बहुत आसान है पथ भ्रष्ट हो जाना

olअब ये समस्या महामारी का रूप पकड़ रही है और इसका अधिकतम श्रेय जाता है टी वी, सिनेमा, इन्टरनेट, मैग्जीन्स आदि को !

टी वी, सिनेमा, इन्टरनेट, मैग्जीन्स आदि बुरी चीज नहीं हैं पर इसका बुरा इस्तेमाल बुरी चीज है ! और इसका परिणाम कितना ज्यादा खतरनाक हो सकता है, इसके बारे में एक मिनट रुक कर सोचने की फुर्सत किसी को नहीं हैं !

विदेशों में तो था ही पर अब भारत में भी परिवार वाद समाप्त हो रहा है जिसकी कई वजहों में से एक बड़ी वजह है पति या पत्नी का किसी गैर से अमर्यादित सम्बन्ध !

ये समस्या पहले पुरुषों के साथ ज्यादा सुनने को मिलती थी पर अब ये महिलाओं के साथ भी सुनने को मिल रही है !

घर की महिलाओं को तो कम, पर बाहर जाकर काम करने वाली महिलाओं को अक्सर पुरुष साथियों के साथ काम करना पड़ता है और एक सामान्य ह्यूमन नेचर (मानव स्वभाव) की तहत साथ काम करने वाले लोगों के प्रति मन में एक भावनात्मक सम्बन्ध डेवलप हो जाता है ! ये सम्बन्ध प्यार, नफरत या उदासीनता का भी हो सकता है !

जब कभी ये सम्बन्ध अपनी मर्यादा का उलन्घन करता हैं, रिश्तों में दरार आती है ! क्योंकि कोई भी पुरुष या स्त्री कभी भी उस जीवन साथी के लिए दिल से समर्पित नहीं हो सकती जिसका दूसरे स्त्री या पुरुष से अमर्यादित सम्बन्ध हो !

आदमी या औरत कितना भी मॉडर्न, फ्रैंक या हाई स्टेटस का बनने की कोशिश करे पर वो अपने जीवन साथी की चरित्र हीनता पसंद नहीं कर सकता !

हालात इतने बिगड़ चुके हैं की कुछ लोग अपने जीवन साथी की बेवफाई जानते हुए भी चुप रहते हैं क्योंकि उनका खुद किसी दूसरी जगह चक्कर चल रहा होता है !

ऐसे अमर्यादित सम्बन्ध रखने वाले लोगों को अपने जीवन साथी के लिए समय निकालना या अपने जीवन साथी का कोई काम, मदद करना धीरे धीरे भारी लगने लगता है और स्वभाव भी बदल जाता है ! ऐसे लोग अपने जीवन साथी को बेवकूफ बनाने के लिए या तो ज्यादा मीठा बोलने लगते हैं या जीवन साथी से मुक्ति पाने के लिए ज्यादा चिड़चिड़े झगड़ालू हो जाते हैं !

अपने अमर्यादित सम्बन्धों को सफल बनाने के लिए ऐसे लोग ज्यादातर अपनी फाईनेन्सियल कंडीशन (पैसे की व्यवस्था) को मजबूत करने के लिए भी फिक्रमंद होते हैं जिससे परिवार वाले अगर उन्हें त्याग दें तब भी उनका गुजारा चलता रहे !

हालाँकि कई बार लोग अपने जीवन साथी की किसी बड़ी बुराई या कमी के चलते भी गैर से सम्बन्ध बनाते हैं !

भारत जैसे संस्कारों के जनक देश में इस स्तर की अराजकता या व्याभिचार इतने बड़े पैमाने पर होना नयी बात है क्योंकि सिनेमा, टी वी आदि के भारत में आगमन से पहले तक इस तरह की घटनाएं ना के बराबर हुआ करती थी !

जब लोग गलत सही की परिभाषा भी अपनी सुविधा के हिसाब से तय करने लगे तो सबसे पहला खतरा उन्हें और उनके परिवार को ही है !

किसी भी परिस्थिति में एक स्त्री या पुरुष का, एक से ज्यादा स्त्री या पुरुष के साथ, एक ही समय में अमर्यादित सम्बन्ध को सही नहीं ठहराया जा सकता है और जो लोग ये सब सोचते हैं कि, इसमें कोई बुराई नहीं है, चलता है आज के जमाने में, सबसे जरूरी चीज है पर्सनल सैटिसफैक्शन, आदि आदि, निश्चित तौर पर उनका भविष्य खतरनाक अन्जाम की तरफ बढ़ने लगता है !

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