सावधान ! इस बार ऊष्मा तरंगे चलने वाली हैं

lkoऊष्मा तरंगे (Heat waves) खतरनाक होती हैं और इनके चलने पर बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ते हैं ! अत्यधिक गर्मी पड़ने से जितने भी रोग उभर सकते हैं (dehydration, sun burn, sun allergy, sun stroke, heat exhaustion, brain Fever etc) उन सारे रोगों से इस बार सावधान रहने की जरूरत है !

भारत समेत अन्य देशों की पूर्ववर्ती कई भ्रष्ट सरकारों ने ग्लोबल वार्मिंग (global warming) पर भाषण तो बहुत दिया पर काम कुछ नहीं किया जिसका नतीजा अब आम जनता झेलने जा रही है, खासकर गरीब तबका जिनकी मजबूरी होती है अपने पेट की आग बुझाने के लिए जाड़ा, गर्मी, बरसात हर मौसम में बाहर निकलकर मेहनत करना !

भारत में ही कई जगह तापमान 50 डिग्री (50 degree) से भी ऊपर जाने का आसार है जिसकी वजह से बड़ी संख्या में स्वास्थ्य हानि होने की सम्भावना है !

अब तक जो बिगड़ गया वो बिगड़ गया, पर अब से जो सम्भाला जा सकता है उसे जरूर सम्भालना चाहिए ! ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए, कई देशों को प्रेरणा देकर व उन्हें अपने साथ मिलाकर, बड़े पैमाने पर कई नए नए प्रयास किये जा रहें हैं बुद्धिमान प्रधानमंत्री मोदी जी की अध्यक्षता में, पर हम देश वासियों को भी कुछ ना कुछ प्रयास जरूर करना चाहिए इसे कम करने के लिए !

आखिर हम साधारण लोग क्या कर सकते हैं इस अति विराट प्रकृति के क्रोध को शांत करने के लिए ?

oiuजैसे बूँद बूँद से समुद्र भरता है उसी तरह हम सभी विश्व वासी अपने सम्मिलित प्रयास से प्रकृति को फिर से वापस उसी सुन्दर रूप में पंहुचा सकते हैं जिस रूप में आज से कुछ सौ साल पहले हुआ करती थी !

हमें सिर्फ ये 6 साधारण काम करने की जरूरत हैं जिससे दुनिया फिर से खूब हरी भरी और सुन्दर हो जायेगी –

1- जहाँ भी खाली जगह मिले और जब भी फुर्सत मिले, तुरन्त पेड़ लगाईये और जब तक वो पौधा 8 – 10 फीट लम्बा ना हो जाय उसकी रक्षा और देखभाल जरूर करिए !

2-   1-1 बूँद पानी की कीमत समझिये ! जितने कम से कम पानी में नहाना – खाना हो जाय, रोज रोज बस उतने ही पानी का इस्तेमाल करिए !

3- पशुधन की कीमत समझिये और सिर्फ मांस खाने के लिए उन निर्दोषों को मत मारिये ! चाहे कोई भी जानवर हो (मुर्गा, बकरा, सूअर आदि) उन सबका मल मूत्र बहुत ही उत्तम क्वालिटी का खाद होता है ! इसलिए जमीन में रासायनिक खाद और कीटनाशक डालने की बजाय जानवरों का मल मूत्र डालिए और अन्न (cereal) की पैदावार खूब बढाइये ! मीट उद्योग, मीट को प्रॉसेस करने में बहुत पानी बर्बाद करते हैं जिसकी वजह से भी विश्व व्यापी जल संकट पैदा हो गया है।

4- घरों में जो जो भी रासायनिक साबुन, शैम्पू, क्रीम, फेस पाउडर, वाशिंग पाउडर आदि इस्तेमाल होता है वो सब अन्ततः नहाने के बाद पानी से बहकर जमीन में ही जाता है उसके अलावा फैक्ट्री, मिलों से निकलने वाला हर छोटा बड़ा केमिकल भी जमीन में ही जाता है और ये सारे केमिकल्स जमीन में जाकर उसकी उर्वरक क्षमता का धीरे धीरे नाश करते हैं ! हमारी धरती माँ किसी भी तरह के केमिकल को सोखने के लिए नहीं बनी है और अगर इसी तरह हर घर और फैक्ट्रियों की नालियों से रोज रोज केमिकल्स धरती में समाता रहा तो, जो कैंसर आज हर तीसरे घर में किसी को मार रहा है, वही कैंसर बहुत जल्द ही हर एक आदमी को मारेगा ! इसलिए घरों में सिर्फ सौ प्रतिशत आयुर्वेदिक सामानों का ही प्रयोग करिए !

5- सड़कों पर कूड़ा इधर उधर मत फेकिये क्योंकि यही कूड़ा बारिश के पानी में बहकर नदी तक पहुच जाता है और फिर पूरे पर्यावरण (ecosystem) को प्रभावित करता है ! अगर आपके गली मुहल्ले में डस्टबिन (कूड़ादान) नहीं है तो कृपया अपने पैसे से डस्टबिन खरीद कर सड़क पर रख दीजिये (जहाँ जिंदगी में इतना पैसा अपने और अपने परिवार पर खर्च किया, वहीँ थोड़ा पैसा पूरी मानवजाति के लिए खर्च करके पुण्य अर्जित करने का मौका न चूकिए) !

6- ग्रीन हाउस गैसेस का उत्सर्जन करने वाले सामानों का कम से कम इस्तेमाल करें ! ये ग्रीन हाउस गैसेस बहुत बड़ी कारण हैं पृथ्वी के तापमान में परमानेंट बढ़ोत्तरी होने की और ये मुख्यतः पैदा होती हैं पेट्रोल, डीजल, ए सी, फ्रीज, कंप्यूटर, कारखानों, मिलों आदि से ! आज के युग में कंप्यूटर से ही कई लोगों की रोजी रोटी चल रही है इसलिए इसका उपयोग बहुत ज्यादा कम कर पाना मुश्किल है लेकिन फ्रीज की जगह घड़े का पानी और ए सी की जगह कूलर का प्रयोग किया जा सकता है ! वैसे भी फ्रीज के ठन्डे पानी का लम्बा इस्तेमाल शरीर में गिल्टियाँ पैदा करता है जो बाद में कैंसर में भी बदल सकती है तथा ए सी की ठण्डी हवा में रोज लम्बे समय तक रहने से हड्डियां कमजोर होती है जिससे उनका हल्की सी भी चोट या झटके पर टूटने का भय बना रहता है !

2-narayanThirsty_Cowतो इस गर्मी में जब भी घर से बाहर निकलिए खूब पानी पी कर निकलिए और हाँ अगर हो सके तो अपने घर, दुकान के सामने प्यासे गरीब लोगों और बेसहारा पशुओं के पीने के लिए साफ़ पानी और बताशे की व्यवस्था करना ना भूलिए !

“ना जाने किस भेष में मिल जाय नारायण” मतलब, सन्त जनों का वचन है कि जहां भी शुद्ध सेवा भाव से परोपकार का काम होता है वहां नारायण किसी भी भेष में अचानक से पहुचते जरूर हैं !

हो सकता है आपके द्वारा बाटे जाने वाले पानी को पीने खुद नारायण, किसी गरीब भिखारी या प्यासे पशु के रूप में पहुँच जाय और पिए गए पानी के साथ आपका कोई बड़ा दुर्भाग्य भी लेते जाएँ !

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