माँ …….

zxcमाँ आज तुम मेरे पास नहीं हो

फिर भी मै अकेला नहीं हू

क्योकी जब भी कभी मै किसी अनदेखी

अनछुई तपिश में घिरता हूँ

तुम्हारी ममता की छाँव

मुझे सहला जाती है

और जब भी मेरे कदम गलत दिशाओ की ओर उन्मुख होते है

तुम्हारे मधुमिश्रित नीतिवाक्य वापस उन्हें मोड़ लेते है

जब भी मै आत्मश्लाघा की प्रवंचना से छला जाता हूँ

तुम्हारी पावन मूर्ति की उजास मुझे सत्य का आईना दिखाती है

माँ आज तुम मेरे पास नहीं हो फिर भी मै अकेला नहीं हूँ……..

लेखिका –
श्री देवयानी

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