अगर आडम्बरपूर्ण भक्ति से मन भर गया हो तो देवी की आवाज सुनने की कोशिश करनी चाहिए

juhy“आँख के अंधे, नाम नयन सुख” यही हाल है उन अधिकांश लोगों का जो सच्ची भक्ति की जगह आडम्बर के माया जाल में ही भटक कर रह जाते हैं !

अभी नवरात्रि शुरू हुआ है और भक्ति के नाम पर ऐसे ऐसे लोग प्रपंच, मंदिरों में फैला रहें हैं जिन्हें मालूम ही नहीं की भक्ति क्या है और ईश्वर क्या है !

मंदिर में जाकर सिर्फ रुपया चढ़ा कर भगवान् को खुश करने की इच्छा रखने वालों को ये समझने की जरूरत है कि भगवान् कोई भ्रष्ट अधिकारी या नेता नहीं हैं जो इन सोना चांदी रुपया पैसा की रिश्वत से खुश हो जायेंगे !

नवरात्रि, नौ महान रातें होती हैं, आदिशक्ति जगदम्बा के 9 विशेष लीला चरित्र के मनन करने की, ना की खूब धन दौलत खर्च कर देवी को रिझाने की !

वैसे तो देवी जगदम्बा के हर रूप का महत्व अनन्त है जिन्हे आज के हम कलियुगी प्राणी पूरी उम्र प्रयास करके भी नही समझ पायेंगे पर देवी के हर अवतार की कुछ विशिष्ट खूबियाँ हैं जिन्हें हर देवी भक्त को जानना जरूरी है !

देवी शैलपुत्री, पर्वतराज हिमालय की बेटी हैं और पर्वत राज हिमालय प्रतीक हैं अपनी प्रचण्ड सहन शक्ति के ! देवी शैलपुत्री की भक्ति करने के लिए सबसे पहली पात्रता यही है की अपनी सहन शक्ति को बढ़ाना ! आज के लोगों में सहन शक्ति इतनी कम हो चुकी है कि लोग मामूली सी बातों पर नाराज होकर मार पीट पर उतारू हो जाते हैं !

हर स्त्री देवी का स्वरुप बन सकती है पर हो क्या रहा है आजकल, एक दिन काम करने वाली नौकरानी घर ना आयें, या घर में कोई सुख सुविधा का समान घट जाय तो बहुत सी पत्नियाँ ऐसी हैं जिन्हे इतना ज्यादा गुस्सा आने लगता है कि वे बात बात पर अपने पति व घर के अन्य सदस्यों से बेवजह झगड़ कर बात करने लगती हैं, जिससे ऐसा भी देखा गया है कि पति व घर के अन्य सदस्य खिन्न होकर कुछ देर शांति पाने के लिए घर से बाहर निकल जाते हैं !

ऐसी असहनशील स्त्रियाँ और पुरुष अगर नवरात्रि के पहले दिन देवी शैल पुत्री की पूजा करें तो क्या देवी शैलपुत्री उन से थोड़ा भी खुश हों सकेंगी ?

नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है और उनकी पूजा करने वालों की भीड़ में ऐसे लोग भी पहुचतें हैं जिनका हिसाब यही रहता है कि, जहाँ देखी नारी वहीँ आँख मारी ! देवी ब्रह्मचारिणी कौन है यह बहुत से लोगों को पता ही नहीं है ! देवी ब्रह्मचारिणी वही सती नारी हैं जिन्होंने 3000 सालों तक भूखे रहकर अखण्ड ब्रह्मचर्य का पालन किया था !

अतः ऐसे कुटिल मानसिकता वाले पुरुष जो मन ही मन हमेशा परायी स्त्रियों के लिए गन्दा भाव रखते हैं, वो जब इतनी पवित्र देवी की पूजा करने मन्दिर जाते हैं तो क्या देवी उनको देखकर खुश होंगी ? व्याभिचार के मामले में इस कलियुग में कुछ स्त्रियाँ भी मर्दों से ज्यादा पीछे नहीं रह गयी हैं ! पुरुषों से VIP रिस्पांस पाने के लिए कुछ लड़कियां छोटे, अश्लील, भड़काऊ कपड़े पहन कर घर से बाहर निकलती हैं पर उनके द्वारा सम्मान पाने का यह शार्ट कट कभी भी उन पर भारी पड़ सकता हैं क्योंकि कब किस शरीफ से दिखने वाले आदमी के अन्दर का भी राक्षस भड़क जाय यह कोई नहीं जान सकता है और कई बार तो रक्षक ही भक्षक बन जाते हैं मसलन अखबारों में ऐसी भी वारदातें पढने को मिलती है कि, किसी सिक्योरिटी गॉर्ड, किसी पुलिस कर्मी या किसी नेता आदि ने महिलाओं से सार्वजनिक भीड़ भाड़ वाले स्थानों तक पर भी गलत काम करने की कोशिश की !

