क्यों तेजी से नपुन्सकता की बीमारी फ़ैल रही आज के युवा में

14580965074_0e61f868f1किसी बीमारी के होने पर डॉक्टर सबसे पहले, रोगी का इतिहास पूछ्ता है की क्या खाए, क्या किया, क्या हुआ था आदि आदि ये जानने के लिए आखिर बीमारी की प्रथम द्रष्टया मुख्य वजह क्या थी ! पर क्या कहा जाय की जब डॉक्टर ही गलत डाईग्नोज करे और गलत सलाह दे !

कई डॉक्टर समेत बुद्धजीवियों को समझ में ही नहीं आता की गन्दी अश्लील सोच भी नपुंसकता का कारण हो सकती है और वो अक्सर उटपटांग सलाह भी देते हैं की युवा को सेक्स की इच्छा हो तो उसे महीने में दो बार या तीन बार हस्त मैथुन करना अलाऊ है आदि आदि !

ऐसे डॉक्टर्स को मालूम ही नहीं की वीर्य का नाश क्या होता है और वो भी अप्राकृतिक मैथुन से !

वीर्य और रज का बहुत अच्छा वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है हमारे अनन्त वर्ष पुराने और परम आदरणीय हिन्दू धर्म में !

वीर्य और रज कोई मल मूत्र नहीं है की जब मन किया निकाल दिया ! वीर्य और रज किसी मानव या स्त्री की सबसे कीमती धातु होती है जिसका सही से शरीर में संवर्धन किया जाय तो मनुष्य, साक्षात् ईश्वर हो सकता है !

आयुर्वेद कहता है कि जो आदमी अपने शरीर के वीर्य का मनमाने तरीके से और बार बार नाश करता है उसके शरीर में कई तरह के रोग लग सकते हैं और कुछ रोग खतरनाक और प्राण घातक भी हो सकते हैं जैसे ट्यूबरक्लोसिस (क्षय रोग) !

वीर्य ही है जो पूरे शरीर में ओज, तेज, बल, चमक और सुन्दरता बन कर छाया रहता है और वीर्य रज का अप्राकृतिक नाश मानव शरीर के पूरे इम्यून सिस्टम (रोगों से लड़ने की ताकत) को ही कमजोर कर देता है और इतना ही नहीं बुद्धि, याददाश्त और नजर भी कमजोर होती है ! यौनांगों की भी बीमारियाँ होती हैं और असमय बुढ़ापा आता है ! बालों का पकना, त्वचा पर जल्दी झुर्री पड़ना आदि कई उपद्रव शुरू हो जातें है ! फिर इन झुर्रियों को छुपाने के लिए बाजार में बिकने वाले मेकअप के सामान का और हेयर डाई आदि का इस्तेमाल जिससे त्वचा और बाल और तेजी से ख़राब होने शुरू हो जाते हैं !

कुल मिलाकर निष्कर्ष यह है आजकल हर जगह मॉडर्निटी (आधुनिकता) के नाम पर जो अश्लीलता, व्याभिचार का माहौल है उससे युवा हर समय अपने आप को कामोत्तेजित महसूस कर रहे है और ऐसे में अपनी बढ़ी हुई वासना को शान्त करने के लिए अप्राकृतिक मैथुन का सहारा अक्सर ले रहे है !

बार बार अप्राकृतिक मैथुन करने से ही शादी से पहले ही नपुंसकता की बिमारी सुनने को मिलती है और ये ठीक उसी तरह से है जैसे दीवाली का त्यौहार आने से पहले ही कोई जल्दबाज बच्चा उत्साह में अपने सारे पटाखे जला ले और जब दिवाली आये तो पटाखों के न होने से, वो दुखी होकर सिर्फ पश्चाताप करे ! कई बार ऐसा भी होता है की किसी ने शादी से पहले अप्राकृतिक मैथुन से अपना काफी वीर्य बर्बाद किया पर वो पूरी तरह से नपुन्सक नहीं हुआ लेकिन उसका वीर्य उस अच्छी क्वालिटी का नहीं रह गया जैसा उसका शुरू में हुआ करता था जिसकी वजह से उसकी जो संतान पैदा होती है उसकी जन्मजात रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की सम्भावना होती है ! क्योंकि आयुर्वेद कहता है कि दुर्बल वीर्य से बलवान सन्तान नहीं पैदा होती है !

ऐसी नौबत देश के भविष्य हमारे युवाओं के साथ कभी ना आये इसलिए हमारे परम आदरणीय हिन्दू धर्म में 25 वर्ष उम्र तक कड़े ब्रहमचर्य व्रत का पालन करने पर बहुत जोर दिया गया है ! क्योंकि एक ब्रह्मचारी ही बलवान गृहस्थ बन कर बलवान सन्तान पैदा कर सकता है और एक बलवान ही दूसरे कमजोर की सहयता या रक्षा कर सकता है, ना की एक कमजोर जो की खुद अपने लिए समस्या है तो दूसरों का और समाज का क्या भला करेगा !

ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने के लिए ब्रह्मचर्य माहौल का होना बहुत जरूरी है क्योंकि आँखों से अश्लील दृश्य देखकर और कानों से अश्लील बातें सुनकर मन में विकार, गंदे विचार पैदा होने लगते हैं !

