कविताये – प्राप्ति – (लेखक – सूर्यकांत त्रिपाठी निराला)

· February 7, 2014

suryakant_tripathi_niralaतुम्हें खोजता था मैं,

पा नहीं सका,

हवा बन बहीं तुम, जब

मैं थका, रुका ।

 

मुझे भर लिया तुमने गोद में,

कितने चुम्बन दिये,

मेरे मानव-मनोविनोद में

नैसर्गिकता लिये;

 

सूखे श्रम-सीकर वे

छबि के निर्झर झरे नयनों से,

शक्त शिरा‌एँ हु‌ईं रक्त-वाह ले,

मिलीं – तुम मिलीं, अन्तर कह उठा

जब थका, रुका ।

facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail


ये भी पढ़ें :-