आधुनिक भारत के आदरणीय सन्त गण

· March 26, 2015

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श्री स्वामी राजेन्द्र दास जी महाराज –

बाबा राजेन्द्र दास जी महाराज की गणना भारत के उच्तम विद्वानो में से की जाती है।

ये वृन्दावन में स्थित गोपेश्वर महादेव मन्दिर के निकट मलूक पीठ के अध्यक्ष है और कई सामाजिक सहायतार्थ कार्यो में अनवरत सक्रीय रहते है।

गो सेवा, भूखो को भोजन प्रबंध कराना, बीमारो का मुफ्त इलाज, जिज्ञासुओ को ज्ञान प्रदान करना आदि अनगिनत परोपकारार्थ कार्य, प्रतिदिन इनके निर्देशन में होता है।

 

 

 

 

 

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श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री जी –

 

श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री जी का जन्म वृन्दावन में बाबा हरिदास जी के वंश में हुआ है। बाबा हरिदासजी को कृष्ण भगवान की नित्य सखी श्री ललिता देवी का अवतार माना जाता है। श्री मृदुल जी एक प्रख्यात कृष्ण भक्त, गो सेवक और समाज सुधारक है। वृन्दावन में इनका निजी विशाल मंदिर है जो राधा सनेह मंदिर के नाम से विख्यात है और बाँके बिहारी मंदिर के समीप ही स्थित है।

श्री मृदुल जी के भजन इतने मधुर होते है की बरबस श्रोताओ के मन को मोह लेते है और अंतरंग में कृष्ण भक्ति जागृत करते है। कृष्ण भक्त पूरे विश्व में इनके द्वारा श्रीमत् भागवत महापुराण का पाठ करवाते है जिसका प्रसारण इन्ही के निजी टी वी चैनल – आध्यात्म टी वी पर प्रतिदिन होता है। इनके पुत्र श्री गौरव कृष्ण शास्त्री जी भी इन्ही के समान तेजस्वी है।

 

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श्री बाबा रामदेव जी –

 

हरियाणा में सैयदपुर गाँव श्री रामनिवास यादव के घर श्री रामदेव का जन्म हुआ। सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक पढाई पूरी करने के बाद श्री रामदेव ने खानपुर गाँव के एक गुरुकुल में आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बल्देव जी से संस्कृत व योग की शिक्षा ली।श्री बाबा रामदेव ने युवा अवस्था में ही सन्यास ले लिया। 

श्री स्वामी रामदेव ने सन् २००६ में महर्षि दयानन्द ग्राम हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के अतिरिक्त अत्याधुनिक औषधि निर्माण इकाई पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड नाम से दो सेवा प्रकल्प स्थापित किये। इन सेवा केन्द्रो के माध्यम से श्री स्वामी रामदेव योग, प्राणायाम, अध्यात्म आदि के साथ-साथ वैदिक शिक्षा व आयुर्वेद का भी प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।

उनके प्रवचन विभिन्न टी० वी० चैनलों जैसे आस्था टीवी, आस्था इण्टरनेशनल, जी-नेटवर्क, सहारा-वन तथा इण्डिया टी०वी० पर प्रसारित होते हैं। भारत में भ्रष्टाचार और इटली एवं स्विट्ज़रलैण्ड के बैंकों में जमा लगभग ४०० लाख करोड़ रुपये के “काले धन” को स्वदेश वापस लाने की माँग करते हुए श्री बाबा ने पूरे भारत की एक लाख किलोमीटर की यात्रा भी की। भ्रष्टाचार के खिलाफ श्री बाबा रामदेव जी अनवरत लड़ाई जारी है और राष्ट्र निर्माण में भी वो प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं ।

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श्री अवधेशानन्द गिरी जी महाराज –

 

श्री अवधेशानन्द गिरी जी महाराज जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर है।

भारत के तपस्वी गण में इनका नाम बहुत श्रद्धा से लिया जाता है। अनगिनत लोगो की ज्ञान पिपासा शांत करके इन्होने, उन्हें भोग मार्ग छोड़ कर तप का मार्ग दिखाया।