किसी महिला के साथ कोई अभद्र काम हो जाय तो उसे उस सदमे से उबरने में कई साल लग सकते है या कोई महिला किसी शरीफ आदमी पर फर्जी छेड़छाड़ का आरोप लगा कर उसे बदनाम कर दे तो उस आदमी को भी उस सदमे से बाहर निकलने में कई साल लग सकते हैं ! ये अश्लीलता का माहौल दो धारी तलवार की तरह होता है जो अश्लीलता फ़ैलाने वाले और अश्लीलता झेलने वाले, दोनों लोगों को देर सवेर घायल जरूर कर देता है !

कुछ मूर्ख लोगों का कहना है कि इतने बड़े देश में अगर 1 – 2 महिलाओं के साथ कोई अशोभनीय काम हो जाता है तो इसमें कौन सी बड़ी बात है ! इन मूर्खों को ये नहीं पता कि सिर्फ 1-2 महिलाओं के साथ ही अशोभनीय काम नहीं हो रहा है बल्कि वास्तविक सच्चाई का आंकड़ा इससे कई गुना ज्यादा भयानक है क्योंकि आज भी ऐसी घटनाओं की शिकार ज्यादातर महिलाएं पुरानी संकोची मानसिकता के तहत, किसी भी किस्म की बदनामी से बचने के लिए अपने साथ हुए गलत काम को चुपचाप सह जाती है और उसकी कोई भी पुलिस कम्प्लेन नहीं करती हैं जिससे बात मीडिया (अखबार, न्यूज़ चैनेल्स) तक नहीं पहुँचने पाए !

भारतीय समाज में लोगों को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है जिससे गलत हरकतों की शिकार महिलायें ज्यादा साहस से दुष्टों को सजा दिलाने के लिए कदम उठा सकें और पुलिस की सहायता लेने से बिल्कुल हिचके नहीं ! आज का मीडिया भी पीड़ित महिला की आइडेंटिटी गुप्त रखने में बहुत मदद करता है !

वैसे जो पुरानी कहावत है कि ‘अपनी इज्जत अपने हाथ’ काफी हद तक सही है, क्योंकि हर स्त्री की एक लक्ष्मण रेखा होती है और लक्ष्मण रेखा पार करने की गलती करने पर तो श्री राम जैसे परम ताकतवर शख्स की पत्नी सीताजी का भी अपहरण हो गया था !

मतलब अगर किसी औरत में दुष्ट लोगों से लड़ने का शारीरिक बाहुबल है तो वो तब भी काफी हद तक सुरक्षित है पर यदि कोई महिला अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से दूसरों पर या किस्मत पर निर्भर है तो उस महिला के लिए बेहतर यही होता है कि वो कभी भी ऐसे भड़काऊ कपड़े पहनकर ऐसे असुरक्षित माहौल में ना जाय, जहाँ उसके लिए कोई मुसीबत खड़ी हो जाय !

dertzनवरात्रि के तीसरे दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा होती है ! वैसे तो श्री चंद्रघंटा का चरित्र परम रहस्यमय है पर सरल भाषा में समझें तो चन्द्र अर्थात मन के नियंत्रण से परम तत्व की खोज का सतत प्रयास करना ! मतलब रोटी, मकान और बच्चों की चिन्ता तो मानवों को छोड़ अन्य सभी लाखों किस्म के जानवर भी करते हैं पर मानव ही वो जीव है जो इन सभी चिन्ताओं के परे परम दुर्लभ उपलब्धी, मोक्ष के लिए प्रयास कर सकता है और उसे करना भी चाहिए, नहीं तो जो मानव मोक्ष प्राप्ति के लिए कुछ भी मेहनत नहीं करते, भगवान् भी उन्हें समझ लेते हैं कि इनकी बुद्धि की औकात केवल इन तुच्छ नाशवान चीज़ों तक ही सीमित है इसलिए इन्हें अगले जन्म में मानव बनाने से कोई फायदा नहीं हैं अतः इन्हें अगले जन्म में लाखों जानवरों में से किसी जानवर योनि में जन्म दे देना ही बेहतर है !

नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की आराधना होती है ! माँ कूष्मांडा अपने गर्भ में पूरे जगत को धारण करती और पालती हैं ! ऐसा महान भाव आज की डेट में कितने आदमी औरतों में बचा है ? आजकल लोग बात करते हैं सिर्फ पर्सनल सैटिस्फैक्शन की ! पर्सनल सैटिस्फैक्शन की बातें करने वाले स्वार्थी लोग अगर कभी बहुत ज्यादा दयालु होंते भी हैं तो वे पर्सनल से ऊपर उठकर सिर्फ अपने फैमिली सैटिस्फैक्शन (भलाई) तक ही सोच पाते हैं पर इनसे ये उम्मीद करना ही व्यर्थ है कि अपनी फैमिली से भी ऊपर उठकर पूरी दुनिया के सैटिस्फैक्शन (बेहतरी) के लिए कुछ सोचें और करें !

नवरात्रि के पांचवे दिन स्कन्द माता की आराधना होती है ! श्री स्कन्द इतने महान पराक्रमी और दयालु हैं कि उन्होंने कई बार इस पृथ्वी को भीषण आपदाओं से बचाया है ! श्री स्कन्द ऐसे महान काम कर पाए क्योंकि उन्हें ऐसे काम करने का दुर्लभ प्रशिक्षण उनकी परम ममतामयी और बेहद मेहनती माँ पार्वती ने दिया था ! जो महिलाएं अपनी परिवार की अनिवार्य आर्थिक आवश्यकताएं पूरी करने के लिए बाहर जाकर जॉब करती हैं उनकी मेहनत भी उन महिलाओं की ही तरह सराहनीय व प्रशंसनीय है, जो घर में रहकर घर को इतना बढ़िया संभालती हैं कि घर ही स्वर्ग लगने लगता है !

पर अक्सर ये देखने को मिलता है कि आजकल की अधिकाँश पढ़ी लिखी घरेलू महिलायें इस कदर आलसी हो चुकी हैं कि, सिर्फ गप्पे मारने के अलावा हर जरूरी काम करने में उन्हें बुखार आने लगता है ! यहाँ तक की उनके बच्चे भी नौकरानियों के भरोसे पल रहे हैं ! प्रतिदिन कई बार ऐसे मौके आते हैं जब ऐसी माएं अपने बच्चों और पति के लिए खुद कुछ काम अपने हाथों से कर सकती हैं पर ये माएं साफ़ साफ़ उन मौकों को ये सोचकर अवॉयड (टाल) कर देती हैं कि जब नौकरानी ये काम कर सकती है तो उन्हें क्या जरूरत है करने की, पर उन्हें ये नहीं मालूम उनके इन्ही कामचोर और झूठे व्यवहार की वजह से उनके लड़के और पति भविष्य में उनसे परायों की तरह व्यवहार करेंगे !

नवरात्रि के छठें दिन कात्यायनी माँ की पूजा होती है ! कात्यायन नाम के अति त्यागी, सत्यवादी, तपस्वी और परोपकारी ऋषि के घर माँ दुर्गा, कात्यायनी नाम से प्रकट हुई ! देवी का यह चरित्र यही बयान करता है कि अगर व्यक्ति महानता वाले गुणों को लम्बे समय तक निभाए तो स्वयं ईश्वर भी उसके घर पुत्र या पुत्री के रूप में जन्म लेकर उसे अथाह सुख और अमरता प्रदान करते हैं !

jiuनवरात्रि के सांतवें दिन महामाया कालरात्रि की पूजा होती है ! देवी कालरात्रि का रूप अति भयानक है और इनका काम बेहद हिंसक और क्रूर है ! प्रलय काल में जब तम तत्व अर्थात पाप का महासाम्राज्य स्थापित हो जाता है तब जगदम्बा कालरात्रि का रूप धर कर सब निगल जाती हैं ! ठीक यही सन्देश ये अपने भक्तों को भी देती हैं कि जब दुष्ट लोग, सज्जन आदमियों की शराफत को उनकी कमजोरी समझने लगें तो सज्जन भी सत्य और न्याय की पुनः स्थापना के लिए अहिंसा का मार्ग छोड़, दण्ड का मार्ग अपना सकते हैं !

नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा होती है ! देवी गौरी मुख्यतः प्रसिद्ध हैं जीवन साथी का सुख प्रदान करने के लिए ! पर जीवन साथी की लम्बी उम्र, प्रसन्नता जैसी बातें आजकल के बहुत से पुरुष व महिलाओं के लिए विशेष मायने नहीं रखती !

इस कलियुग में जहां वाकई में ऐसे नपुंसक पुरुष हैं जो दहेज़ के लिए अपनी पत्नियों को प्रताड़ित करते हैं, वही ऐसी पापी महिलायें भी हैं जो अपने सज्जन पति और निर्दोष ससुराल वालों पर फर्जी दहेज़ प्रताड़ना का मुकदमा लगा कर जेल भेजवा कर जिन्दगी भर के लिए उन्हें अपमानित कर देती हैं !

भारतवर्ष में अगर पतियों के अत्याचार से पत्नियों की आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी हैं तो पत्नियों के अत्याचार से पतियों के आत्महत्या की घटनाएं भी बढ़ी हैं ! पति पत्नी के इन विवादों की बढ़ती घटनाओं के पीछे कुछ समाजशास्त्री आजकल होने वाले उन सो कॉल्ड लव मैरिजेस को भी दोषी मानते हैं जिसमे लड़के लड़कियां, जवानी के उत्साह में बिना कुछ भविष्य वर्तमान का हानि लाभ सोचे हुए, आपस में शादी कर लेते हैं और ऐसे ज्यादातर केसेस में जब लव के भेष में छुपे लस्ट की खुमारी उतरती है, तब शुरू होता है सिर्फ आपसी झगड़ा !

असल में आजकल, क्या आदमी क्या औरत, जिधर देखो उधर, बहुत से लोग काम (वासना) से वशीभूत होकर अमर्यादित सोच और आचरण में व्यस्त है ! कामदेव को भगवान् शंकर ने अमरता का वरदान दिया है इसलिए कोई भी आदमी या औरत अपने मन में स्थित काम की भावना को मार नहीं सकता पर हाँ मन से बाहर जरूर निकाल सकता है ठीक उसी तरह जैसे भगवान कृष्ण ने यमुना नदी से कालिया नाग को बाहर खदेड़ दिया था ! असल में भगवान् कृष्ण के जीवन की इस घटना का तात्विक मतलब यही है कि गोपियों के साथ महारास शुरू करने के कुछ दिन पहले श्री कृष्ण ने काम की अपवित्र भावना को बाहर निकाल दिया था ! यमुना नदी, गोपियों के प्रेम का प्रतीक थी जबकि नदी में रहने वाला कालिया नाग उस गोपी प्रेम को दूषित करने वाला, काम की भावना थी !

नवरात्रि के नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा होती है ! देवी सिद्धिदात्री ही सभी कामों के फल को देने वाली हैं ! व्यक्ति अपने जीवन में, सहनशीलता, मानसिक पवित्रता, मेहनत, दयालुता, क्षमा, शौर्य, सत्यवादिता और सत्याचरण के शुद्ध कर्मों को भगवती के चरणों में बारम्बार समर्पित करे तो देवी सिद्धि दात्री उस पर अपने आप परम प्रसन्न होकर ऐसा महान दुर्लभ फल प्रदान करती हैं कि सिर्फ वो व्यक्ति ही नहीं बल्कि उसकी इक्कीस पीढियां भी तर जाती हैं !

उपर्युक्त लिखे सभी महान गुण, हर अच्छे बुरे आदमियों के अन्दर हमेशा व्यक्त, अव्यक्त रूप से विदयमान रहते हैं ! अगर कोई व्यक्ति बार बार अपनी गलत आदतों के आगे हार मान लेता हो तो उसे ईश्वरीय सहायता की जरूरत पड़ती है ! ईश्वरीय मदद पाने के लिए कोई बहुत हाई फाई पूजा पाठ आदि करने की जरूरत नहीं होती है, बस अपनी रुचि अनुसार कोई भी भगवान का नाम या देवी के नाम को जब भी खाली समय मिले या नौकरी/बिजनेस करते समय भी जपा जा सकता है !

इस निरन्तर जप से मन में जमे हुए जन्म जन्मान्तरों के घटिया विचारों की गन्दगी की बहुत बढ़िया सफाई होती है और पापी से पापी आदमी के अन्दर भी सभी महापुरुषों वाले अच्छे गुण निश्चित ही उभरने लगते हैं !

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