क्या किसी मनोवैज्ञानिक षड़यंत्र का हिस्सा हैं केजरीवाल, गांधीजी व अन्ना हजारे ?

lkविश्व के इतिहास से बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ हुई है और कई ऐतिहासिक घटनाओं को एक सोची समझी साजिश के तहत एकदम बदल कर मनमाने तरीकों से किताबों में लिख दिया गया है ! इतिहास के अध्ययन से जो सीख मिलती है उसका बहुत महत्वपूर्ण रोल होता है सुरक्षित व सुखद भविष्य की नीवं डालने में !

विश्व इतिहास की सच्चाई पर रिसर्च करते कुछ स्वयं सेवी इतिहासकार बताते हैं कि भारत के इतिहास से भी जम कर खिलवाड़ हुआ है ! सच्चाईयों को बदलकर झूठा इतिहास लोगों को बताया जा रहा है !

ये स्वयं सेवी इतिहासकार बताते हैं कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे कुछ शातिर शासक मनमुताबिक रिजल्ट पाने के लिए कुछ दूरगामी चालें चलते हैं और इन चालों में सीधी सादी आम जनता अक्सर फंस जाती हैं !

Bhagat-singhdownload (10)इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, भारत छोड़ कर जाते हुए, अंग्रेजों के द्वारा ये अफवाह फैलाना की भारत को आजादी गांधीजी के द्वारा मिली थी !

भारत को आजादी दिलाने के लिए वैसे तो कई प्रचण्ड देशभक्त क्रांतिकारियों ने हँसते हँसते अपनी जान गंवाई थी पर इन सबके बावजूद जिद्दी अंग्रेज भारत छोड़ने को तैयार हो ही नहीं रहे थे !

पर जब श्री सुभाष चन्द्र बोस, खतरनाक बब्बर शेरों से बनी अपनी आजाद हिन्द सेना को लेकर भारत के नजदीक पहुँच गए तो अंग्रेजों की सेना जिसमें अधिकांश भारतीय ही थे, उनमें विद्रोह हो गया और वो सब अंग्रेजों का साथ छोड़कर सुभाष बाबू की ओर हो गये !

poजिससे अंग्रेजों के पास दो ही विकल्प बचे थे कि या तो वे सुभाष बाबू की सेना के हाथों गाजर मूली की तरह काट दियें जाय या भारतियों को उनका देश सौंप कर वापस इज्जत से अपने देश लौट जाय !

अंग्रेजों ने दूसरा विकल्प ही चुना पर उनके मन में दुबारा इस देश पर शासन करने का लालच था इसलिए उन्होंने कई तरह की कूटनीतिक चालें चलकर देश का शासन अपने विश्वास पात्र अर्थात नेहरू (गांधीजी समर्थित) को सौंप दिया !

ये इतिहासकार बताते हैं कि अंग्रेजो ने गांधी जी को जिस उद्देश्य के लिए एक साधारण आदमी से खूब पब्लिसिटी दिलवाकर विश्व प्रसिद्ध मसीहा बापू बनवा दिया, ठीक वही उद्देश्य आज के ज़माने में रातो रात पैदा हुए नेता अरविन्द केजरीवाल व अन्ना हजारे का है जिन्हें पैदा करनें के स्रोत आज के काले अंग्रेज हैं !

विश्व इतिहास की सत्यता खोजने वाले ये स्वयं सेवी इतिहासकार बताते हैं कि गांधी जी की असलियत ये है कि इन्होने शुरू में अहिंसात्मक तरीके से कुछ बातों का विरोध किया लेकिन उनके विरोध की बातें सिर्फ वहीँ के लोकल लोग ही जानते थे (ठीक जैसे आज के युग में अन्ना हजारे व केजरीवाल के किये गए शुरुवाती काम बस महाराष्ट्र व दिल्ली के लोकल लोग ही जानते थे) !

गांधी जी के ही दौर में भारत में अंग्रेजों को भारत से बाहर भगाने के लिए, बेचैन देशभक्त क्रांतिकारी बार बार अंग्रेजों पर जानलेवा हमले कर रहे थे जिससे क्रूर अंग्रेजों के मन में डर बैठ गया था और उन्हें समझ में नहीं आ रहा था आखिर किस तरह भारत की हर गली मोहल्ले में रोज होने वाले इन जानलेवा हमलों को रोका जाय !