हर तरह के सामाजिक सुधार के कार्यक्रम इनके देखरेख में नियमित रूप से होते है। हरियाणा के अम्बाला जिले में इनके सेवाओ के केंद्र है। इनके दर्शन, श्रवण और वार्ता करने से मन को बहुत संतोष मिलता है।

 

 

 

 

 

 

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श्री डॉक्टर प्रणव पण्ड्या जी –

 

श्री डॉक्टर प्रणव पण्ड्या जी गायत्री परिवार (हरिद्वार) के प्रमुख है और इनकी धर्मपत्नी- श्रीमती शैलबाला पण्ड्या जो की वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं.श्रीराम शर्मा आचार्य की सुपुत्री है। श्री पण्ड्या जी का जन्म- 8 नवम्बर 1950 (रूप चतुर्दशी) को हुआ।

इन्होने एम.जी.एम.मेडिकल कॉलेज इन्दौर से जनवरी 1972 में एम.बी.बी.एस. उत्तीर्ण किया । इसी संस्था से दिसम्बर 1975 में मेडीसिन में एम.डी.की उपाधि तथा स्वर्ण प्रदक प्राप्त किया । अमेरिका से आकर्षक पद का प्रस्ताव आया, किन्तु भारत में ही रहकर सेवा करना उचित समझा ।

विद्यार्थी जीवन में न्यूरोलॉजी तथा कार्डियोलॉजी के प्रख्यात विशेषज्ञों से जुड़कर मार्गदर्शन प्राप्त किया । अनुसंधान-पत्र प्रकाशित हुए तथा सायकोसोमेटिक व्याधियों के उपचार में विशेष रुचि ली ।

जनू 1976 से सितम्बर 1978 तक भारत हैवी इलैक्ट्रिकल्स हरिद्वार तथा भोपाल के अस्पतालों में इन्टेंसिव केयर यूनिट के प्रभारी रहे ।
युग निर्माण योजना मिशन से 1963 में सम्पर्क में आये । सन् 1969 से 1977 के बीच गायत्री तपोभूमि मथुरा तथा शंतिकुंज हरिद्वार में लगे कई शिविरों में भाग लिया । सितम्बर 1978 में नौकरी त्याग पत्र देकर स्थायी रूप से हरिद्वार आ गये ।

परम पूज्य गुरुदेव पं.श्रीराम शर्मा आचार्य जी के मार्गदर्शन एवं संरक्षण में अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय हेतु ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान हरिद्वार की स्थापना जून 1978 में की । तब से इस संस्थान के निदेशक हैं । इस संस्था की आधुनिक प्रयोगशाला में पूज्य गरुदेव के मार्गदर्शन में साधना के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रयोग किये जा रहे हैं । अभी तक शांतिकुंज आए हुए अस्सी हजार से अधिक साधकों पर यह प्रयोग-परीक्षण किये जा चुके हैं । संस्थान सभी आवश्यक विषयों पर पचास हजार से अधिक पुस्तकों के पुस्तकालय से सुसज्जित है ।

अखण्ड-ज्योति हिन्दी तथा अन्य 8 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित उसकी सहयोगी पत्रिकाओं, जिनकी सदस्यता लगभग पच्चीस लाख है, के सम्पादक है।

