुष्ठान असफल रहा पर दूसरी तरह से उसका पूरा लाभ मिल गया। दूसरा अनुष्ठान सम्वत् 2००3 में कराया।

मझली लड़की को तपैदिक हो गया था उसकी प्राण रक्षा के लिए यह कराया था। लड़की तो न बची मगर मेरा सत्रह साल का बवासीर अच्छा हो गया। इस दुष्ट रोग का तीन बार आपरेशन हो चुका था, हजारों रुपये खर्च हो चुके थे और सदा ही बड़ा कष्ट रहता था उससे छूट जाना भी मेरे लिए लड़की के अच्छी हो जाने जैसी ही संतोष की बात है। तीसरा अनुष्ठान संवत् 2००4 में कराया। बड़े दामाद बीमार थे। जलोदर की चिकित्सा कराने हमारे यहां ही आ गये थे। डाक्टर इंजेक्शन तो लगा रहे थे पर बचने की किसी को आशा न थी।
अनुष्ठान कराया, परन्तु दामाद न बच सके। फिर भी व्यापार में उस वर्ष इतना लाभ हुआ जितना कई वर्षों का मिलाकर भी नहीं हुआ था। तब से हर साल अनुष्ठान होता है और स्वयं भी पूजा तथा जप करता हूं। मुझे उससे लाभ ही होता है। मेरी प्रार्थना तो माता ने एकाध बार ही सुनी है, पर वे अपनी इच्छा से मुझे बहुत कुछ देती हैं। ज्ञानी लोग बताते हैं कि अटल प्रारब्ध भोग नहीं टलते, पर गायत्री की कृपा भी व्यर्थ नहीं जाती। अवश्य ही गायत्री में चमत्कार है उसका भक्त लाभ में रहता है।
जैसे-जैसे मेरी आयु बढ़ती है, भजन पूजा में मन बहुत रमता है। माता की कृपा से सब कुछ सम्भव है, परलोक में मेरी सद्गति होना भी सम्भव है। मेरी गायत्री भक्ति को देखकर और भी कई आदमियों ने खुद जप करने का नियम आरम्भ किया है। कई ने छोटे-छोटे सवालक्ष के अनुष्ठान भी पंडितों से कराये हैं कई ने अपने यहां गायत्री जप तथा हवन कराये हैं। उन सभी को इस महामन्त्र से लाभ हुआ है।

सौजन्य – शांतिकुंज गायत्री परिवार, हरिद्वार

facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail
loading...


ये भी पढ़ें :-