तो बहुत सोच समझ कर एक योजना के तहत उन्होंने भारतियों की इस सोच को बदलने का प्रयास शुरू किया कि आजादी पाने के लिए कोई भी हथियार उठाने की जरूरत नहीं हैं, बस बिना हथियार के अहिंसक तरीके से धरना प्रदर्शन कर विरोध करना चाहिए क्योंकि यही पढ़े लिखों बुद्धजीवियों का सम्मानित तरीका है जबकि हथियार उठाकर हिंसा का सहारा लेना बर्बर और क्रूर तरीका है !

चींटी जैसे छोटे प्राणी की भी जान गलती से पैरों के नीचे दबकर ना चली जाय इस बात का भी ध्यान रखने वाले हिन्दुओं के मन में अंग्रेजों ने इस सोच को अच्छे से बैठाने के लिए गांधी जी को रोल माडल बनाने का काम तत्कालीन मीडिया (अखबारों, पोस्टर्स, अफवाहों आदि) के माध्यम से करना शुरू किया ! अंग्रेजों का ये प्रयास काफी हद तक सफल भी हो गया था क्योंकि उस समय के बहुत से युवा (आज ही की तरह) कन्फ्यूजन (भ्रम) में पड़कर नहीं समझ पा रहे थे कि इन धूर्त जिद्दी अत्याचारी अंग्रेजों को डंडे से पीटकर भारत से भगाया जाय, कि गांधी जी के पीछे खड़े होकर शान्ति के कबूतर बन कर अंग्रेजों से भारत को आजाद करने के लिए बार बार निवेदन किया जाय !

lkjअगर सुभाष बाबू अपनी सेना इक्कठी करके अंग्रेजों को मारने नहीं आये होते तो ये चालाक अंग्रेज भारत छोड़कर कभी ना भागते ! ठीक इसी तरह खानदान विशेष की पार्टी के पिछले 50 सालों के भयंकर कुशासन से उपजी भयानक गरीबी, महंगाई, भ्रष्टाचार, दुर्व्यवस्था के खिलाफ, श्री बाबा रामदेव जी का परोपकारी संगठन और मोदी जी के द्वारा ईमानदारी से गुजरात में किये गए अदभुत विकास कार्य की लोकप्रियता, जब आश्चर्य जनक तेजी से प्रसिद्ध होकर पूरे भारत समेत विश्व में भी तहलका मचाने लगी तो ये खानदान विशेष की पार्टी एकदम से घबरा गयी और समझ गयी की उसका नामोनिशान भारत से एकदम साफ़ ना हो जाय इसके लिए सिर्फ बाबा रामदेव व मोदी जी को बदनाम करने से काम नहीं चलेगा बल्कि इनके टक्कर में अपने कुछ विश्वासपात्र आदमियों को भी खड़ा करना पड़ेगा !

ये इतिहासकार बताते हैं की जैसे आजादी से पहले अंग्रेजों ने भारतियों को भ्रमित करने के लिए, श्री चंद्रशेखर आजाद, श्री भगत सिंह, श्री सुभाषचन्द्र बोस आदि जैसे महान जोशीले तेजतर्रार क्रांतिकारियों की टक्कर में गांधी जी की छवि को खूब प्रसिद्ध कर उन्हें कुछ ही दिनों में आजादी का मसीहा बना दिया था ठीक उसी तरह खानदान विशेष की पार्टी और कुछ विदेशी शक्तियों ने कुछ साल पहले श्री बाबा रामदेव और मोदीजी की टक्कर में अन्ना हजारे व अरविन्द केजरीवाल को खड़ा किया और उन्हें कई तरह के नाटकीय आन्दोलनों तथा धन बल के दम पर रातों रात जबरदस्त ईमानदारी का मसीहा बनाया !

पर वास्तविकता में आज की डेट में ये हजारे और केजरीवाल खुद कुछ सच्चे विकास के काम करने की बजाय सिर्फ केन्द्र सरकार के कामों पर रायता फैलाने में ज्यादा रुचि ले रहें हैं, खासकर जब जब भारत के किसी प्रदेश में इलेक्शन होने वाला होता है !

ये ही विदेशी शक्तियां जे. एन. यू. में उभरे तथाकथित क्रान्तिकारी नेताओं के समर्थन में अप्रत्यक्ष रूप से धन बल लेकर उतरी थी ! वास्तव में ये विदेशी शक्तियां इतनी ज्यादा विभाजनकारी हैं कि इनका एकमात्र उद्देश्य है कि भारतमाता की सदियों पुरानी सांस्कृतिक अस्मिता व विरासत को नष्ट कर कई टुकड़े करना है !