इन्होने 74 देशों में गायत्री परिवार की शाखाओं की स्थापना की । कैम्ब्रिज, ऑक्सफोर्ड, हार्वर्ड, यू.सी.एल.ए. तथा अनेक विश्वविद्यालयों में भारतीय संस्कृति के वैज्ञानिक पहलू प्रस्तुत करने के लिए सम्मेलनों, सेमिनार्स का आयोजन किया । अमेरिका, कनाडा, इंग्लैण्ड, डेनमार्क, नर्वे, आस्ट्रेलिया, तंजानिया, केन्या, दक्षिण अफ्रीका, जिम्बावे, फ़िजी, न्यूजीलैण्ड आदि देशों में भारतीय संस्कृति, गायत्री तथा यज्ञ के दर्शन एवं व्यवहारिक अध्यात्म का पक्ष प्रचार-प्रसार किया । लीस्टर (यू.के.), टोरण्टो (कनाडा), लॉस एंजिल्स (यू.एस.ए.), मॉण्ट्रियल (कनाडा), शिकागो (यू.एस.ए.) में तथा भारत के अनेक नगरों में सम्पन्न हुए अश्वमेध यज्ञों के आयोजन सम्पादन में प्रमुख भूमिका निभायी। गायत्री मन्त्र और इसके द्वारा होने वाले अनन्त लाभो को जन – जन तक पहुचाने के लिए आज भी प्रतिदिन इस उम्र में भी कठोर मेहनत करते है।

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श्री डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी जी –

 

श्री डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी जी की तुलना अगर राष्ट्र नीति पर काम करने वाले राष्ट्र सन्त श्री आचार्य चाणक्य से किया जाय तो बिल्कुल गलत न होगा।

अपने कई लेखों के कारण उन्हें भारी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा, पर इन आलोचनाओं की परवाह न करते हुए वे अपना काम करते रहे और एक सच्चे राजनीतिज्ञ और प्रचण्ड देशभक्त के रूप में जनता की प्रशंसा के पात्र बने। श्री स्वामी जी ने देश के कई बड़े घोटालों को उजागर करने में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इनके पिता श्री सीताराम सुब्रमण्यम मदुरई, तमिलनाडु से थे और भारत सरकार के सचिव थे और उनकी माता केरल से थीं। डॉ॰ सुब्रह्मण्यम् स्वामी जी का जन्म: 15 सितम्बर 1939 चेन्नई में हुआ था। ये जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। वे सांसद के अतिरिक्त 1990-91 में वाणिज्य, विधि एवं न्याय मन्त्री और बाद में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार आयोग के अध्यक्ष भी रहे। 1994-96 के दौरान विश्व व्यापार संगठन के श्रमिक मानकों के निर्धारण में उन्होंने प्रभावी भूमिका निभायी।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने साइमन कुजनैट्स और पॉल सैमुअल्सन के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर शोध कार्य किया और फिर पॉल सैमुअल्सन के साथ संयुक्त लेखक के रूप में इण्डैक्स नम्बर थ्यौरी का एकदम नवीन और पथ प्रदर्शक अध्ययन प्रस्तुत किया।

वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विजिटिंग फैकल्टी मैम्बर भी रहे हैं। वे ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अपने आदर्शों के लिए निर्भीक होकर संघर्ष किया है। भारत में आपातकाल के दौरान संघर्ष, तिब्बत में कैलाश-मानसरोवर यात्री मार्ग खुलवाने में उनके प्रयास, भारत-चीन सम्बन्धों में सुधार, भारत द्वारा इजरायल की राजनैतिक स्वीकारोक्ति, आर्थिक सुधार और हिन्दू पुनरुस्थान आदि अनेक उल्लेखनीय कार्य उन्होंने किये हैं।

श्री स्वामी जी ने स्वेच्छा से राष्ट्रहित को सर्वोपरि समझते हुए अपनी पार्टी का विलय भारतीय जनता पार्टी में कर दिया। अपने राजनीतिज्ञ, एकेडमिक और अर्थशास्त्र के करियर के अलावा डॉ. स्वामी ने कई पुस्तकों, शोधपत्रों और पत्रिकाओं को भी लिखा है। इतने उच्च पदो पर रहने और इतनी ख्याती प्राप्त करने के बावजूद इनकी निजी दिनचर्या एक तपस्वी सन्त के समान है जो की इनकी असली विद्वत्ता का परिचायक है। अब वे एकनिष्ठ होकर देश सेवा में ही अपना पूरा समय व्यतीत कर रहे है।

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