गायत्री मन्त्र की सत्य चमत्कारी घटनाये – 9 (आश्चर्यजनक अनुभव)

cropped-gayatribannerचौधरी अमरसिंह जी, इन्दौरा लिखते हैं कि अन्य साधनाओं की अपेक्षा मैं गायत्री मंत्र को इस वास्ते महव देता हूं कि जब मैं इस साधन के पूर्व अन्य प्रणालियां से साधना करता रहा तो किसी भी सिद्घि की प्राप्ति मुझे इतनी मात्रा में नहीं हुर्ह जितनी कि इसके साधन से थोड़े काल में हुई जिनका वर्णन संक्षेप से नीचे दिया जा रहा है। मुझे कई बार इसके साधन से बिना इच्छा किये अदभुत लाभ प्राप्त हुए हैं। उनमें से थोड़े से का वर्णन इस प्रकार का है।

(क) कई बार आप या अन्य किसी प्रिय व्यक्ति के रोग ग्रसित होने के मन में ज्ञान प्राप्त हुआ कि इस रोग को अमुक प्रकार उपचार किया जावे तो लाभ होगा अन्यथा अमुक प्रकार की व्याधि उत्पन्न होगी। इन संकेतों से तदनुसार ही फल मिला।

(ख) तीन वर्ष पूर्व मैं एक ऐसे कार्य में प्रवृत्त हुआ था जो कि मेरी बुद्घि, शक्ति पराक्रम से बाहर था। उस कार्य में जहां त्रुटि होती जाती कि यहां त्रुटि हुई है सुधार लो, तो उसी त्रुटि को अन्य प्रकार से जांच करने पर वह त्रुटि विदित हो जाती व सुधार ली जाती। इस प्रकार वह कर्या भी आलौकिक रीति से पूर्ण हो गया।

(ग) सन् 1950 ई. में गर्मी के दिनों में मैं एक ग्राम में था कि पास ही छोटे-छोटे बच्चे व मेरी एक कन्या एक फूस के मकान में खेल रहे थे कि एक छोटे से बच्चे ने वहां आग लगा दी। आग लगने से दस मिनट पूर्व किसी अज्ञान शक्ति ने मुझे स्पष्ट शब्दों में बताया कि मकान से बाहर निकलो-बाहर निकल कर मैं एक पानी में नल के नीचे नहाने लगा कि इतनेद में आग लग गई।
परन्तु मैंने तुरन्त लोग इकटठे किये व अधिक हानि नहीं हुई। इन बातों का प्रमाण है कि यह सब गायत्री के प्रभाव से हुआ है। माता गायत्री मेरे साथ माता का सा बर्ताव कर रही है। मेरे ग्राम से 15 मील दूर पर कुछ समय एक साधू रहते थे जो कि गायत्री की साधना में सिद्घ थे।
वह कई बार आश्चर्यजनक कार्य लोक समूह के सामने भी करके दिखा देते थे। जैसे खाली बोतल को झट किसी द्रव्य से भर दिखा देना व लोगों को वह द्रव्य पिला भी देना। श्री विद्याचरण ऋषि के प्रार्थना करने पर गायत्री देवी ने सोने की वर्षा दक्षिण देश में की है।
सौजन्य – शांतिकुंज गायत्री परिवार, हरिद्वार

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