आश्चर्यजनक तृतीय नेत्र कब खुलता है

9103296900_6ea977cde0_oदोनों आँखों के बीच में जिसे भ्रूमध्य कहते हैं, वहां पर तृतीय नेत्र (third eye) सूक्ष्म रूप में मतलब अदृश्य रूप में स्थित होता है ! इस तृतीय नेत्र को साधना के माध्यम से जगाना पड़ता है ! ये साधना कई प्रकार की होती है और कहने को साधक अपनी रूची के हिसाब से कोई साधना चुनता है पर उसके पीछे दैवीय प्रेरणा होती है ! भक्ति साधना (bhakti sadhana), योग साधना (Yoga Practice), कर्म साधना (karma kriya) आदि सभी साधनों से तृतीय नेत्र जागता है !

इन सभी साधना का एक मात्र उद्देश्य यही होता है दिमाग की सफाई मतलब दिमाग में जितने कम गंदे और गलत विचार (जैसे – क्रोध, लालच, ईष्या, जलन, निराशा, दुःख, वासना) होंगे उतना जल्दी तृतीय नेत्र जागता है !

ऊपर लिखी साधना करने से दिमाग में गलत विचार पैदा होने बंद होने लगते है और आदमी हर समय अपने आप को पहले से ज्यादा पवित्र, तरोताजा, खुश और फुर्तीला महसूस करने लगता है !

साधना में थोड़ा सा आगे बढ़ने पर, जब आदमी आँखे बंद करता है तो उसे भ्रूमध्य में धुंधली सी सफ़ेद रोशनी दिखाई देती है जो बार बार अपना रंग बदलती है या गायब हो जाती है ! कुछ दिन बाद ये रोशनी एक गोलाई का रूप लेकर सूर्य के रूप में बदल जाती है और ये सूर्य भी बार बार अपना रंग बदलता है ! इसी सूर्य को ही हमारे हिन्दू धर्म में तृतीय नेत्र कहा गया है पर ये अभी भी पूरी तरह से जागृत अवस्था में नहीं है ! पर इस अवस्था में भी साधक को स्वप्न में या कभी कभी प्रत्यक्ष रूप से कुछ विचित्र दृश्य दिखाई दे सकते हैं जिनसे घबड़ाना नहीं चाहिए !

जब साधक अपनी साधना के पथ पर और आगे बढ़ता है तो ये सूर्य अचानक से पूरा 360 डिग्री पर घूमता है और इस दौरान एक काला सूर्य (Black sun) दिखाई देता है ! ये काला सूर्य बहुत रहस्यमय होता है और इसके बारे में हमारे धर्म ग्रन्थ ज्यादातर चुप ही रहते हैं ! हिन्दू धर्म में कहा गया है कि ” यत ब्रह्माण्डे तत पिण्डे ” जिसका मतलब यही होता है की इस ब्रह्माण्ड में जो कुछ भी है वो सब कुछ मानव शरीर के अन्दर मौजूद है ! प्राप्त जानकारी के अनुसार काला सूर्य, वास्तव में वास्तविक लाल सूर्य के बहुत तेजी से अपने अक्ष पर घूमने से पैदा होने वाले प्रबल चुम्बकीय आघूर्ण से उत्पन्न आभासी महसूस होने वाला सूर्य है ! ये काला सूर्य ही देवी काल रात्रि (devi kalratri) हैं या हिरण्यगर्भ का कोई और रूप, इसकी जानकारी सिर्फ विशिष्ट शक्ति धारक साधक ही जानते हैं ! आजकल नासा के अन्तरिक्ष वैज्ञानिक जिस डार्क मैटर (dark matter) की बात करते है वास्तव में वो कोई और नहीं देवी कालरात्रि ही हैं जिनसे ही सारा ब्रह्माण्ड निकल कर वापस उन्हीं में समाता हुआ दिखाई देता है !

काले सूर्य के घूर्णन के बाद शुरू होता है तृतीय नेत्र की असली शक्तियों का महसूस होना और उस शक्ति से ईश्वर को छोड़कर जो भी देखना चाहें, जिसे भी देखना चाहें, आंख बंदकर, संकल्प कर आसानी से देखा जा सकता है और सुना भी जा सकता है !

तृतीय नेत्र जागना वैसे तो साधारण आदमी के लिए बहुत बड़ी सिद्धि है पर जब साधक, भगवान् की बनायीं हुई सबसे बड़ी साधना, (kundalini shakti awakening) कुण्डलिनी जागरण (third eye opening or third eye activation) को सफलता पूर्वक पूर्ण करता है तो उसे जो महान सिद्धि मिलती है उसके आगे तृतीय नेत्र जागरण आदि की सिद्धि कहीं भी नहीं टिकती !

facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail
loading...


ये भी पढ़ें :-