क्यों है महाबली शनि देव के हाथ में दण्ड

2Shani_Devaशनि देव के कर्मों को लेकर अक्सर लोगो में भ्रम बना रहता है की शनि देव इतने क्रोधी और दुःख देने वाले क्यों है । पर लोगो को यह नहीं समझ में आता की कष्ट उन्हें शनिदेव नहीं उनके पूर्व कर्म देते है । प्रस्तुत दृष्टान्त यही परिलक्षित करता है ।

सुख संपत्ति की देवी मां लक्ष्मी ने एक बार दंडाधिकारी शनिदेव जी से पूछा कि शनिदेव मैं लोगों की गरीबी दूर करके उन्हें धनवान बनाने के साथ- साथ सुख स्मृद्धि प्रदान करती हूं पर आप लोगों से धन छीन कर फिर उन्हें फिर से गरीब कर देते हैं। इसके पीछे क्या कारण है ? तब शनिदेव ने माता का प्रश्न सुनकर कहा कि मां, इसमें मेरा कोई दोष नहीं हैं क्योंकि लोगों को उनके कर्मों के अनुसार ही फल की प्राप्ति होती हैं और जो लोग स्वयं खुश रहकर दूसरों को दुख पहुंचाते है और क्रूर व बुरे कर्म करते हैं उन्हें दंड देने के लिए परमात्मा ने मुझे ही ये काम सौंपा है ।

इसलिए वे जैसा कर्म करते है मैं उन्हें वैसा ही फल देता हूं , दुष्टों के साथ वैसा ही व्यवहार किया जाता है जैसा वो दूसरों के साथ करते हैं। लक्ष्मी जी ने शनिदेव की बात पर विश्वास न करते हुए कहा अभी मैं एक निर्धन व्यक्ति को अपने प्रताप से धनवान व पुत्रवान बना देती हूं और माता के वरदान से एक निर्धन व्यक्ति धनवान बन गया । तब लक्ष्मी जी बोली अब आप अपना कार्य करें । जैसे ही उस धनवान व्यक्ति पर शनिदेव की दृष्टि पड़ी वो धनवान व्यक्ति पहले जैसा निर्धन बन गया और भीख मांगने को मजबूर हो गया , फिर लक्ष्मी जी ने शनिदेव से इसका कारण पूछा ।

शनिदेव ने बताया कि ये व्यक्ति इतना अत्याचारी, पापी व निर्लज्ज था कि इसने पहले गांव के गांव तबाह कर डाले थे और जगह-जगह पर आग लगाई थी । पापी मनुष्य को देर सवेर गरीब बीमार बनना ही है । आपके वरदान से ये व्यक्ति धनवान तो बन गया पर इसके कर्म ऐसे थे कि इसको फिर से गरीबी की स्थिति में रहना पड़ेगा क्योंकि जीवन में कर्म ही प्रधान है और हमें अपने कर्मों के अनुसार ही फल की प्राप्ति होती हैं। मां इसमें मेरा कोई दोष नहीं हैं ये उसके पूर्व जन्म के कर्मों का फल है।

शनिदेव जी बोले मां जो लोग किसी का बुरा नहीं सोचते और जो सदा दूसरों की भलाई करते हैं और भगवान के भक्त होते हैं, वे ही अगले जन्म में ऐश्वर्यवान होते हैं । उनके शुभ कर्मों के अनुसार ही मैं उनके धन-धान्य में वृद्धि करता हूं । मां कई लोग बढ़िया जीवन जीने के लिए अपने जीवन में कुछ ऐसे कर्म कर बैठते है जो उन्हें नहीं करना चाहिए जिससे उन्हें जीवन में आगे चलकर दुख ही प्राप्त हो ।

अपना जीवन यापन करने के लिए मनुष्य को कम खाकर ही गुजारा कर लेना चाहिए लेकिन बुरे कर्म करने से पहले हर मनुष्य को 100 बार सोच लेना चाहिए इसका परिणाम भी उसे खुद ही भोगना पड़ेगा । शनिदेव के वचन सुनकर माता लक्ष्मी जी बहुत प्रसन्न हुई और कहने लगी शनिदेव आप धन्य है जो प्रभु ने आपको इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी हैं।

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