ये विदेशी शक्तियां इतनी ज्यादा शातिर खोपड़ी की हैं कि, जब इनके द्वारा खड़े किये गए चेहरों की पोल धीरे धीरे खुल जाती हैं तो ये तुरन्त नए चेहरो को ईमानदार और देशभक्त बनाकर जनता के सामने पेश कर देती हैं और जब जनता उनके नए चेहरो के झांसे में आकर उनमें अपना विश्वास प्रकट करती है तो वे उन नए चेहरों से भी अपने मकसद को भारत में आगे बढ़वाती हैं !

वास्तव में इन खुरापाती शक्तियों की कार्यशैली को समझने की जरूरत है क्योंकि इन्हे अच्छे से पता है की जब तक हम भारतवासी अलग अलग बटे रहेंगे और अलग अलग मुददों पर लड़ने में ही व्यस्त रहेंगे तब तक वो अपनी खुफिया चाल से सफल रहेंगे और उनकी कई चालों में से एक बड़ा हिस्सा है भारत में उपलब्ध असीमित प्राकृतिक संसाधनों का अधिक से अधिक दोहन वो भी कौड़ियों के दाम पर !

सौभाग्य से इस समय देश में राष्ट्रवादियों की सरकार है जो इन विदेशी शक्तियों के मंसूबों को अच्छे से समझ रही है, बस जरूरत है हम आम जनता को भी समझने की, जिससे ये शक्तियां कभी अपने खतरनाक मंसूबों में सफल ना होने पाय !

इन इतिहासकारों का कहना है कि, ये केजरीवाल और अन्ना हजारे पैदा ही किये गएँ हैं सिर्फ श्री बाबा रामदेव व मोदीजी की जड़ खोदने के लिए, इसलिए जब तक पब्लिक में एक आदमी भी इनको सुनेगा तब तक ये मोदी जी, श्री बाबा रामदेव सरीखे हर सच्चे देशभक्त के खिलाफ जहर ही उगलते रहेंगें और अप्रत्यक्ष रूप से खानदान विशेष की पार्टी के एजेंडे को ही आगे बढ़ाते रहेंगे !

345ये हजारे और केजरीवाल इस कदर मोदी जी जैसे देशभक्तों के विरोधी हैं कि क्या नैतिक है और क्या अनैतिक इन सब बातों की परवाह किये बिना, केंद्र सरकार द्वारा देश के लिए घातक तत्वों को दण्ड देने की प्रक्रिया में भी बार बार विघ्न पैदा करते हैं !

जिस जनता ने वोट देकर मुख्य्मंत्री बनाया है उसकी जरूरतों को समझने की बजाय, दिन रात अथक मेहनत करने वाले तपस्वी प्रधानमंत्री के चरित्र पर कीचड़ उछालने के लिए मीडिया में रोज तरह तरह की नयी हवाबाजी करना और उसी में निरीह जनता को उलझाये रखना ही इनका बेसिक चरित्र है !

वैसे भी नीतिगत वचन है कि जनता में उपस्थित अधिकाँश लोग जब तक सही गलत का फैसला अपने दिमाग से नहीं, बल्कि दूसरों से सुनी और देखी बातों पर करते रहेंगे तब तक पूरी जनता धूर्तों की धूर्ततता का शिकार होती रहेगी !

दुनिया को दिखाने के लिए कि,  केजरीवाल और उसकी जन्मदाता खानदान विशेष की पार्टी में कोई सांठ गांठ नहीं है, अन्ना, केजरीवाल और इस पार्टी के लोग बीच बीच में आपस में एक दूसरे के खिलाफ कुछ बयान देते रहते हैं पर अब हजारों सबूत इनके आपसी गठजोड़ के दुनिया के सामने सोशल मीडिया में उजागर हो चुकें हैं !

आज सोशल मीडिया होने की वजह से सच्चाई को पूरी तरह से छिपाया नहीं जा सकता है क्योंकि सच्चाई अब सिर्फ प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की मोहताज नहीं रह गयी है !

वास्तव में हर एक सच्चे इन्सान को सच्चे इतिहास का पता होना बहुत जरूरी होता है क्योंकि ये सर्वकालिक सत्य है कि “हिस्ट्री रिपिट्स इटसेल्फ”, अतः इतिहास का ज्ञान भविष्य में होने वाले कई सवेंदनशील खतरों से निपटने में बहुत मदद कर सकता है !

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