आप कैसे दिखतें हैं और क्या सोचतें हैं, ये भी बता सकता है आयुर्वेद

453617106_d1आयुर्वेद में हर छोटी सी छोटी चीज का बहुत विस्तृत वर्णन है जिसे समझना सबकी बस की बात नहीं है क्योंकि एक तो ये क्लिष्ट देवभाषा संस्कृत के गूढ़ सूत्रों में लिखी है ऊपर से किसी नयी चीज को समझने से पहले पूर्व की कई चीजों को समझना पड़ेगा जो बिना किसी विद्वान् वैद्य आचार्य की कृपा के संभव नहीं है |

आयुर्वेद में जो समस्त रोगों का आधार बताया गया है वो है वात, पित्त और कफ का कुपित होना | इन्ही वात, पित्त और कफ से हर आदमी की मूल प्रकृति या स्वभाव तय होते है |

चूँकि आयुर्वेद में इसके बारे में बहुत ज्यादा लिखा गया है जिसका पूरा वर्णन यहाँ संभव नहीं है, इसलिए इसकी संक्षिप्त जानकारियां निम्न लिखित है –

वात प्रकृति के लोग – कम बाल वाले, दुबले शरीर वाले, रुखा और ज्यादा बोलने वाले, चंचल स्वभाव वाले होते है | वो नींद में अक्सर आकाश में उड़ने का सपना देखते है |

पित्त प्रकृति के लोंग – कम उम्र में ही सफ़ेद बालों वाले, बुद्धिमान और क्रोधी होते है | इनको पसीना ज्यादा होता है और ये नींद में अक्सर आग, चाँद, तारा का सपना देखते है |

कफ प्रकृति के लोग – दयालु, गंभीर, साहसी, मोटे शरीर वाले, चिकने बालों वाले होते है | ये नींद में अक्सर पानी, तालाब, नदी आदि का सपना देखते है |

मिश्र प्रकृति के लोग – मिले हुए लक्षणों या दोषों वाले होते है | अगर दो के मिश्रण से हों तो द्विदोषज और अगर तीन के मिश्रण से हों तो त्रिदोषज कहलाते हैं |

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