सही उम्र में युवाओं की शादी भी हो जानी चाहिए ना की अच्छे कैरियर बनाने के इन्तेजार में शादी टालते जाना चाहिए

समय से शादी हो जाने से आदमी का मन भटकने से बचता है, जिससे औरतों के प्रति होने वाली हिंसा में भी काफी कमी आती है ! गुजरात प्रदेश इसका एक अच्छा उदाहरण है जहाँ अधिकांश युवाओं का विवाह 25 से 30 वर्ष की उम्र के बीच में हो जाता है जिससे गुजराती युवक एक संतुष्ट दिनचर्या के साथ अपने बिज़नेस व नौकरी को आगे बढ़ाते हैं !

समय से पूर्व विवाह करना भी बहुत घातक होता है क्योंकि उस समय वीर्य और रज की निर्माण की प्रक्रिया शरीर में अपरिपक्व अवस्था में होती है ! इसलिए कम उम्र में विवाह उसी तरह होता है जैसे तुरन्त ताजे बने हुए पिलर (खम्बे) को ठीक से सूखकर मजबूत हुए दिए बिना, उस पर छत बनवा देना ! तो ऐसे में खम्बा हमेशा के लिए कमजोर हो सकता है !

जैसे दुनिया में हर बीमारी का इलाज है उसी तरह से नपुंसकता का भी है ! सबसे आसान और प्रभावी इलाज के लिए तीन काम करना पड़ता है !

पहला काम है वीर्य की कमी को दूर करने के लिए रोज 1 ग्लास से 2 ग्लास भारतीय देशी गाय माता का दूध सुबह शाम पीना ! देशी गाय माता के दूध से बढ़कर आसानी से और बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के वीर्य बढ़ाने वाली चीज कम ही है आयुर्वेद में ! ये इतना सुपाच्य है की कमजोर से कमजोर आदमी भी आसानी से इसे पचा सकता है !

शरीर कमजोर हो तो अच्छी से अच्छी और महंगी से महंगी चीज खाए आदमी, तो सब बिना शरीर को फायदा पहुचाये मल मूत्र से बाहर निकल जाता है इसलिए शरीर को मजबूत बनाना बहुत जरूरी है और यही है दूसरा काम ! शरीर को मजबूत बनाने के लिए सबसे फायदेमंद चीज है रोज आधा घंटा सुबह मॉर्निंग वाक करना और आधा घंटा कपाल भांति प्राणायाम करना ! सिर्फ ये दोनों कसरते करने से ही धीरे धीरे पूरे शरीर का कायाकल्प होने लगता है ! कपाल भांति प्राणायाम एकदम सही से करना चाहिए नहीं तो फायदा की बजाय नुकसान होने की सम्भावना होती है ! साथ ही जरूरत महसूस हो तो किसी विद्वान् आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से बाबा रामदेव की बनायीं हुई दवा, यौवनामृत वटी आदि भी लिया जा सकता है !

जैसे बहते पानी में बांध नहीं बन सकता उसी तरह से अश्लीलता भरे दिमाग के होते, नपुंसकता का परमानेंट इलाज असम्भव है ! इसलिए अश्लील माहौल और अश्लील लोगों से कैसे दूरी बना कर रखनी है यह रोगी व्यक्ति को खुद तय करना होता है ! और जब तक इलाज चले तब तक योग्य चिकित्सक की सलाह अनुसार स्त्री प्रसंग से भी दूर रहना चाहिए !

मन को वश में करने के लिए भगवान् के नाम जप से बहुत फायदा मिलता है इसलिए अगर माहौल को साफ़ सुथरा ना कर सकें तो मन को ही साफ़ सुथरा करें प्रभु नाम जप से !

अतः आज के अधिकांश भ्रमित लोग चाहे वो पढ़े लिखे हाई सोसाइटी के हों, मध्यम वर्गीय हों या गरीब परिवार के, उनको दिमाग लगाकर ध्यान से जरूर सोचना चाहिए की जिस अश्लीलता को मॉडर्निटी (आधुनिकता) का पर्याय समझ कर प्रशंसा की निगाह से देखा जा रहा है वही इस समाज के दूर गामी पतन का कारण बनने वाली है ! इस अश्लीलता के एक नहीं हजार नुकसान है जिसे लोग जान जान कर भी नजर अन्दाज किये जा रहे हैं !

ये अश्लीलता हमारे नौनिहालों और नयी पीढ़ी के बच्चों के दिमाग पर पहले कब्ज़ा जमाती है फिर उनसे गलत काम करवा कर उनके कीमती शरीर को कमजोर करती है और फिर इन कमजोर शरीर वालों से एक बीमार और चरित्र हीन देश का निर्माण करवाती है !

सभी प्रदूषणों से सबसे खतरनाक होता है दिमाग का प्रदूषण इसलिए समय रहते इस अश्लीलता के राक्षस को नहीं रोका गया तो ये सारे मानव जाती के लिए खतरा है ! इसे रोकने की जितनी जिम्मेदारी सरकार की है उतनी ही हर नागरिक की भी, ये देखते हुए की कहीं उनके घर का कोई सदस्य तो इसका शिकार नहीं हो रहा है !

जय स्वस्थ भारत माँ …….जय भारत माँ के सभी स्वस्थ पुत्र पुत्रियाँ !

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